संजीवनी टुडे

अवैध जमा योजना पाबंदी संबंधी विधेयक को संसद की मंजूरी

संजीवनी टुडे 29-07-2019 17:57:27

अवैध जमा योजना पाबंदी विधेयक, 2019 कों साेमवार को संसद की मंजूरी मिल गयी।


नई दिल्ली। पॉन्जी जमा योजनाओं पर प्रतिबंध लगाने वाले अवैध जमा योजना पाबंदी विधेयक, 2019 कों साेमवार को संसद की मंजूरी मिल गयी। राज्यसभा ने इसे आज ध्वनिमत से पारित कर दिया जबकि लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है । 

राज्यसभा ने इसे पारित करने से पहले मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के इलामारम करीम तथा तीन अन्य सदस्यों के इस संबंध में लाये गये अध्यादेश को निरस्त करने के सांविधिक संकल्प को ध्वनिमत से खारिज कर दिया । कांग्रेस के टी सुब्बारामी रेड्डी ने विधेयक में पेश अपने संशोधनों को वापस ले लिया । 

यह विधेयक अवैध जमा योजना पाबंदी अध्यादेश, 2019 का स्थान लेगा जो इस साल 21 फरवरी से प्रभाव में आया था। पिछली लोकसभा में 13 फरवरी 2019 को यह विधेयक पारित किया गया था, लेकिन राज्यसभा में इसे नहीं लाया जा सका था । सोलहवीं लोकसभा के भंग हो जाने पर यह विधेयक स्वत: निरस्त हो गया था जिसके कारण इसे नयी लोकसभा में फिर से पारित कराया गया और उसके बाद राज्यसभा में लाया गया । 

वित्त राज्य मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने विधेयक पर हुयी चर्चा का जवाब देने हुए कहा कि इसके कानून बनने पर गरीब भोलेभाले लोगों को पाॅन्जी योजनाओं के माध्यम से लूटा नहीं जा सकेगा । 

विधेयक में सिर्फ उन लोगों का केंद्रीय डाटा बैंक बनाने का प्रावधान है जो इस तरह की जमा योजनाएँ चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि रियल इस्टेट में निवेश और संबंधियों तथा दोस्तों से आपात स्थिति में पैसा लेने को इस कानून के दायरे से बाहर रखा जायेगा।

विधेयक में अवैध जमा योजनाओं पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव किया गया है। इसमें कहा गया है कि ऐसी जमा योजना के लिए पैसे माँगने वालों को एक साल से पाँच साल की जेल की सजा होगी तथा दो लाख से 10 लाख रुपये जुर्माना लगाया जायेगा। इन योजनाओं के लिए जमा स्वीकार करने वालों के लिए दो से सात साल की कैद और तीन से 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।

जमा स्वीकार करने और उसके बाद वापस नहीं करने वालों को तीन से 10 साल की कैद और कम से कम पाँच लाख रुपये का जुर्माना भरना होगा। विधेयक में ऐसी जमा योजना चलाने वालों की संपत्ति जब्त करने और उसे बेचकर जमाकर्ताओं के पैसे लौटाने का भी प्रावधान है। इसमें राज्य सरकारों को यह अधिकार दिया गया है कि ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों का गठन कर सकें।

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