संजीवनी टुडे

पेपर लीक मामला: इग्नू के संविदा कर्मचारी समेत पांच गिरफ्तार

संजीवनी टुडे 04-03-2019 01:45:00


नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने पिछले साल 2018 में इग्नू के एमसीए और बीसीए के दो पेपर लीक करने के मामले में इग्नू में संविदा पर कार्यरत सहायक और उसके चार साथियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस का जांच के बाद यही कहना है कि संविदाकर्मी पेपर लीक मामले का मास्टर माइंड हैं और 2017 में भी पेपर लीक कर चुका है। पेपर की फोटो खींचने के बाद व्हाट्सअप के जरिए अपने साथियों को भेजता था। छात्रों को ये पेपर 1500 रुपये में बेचे जाते थे। पकड़े गए मास्टर माइंड की पहचान मूलरूप से नालंदा,बिहार के रहने वाले और वर्तमान में बोकारो,झारखंड की प्रभात कॉलोनी में रहने वाले देव शंकर के रूप में हुई है। वह पिछले 13 वर्ष से संविदा पर बोकारो स्टील सिटी स्थित इग्नू के स्टडी सेंटर में सहायक का काम करता था। एक अन्य युवक विवेक(झारखंड के बुरकुंडा का रहने वाला) को बेंगलुरु से गिरफ्तार किया गया। 

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जबकि उत्तर प्रदेश के संभल के रहने वाले अंकित सक्सेना, राजस्थान के बीकानेर के रहने वाले मोहम्मद इकबाल और झारखंड के बोकारो के रहने वाले जानसन हेंस को भी गिरफ्तार किया गया है। क्राइम ब्रांच ने उस मोबाइल को भी बरामद कर लिया है, जिसके जरिए पेपर की फोटो खींची गई और फिर व्हाट्सअप पर भेजी गई।क्राइम ब्रांच के एडीशनल कमिश्नर ए.के. सिंघला ने बताया कि मैदान गढ़ी स्थित इग्नू के रजिस्ट्रार एसजी स्वामी ने आठ दिसंबर,2018 को नेब सराय थाने में एमसीए के तीसरे सेमेस्टर के आठ दिसंबर को होने वाले पेपर के लीक होने का मामला दर्ज कराया था। वहीं पांच दिसंबर को भी उन्होंने डाबड़ी थाने में बीसीए तीसरे सेमेस्टर के पांच दिसंबर को होने वाले पेपर के लीक होने की शिकायत की थी। उन्होंने बताया कि उन्हें दो ई-मेल के जरिए पेपर भेजे गए थे। वे वहीं पेपर थे, जो आठ दिसंबर को होने वाले थे और सात दिसंबर को लीक कर दिए गए थे। 

मामले की जांच के लिए डीसीपी भीष्म सिंह के नेतृत्व में टीम का गठन किया गया। सर्विलांस और तकनीकी जांच के बाद क्राइम ब्रांच की टीम ने बोकारो से देव शंकर को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने बताया कि वह जिस स्टडी सेंटर में काम करता था, वहां का सारा स्टॉफ उस पर बहुत भरोसा करता था। अलमारी की चाबियों से लेकर स्टडी सेंटर के सभी दरवाजों की चाबियां उसी के पास रहती थीं। दिल्ली स्थित इग्नू के मुख्यालय से पेपर स्पीड पोस्ट के जरिए भेजे जाते थे। सील बैग में पेपरों को सेंटर के कॉर्डिनेटर हरेंद्र नाथ लेते थे। इसके बाद परीक्षा के दो-तीन दिन पहले सभी बैग को खोलकर पांच-छह स्टॉफ के लोगों की मदद से तारीख और शिफ्ट के हिसाब से पेपर अलग किए जाते थे। 

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सात-आठ घंटे के इस काम को करने के बाद सभी पेपर को अलग करके लोहे की अलमारी में रखा जाता था, जिस समय पेपर को अलग-अलग करके अलग लिफाफों में रखा जाता था, उसी समय मौका पाकर देव शंकर कैंची की मदद से लिफाफे को खोलकर मोबाइल से फोटो खींचने के बाद फेवीकोल से अच्छी तरह लिफाफे को बंद कर देता था। इसके बाद व्हाट्सअप से पेपर को लीक किया था। पूछताछ में आरोपित ने बताया कि दिसंबर में होने वाली परीक्षा के पेपर 21 नवंबर को सील बैग में स्टडी सेंटर पहुंचे थे। उसने पांच दिसंबर के पेपर को चार दिसंबर को और आठ दिसंबर के पेपर को सात दिसंबर को लीक किया था। जितने भी छात्रों के पास से पेपर पहुंचे थे, उन सभी से डेढ़-डेढ़ हजार रुपये के हिसाब से पैसे लिए गए थे। कुछ पैसे उसने नकदी के रूप में और कुछ अपने बैंक खाते में डलवाए थे।

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