संजीवनी टुडे

पाकिस्तान भी ले सकता है चीन का 'आईएफटी- 2000जी' : डॉ. आर. बी. चौधरी

संजीवनी टुडे 25-11-2018 14:42:06


एक तरफ जहां देश में राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के मामले पर विवाद रुकने का नाम नहीं ले रहा है, वहीं चीन ने 'आईएफटी- 2000जी' को लांच कर उसकी बिक्री के लिए बाजार खोजना शुरू किया है। इस अत्याधुनिक लड़ाकू विमान को गुप-चुप ढंग से अति शीघ्रता से तैयार चीन ने दुनिया को चौंका दिया है। यह विमान प्रशिक्षण कार्यों से ले कर अचूक मार करने में भली प्रकार दक्ष है। चीन का यह स्वदेशी विमान बहुउद्देशीय है जिसे निर्यात हेतु तैयार किया है। इससे चीन को विश्व पटल पर सामरिक क्षेत्र में एक दबदबा बनाने का भी मौका मिल गया। 

जंगी जहाज- “एफटीसी-2000जी” ने 29 सितंबर ,2018 को चीन के दक्षिण पश्चिम गुइझोऊ प्रांत में पहली बार उड़ान भरी। खबर में बताया गया कि विमान करीब 16 मिनट तक उड़ा और इस मौके पर सेना के कई बड़े अधिकारी, तमाम राष्ट्रों के सैन्य अफसर, विभिन्न देशों के राजदूत समेत एक हजार से ज्यादा लोग मौजूद थे। उल्लेखनीय है कि चीन ने हाल के वर्षों में विभिन्न प्रकार के कई लड़ाकू विमान विकसित किए हैं। चीनी मीडिया के अनुसार एफटीसी 2000जी एक हल्का लड़ाकू विमान है। इस विमान के मुख्य कमांडर वांग वेनफेई के मुताबिक इसे विकसित करने में एक साल सात महीने का समय लगा। यह अब तक का एक रिकॉर्ड समय है। 

चीन का विश्वास है कि निर्यात के दृष्टिकोण से विकसित इस विमान का भविष्य काफी उज्ज्वल है। एफटीसी 2000 जी बतौर एक प्रशिक्षक लड़ाकू विमान आर्मी और और नेवी की सभी आवश्यकताओं को पूरा करेगा। विमान के कांच के दोहरे परत से बने हुए कॉकपिट में आगे -पीछे दो पायलटों को बैठने की व्यवस्था है। खराब मौसम एवं प्रतिकूल वायु झोंकों से बचने के लिए विमान की नुकीली नाक एयरोडायनेमिक्स फीचर के अनुसार तैयार की गयी है। ऐसा होने से इसके मारक क्षमता पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा। कॉकपिट की पारदर्शी संरचना के साथ छतरीनुमा भव्य कवर पायलट को स्पष्ट रूप से लक्ष्य देखने में काफी सहायक है। विमान आधुनिक रडार से सिर्फ लैस ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण संचार प्रणाली तथा इसकी अग्नि शमन नियंत्रण व्यवस्था भी अत्यंत प्रभावशाली है। 

विमान के विंग की कुल लंबाई और ऊंचाई क्रमशः 15.4 मीटर और 4.8 मीटर है। इस लिए गोला बारूद लोड करने की व्यापक व्यवस्था है। यह विमान मिसाइलों, रॉकेटों और बमों से भली प्रकार लोड होने में सक्षम है। साथ ही इसमें एक ही ऑपरेशन में 3 टन तक के वजनी हथियार लोड करने की क्षमता भी है। जानकारी के अनुसार एफटीसी -2000जी अधिकतम 1.2 मैक यानी 1,470 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से उड़ान भर सकता है। यह बिना किसी ईधन आपूर्ति के एक बार में 1,650 किमी की अधिकतम दूरी तय करने में सक्षम है।
इससे दो घंटे से अधिक समय तक हवा में लगातार उड़ने 15 किमी तक की ऊंचाई पर पहुंचकर निशाना साधा जा सकता है।

यह 210 किमी प्रति घंटा की गति के दौरान भी लैंडिंग और 230 किमी प्रति घंटा गति से उड़ने में समर्थ है. विमान को कम ऊंचाई पर बड़े ही सफलतापूर्वक संचालित किया जा सकता है। लैंडिंग के लिए 410 मीटर की दूरी की पट्टी पर्याप्त है। अधिकतम 11 मीट्रिक टन युद्ध सामग्री ढोने में समर्थ है।इसका उपयोग अन्य कई महत्वपूर्ण कार्य जैसे - हवाई निगरानी, गश्ती का कार्य , पुनर्जागरण, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, अति निकट हवाई सहायता और आसमान में पहरेदारी जैसे सभी मिशन पूरा करने लायक बनाया गया है। 

बीजिंग में एक विमानन उद्योग विश्लेषक के अनुसार सभी मौसम में दिन -रात कार्य कर सकने वाला यह विमान एक सस्ता एवं बहुआयामी सैन्य विमान साबित हो सकता है। यह विकासशील देशों की आवश्यकताओं के अनुरूप काफी सटीक है। क्योंकि इसका परिचालन और रख-रखाव कम खर्चीला है।अपनी कार्यक्षमता की वजह से दूसरी पीढ़ी के जेट फाइटर विमान जैसे एफ-7,ए-5 एयरक्राफ्ट, अल्फाबेट तथा एफटी-7 प्रशिक्षक विमान भी इससे पिछड़ जाएंगे। इसलिए इसका निर्माण अंतरराष्ट्रीय सैन्य उद्योग की आवश्यकताओं को देख कर किया गया है। चीनी सैन्य पर्यवेक्षकों के अनुसार दक्षिण पूर्व एशियाई और अफ्रीकी देशों की कई वायु सेनाएं आयातित- महंगे लड़ाकू विमानों का उपयोग बड़ी मजबूरी में कर रहे हैं।

डिफेंस एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल (सिंगापुर) के डिफेन्स एक्सपर्ट रिचर्ड बिट्जिंगर के अनुसार चीन का अंतरराष्ट्रीय बाजार पाना एक मुश्किल काम है। बड़ी रोचक बात यह है कि चीन द्वारा निर्मित एफसी-1 का संचालन सिर्फ पाकिस्तान ही करता है। अब सवाल यह खड़ा होता है कि कम बजट वाले लड़ाकू विमान जैसे-एफटीसी2000जी के लिए बाजार खोजने में क्या चीन कामयाब हो पाएगा। चीन शायद अभी यह न भूला होगा कि उसे चेंगदू एफसी-1 तथा जेएफ-17थंडर को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कोई खास सफलता नहीं मिल पाई। ऐसे में एफटीसी-2000जी के लिए खरीदार मिल जाय , इतना आसान नहीं है। इसलिए म्यांमार जैसे देश भी अधिक बजट वाले विमानों को ही खरीदना पसंद करेंगें नकि एफटीसी-2000जी को। 

चाईना डेली का मानना है कि एफटीसी-2000जी सहित कई विमान चीन ने चुपके चुपके विकसित किए हैं।साथ ही साथ चीन संयुक्त रूप से पाकिस्तान जैसे देशों के साथ मिलकर भी विमान निर्माण परियोजनाएं संचालित करता रहा है। चौंकाने वाली बात तो यह है कि चीन अभी तक जेट इंजन का विकास स्वयं नहीं कर पाया है और वह रूस से आयात करता है।

चीन के लड़ाकू विमान विशेषज्ञों के अनुसार इस विमान को विकसित करने में उसे 2 साल से भी कम समय लगा है। भारत ऐसे लड़ाकू विमान विकसित करने में काफी समय लगायेगा। चीन के विशेषज्ञ याद दिलाते हैं कि भारतीय विमान “तेजस” को विकसित करने में भारतीय इंजीनियर्स को 40 साल लगे। कुछ रक्षा विशेषज्ञों का मानना है की पिछले कई वर्षों से भारत की रक्षा नीति अस्त- व्यस्त रही है। सामरिक नीतियों में जब सकारात्मक वातावरण बनाना चालू हुआ तो राजनितिक गरमागर्मी बढ़ गयी, आरोप-प्रयारोप का सिलसिला चालू हो गया, जबकि रक्षा मामले में देश को एकजुट रहना चाहिए। हालांकि , गत वर्षों में भारतीय सैन्य क्षमता में काफी सुधर हुआ है।

वर्तमान सरकार द्वारा आर्थिक सुधारों के प्रयास के साथ-साथ अतरराष्ट्रीय सम्बन्ध एवं रास्ट्रीय कूटनीति काफी सफल रही है। इसी का नतीजा है कि आज भारत को सैनिक साज-सामान आपूर्ति के लिए सभी विकसित देश लालायित हैं। देश में सैन्य उपकरणों के आयात एवज में निर्यात की व्यवस्था होनी चाहिए। इस मामले में कई देशों के साथ तकनीक हस्तांतरण एक शुभ संकेत है। सरकार के “मेक इन इंडिया” विकास मंत्र अर्थात स्वावलंबन से ही चीन जैसे देश के नकारात्मक सोच को मुहतोड़ जबाब दिया जा सकता है। 

(वैज्ञानिक एवं तकनीकी संचार पर कार्यरत प्रतिष्ठानों से जुड़े लेखक,भारत सरकार की कई पत्रिकाओं के सम्पादक रहे हैं) 

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