संजीवनी टुडे

पाकिस्तानी महिला के खिलाफ 25 मार्च तक निरोधात्मक कार्रवाई नहीं करने के आदेश

संजीवनी टुडे 12-03-2019 20:21:33


नई दिल्ली। दिल्‍ली हाईकोर्ट ने एक पाकिस्‍तानी महिला के खिलाफ कोई भी निरोधात्मक कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया है। उस महिला को भारत सरकार ने देश छोड़ने का आदेश दे रखा है। चीफ जस्टिस राजेंद्र मेनन की अध्यक्षता वाली बेंच ने 25 मार्च तक उस महिला के खिलाफ कोई भी निरोधात्मक कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को 25 मार्च तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। आज सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि महिला के खिलाफ जो गोपनीय सिक्योरिटी रिपोर्ट पेश की गई है वो भरोसे के लायक नहीं है। कोर्ट ने महिला को स्थानीय थाने में एक दिन छोड़कर रिपोर्ट करने का निर्देश दिया। 

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कोर्ट ने कहा कि महिला को थाने में एक घंटे से ज्यादा बैठाकर नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने कहा कि महिला को 2007 में जो लॉन्ग टर्म वीजा जारी किया गया था, उसे अभी तक निरस्त नहीं किया गया है। तब केंद्र सरकार के वकील अनुराग अहलूवालिया ने कहा कि एक बार जब उसे देश छोड़ने के लिए कह दिया गया इसका मतलब कि उसका वीजा निरस्त हो गया। वीजा को जारी करना और उसे निरस्त करना सार्वभौम अधिकार है और उसके खिलाफ कोर्ट जाने का अधिकार नहीं है। तब कोर्ट ने कहा कि कुछ भी मनमाने तरीके से नहीं किया जा सकता है। पिछले 28 फरवरी को हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने महिला को दो हफ्ते में भारत छोड़ने का निर्देश दिया था। जस्टिस विभू बाखरू ने कहा था कि आपने भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए कुछ नहीं किया है, इसलिए आप भारत में नहीं रह सकती हैं।

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37 वर्षीय महिला के खिलाफ भारत सरकार ने देश छोड़ने का आदेश दे रखा था। इसी आदेश के खिलाफ महिला ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। पाकिस्‍तानी महिला 2005 में एक भारतीय से शादी कर दिल्ली में आकर रह रही थी। महिला के दो बेटे भी हैं। केंद्र सरकार ने पिछले 7 फरवरी को महिला को भारत छोड़ने का नोटिस भेजा था। केंद्र के इस नोटिस के खिलाफ महिला ने याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि महिला को लॉन्ग-टर्म वीजा दिया गया है। ये वीजा जून 2020 तक के लिए वैध है। याचिका में महिला ने कहा कि शादी के बाद से वह दिल्ली में रह रही है और बगैर किसी गलती के केंद्र सरकार के नोटिस के कारण उसके अधिकार को खतरे में डाला जा रहा है। 

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