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एक देश-एक राशन कार्ड योजना आज की जरूरत, दूर होगी भोजन की चिंता

संजीवनी टुडे 01-07-2020 09:02:14

यदि यही स्कीम लागू होती है तो इस योजना से श्रमिक व मजदूर वर्ग, अभावग्रस्त और वंचित वर्ग के साथ महिलाओं को बहुत अधिक फायदा होगा।


डेस्क। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत सार्वजनिक वितरण प्रणाली द्वारा सस्ता और रियायती दरों पर अनाज उपलब्ध करवाने के लिए आज की आवश्यकता है एक देश- एक राशन कार्ड की नीति। इसका औपचारिक ऐलान हमारे देश के प्रधानमंत्री मोदी ने भी कल के संवाद में कर दिया है। जिसका लाभ देश के 80 करोड़ लोगों को मिलने की संभावना है। यह नीति उन मजदूर और श्रमिकों के लिए वरदान साबित हो सकती है। जो एक प्रदेश से देश के दूसरे प्रदेश में आजीविका की तलाश में जाते हैं। 

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अभावग्रस्त और वंचित वर्ग को होगा अधिक फायदा-
यदि यही स्कीम लागू होती है तो इस योजना से श्रमिक व मजदूर वर्ग,  अभावग्रस्त और वंचित वर्ग के साथ महिलाओं को बहुत अधिक फायदा होगा। पहले प्रदेश सरकार द्वारा ही राशन कार्ड जारी किए जाते रहे हैं। राशन कार्ड जिस राज्य,क्षेत्र से जारी हुआ है, उस राज्य, क्षेत्र की ही किसी नियत उचित मूल्य की दुकान से राशन प्राप्त करने की बाध्यता भी होती थी। 

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यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि हमारे देश की जनसंख्या में अधिकांश राशन कार्ड धारक अपनी आजीविका की खोज में अपने प्रदेश से दूसरे प्रदेश को प्रवास करने के लिए निकलते हैं। प्रवास करने के दौरान वहां की सरकार द्वारा उनको रियायती दर पर अनाज उपलब्ध कराना मुश्किल होता है। अब सस्तेऔर रियायती दर पर अनाज प्राप्त करने के लिए महंगा किराया लगा कर वे अपने प्रदेश को बार-बार लौट भी नहीं सकते। ऐसी स्थिति में उनको सस्ता राशन प्राप्त करना मुश्किल होता है। 

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प्रवास में राशन प्राप्त करना बहुत मुश्किल-
प्रचलित सार्वजनिक वितरण प्रणाली में राशन कार्ड धारक अपने क्षेत्र की नियत उचित मूल्य की दुकान से ही राशन प्राप्त कर सकता था। एक राष्ट्र एक राशन की नीति यदि लागू रहती तो लोक डाउन की स्थिति में यह श्रमिक और कामगार अपने हिस्से का राशन जहां रहते हैं, वही प्राप्त कर लेते तो बहुत अच्छा होता। भारत में बहुत अधिक लोग ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर माइग्रेट करते हैं। यह माइग्रेशन अंत: राज्य और अंतर-राज्य दोनों प्रकार का हो सकता है। उनका राशन कार्ड अपने गांव और ग्रामीण क्षेत्र की उचित मूल्य की दुकान के लिए ही वैध होता है। ऐसी स्थिति में उनके लिए उचित मूल्य की दुकान से प्रवास में राशन प्राप्त करना बहुत मुश्किल है। उनका राशन कार्ड ग्रामीण क्षेत्र में और वह खुद शहरी क्षेत्र में। अब सस्ते और रियायती दर पर राशन को प्राप्त करने के लिए किराया लगाकर गांव जाते हैं, तो वह उनके लिए बहुत महंगा पड़ जाएगा।

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लॉक डाउन से पहले ज्यादा कारगर होती योजना-
नई राशन कार्ड और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के बाद पूरे देश में यह प्रवासी मजदूर कहीं से भी अपने हिस्से का सस्ता राशन प्राप्त करने के लिए वैद्य होंगे। यदि यह नीति लागू होती है। इसके बाद प्रवासी मजदूर जहां भी काम कर रहा है वही अपने हिस्से का, अपनी सुविधा से, राशन प्राप्त कर सकेगा। इस योजना को सफल बनाया होता तो आज यह योजना बहुत ही कारगर सिद्ध होती। प्रवासी मजदूर जो लॉक डाउन में सबसे मजबूर और बेबस था, अपने घरों को लौटने के लिए विवश नहीं होता। अपने खाने-पीने की चीजों के लिए आत्मनिर्भर होता, उनका पलायन इस हाल में तो कम से कम नहीं होता। इसीलिए एक राष्ट्र एक राशन कार्ड की योजना को लागू करना ही चाहिए। यदि यह स्कीम लागू हो जाती है तो इसके बहुत सारी लाभ होंगे। यह स्कीम अपने प्रदेश से दूर दूसरे प्रदेश में काम करने वाले मजदूरों के लिए वरदान सिद्ध हो सकती है। इस योजना के लागू होने के बाद यह भी प्रभाव नहीं पड़ेगा कि वह किस राज्य? किस जिले के रहने वाले हैं? वे कहीं भी काम कर रहे हैं, उन्हें अपने हिस्से का राशन जहां है, वही उपलब्ध आसानी से होना संभव हो पाएगा।

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सामाजिक भेदभाव कम होगा-
एक राष्ट्र एक राशन कार्ड स्कीम से लाभार्थियों को बल मिलेगा । उनके हिस्से की राशन में बेईमानी, धोखाधड़ी, कम अनाज देना, कुछ उचित मूल्य की दुकानों पर लाभार्थियों के साथ दुर्व्यवहार किया जाता था। अनाज कम और खराब दिया जाता था। इसकी शिकायतें दुकानदारों के खिलाफ लगातार आती रहती थी, इन सभी समस्याओं से छुटकारा मिलेगा। मजदूरों को देश के किसी भी हिस्से में उचित मूल्य की दुकान से राशन प्राप्त करना आसान होगा। सार्वजनिक वितरण प्रणाली से सामाजिक भेदभाव कम होगा तथा इससे सबसे अधिक लाभ महिलाओं को होगा। अभाव ग्रस्त तथा वंचित वर्ग के लोगों को भी इससे सबसे बहुत अधिक फायदा होगा। यह स्कीम यदि सही ढंग से लागू हो जाए तो, सभी अभावग्रस्त, गरीब, वंचित और मजदूर अधिक मजबूत बनेंगे। भूख और गरीबी से संबंधित जो सूचकांक हैं उनमें देश की स्थिति में सुधार होगा। इस योजना को लागू कर विकास के लक्ष्यों को बेहतर ढंग से प्राप्त किया जा सकता है। विश्व के 117 देशों में हमारे देश का स्थान ग्लोबल हंगर इंडेक्स में 102 स्थान पर  है। यदि इसे ठीक से लागू किया जाए हमारे देश का स्थान और ऊपर आ सकता है। 

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योजना को लागू करना बहुत बड़ी चुनौती-
इस योजना को लागू करने में चुनौतियां भी कम नहीं है। इस योजना को लागू करने के लिए राशन कार्ड को आधार कार्ड योजना से जोड़ना अपने आप में एक बहुत बड़ी चुनौती है। इस पर बात की जाए तो अभी बहुत सारे लोगों के पास आधार कार्ड भी नहीं है। कई परिवारों के पास राशन कार्ड तो है लेकिन उनका आधार कार्ड के साथ लिंक जब तक नहीं होगा, उन्हें  सस्ता अनाज प्राप्त करना मुश्किल हो जाएगा। कई बार यूं भी देखा जाता है कि जिन लोगों को आधार कार्ड बना है, उनके फिंगरप्रिंट आधार में स्थित डाटा से मेल नहीं खाते। क्योंकि निर्माण कार्य में काम करने वाले मजदूरों को दिन रात मेहनत करने के कारण उनकी उंगलियों के फिंगर प्रिंट्स मिट जाते हैं। ऐसे में वे मजदूर जब राशन लेने जाते हैं, तो उन्हें उचित मूल्य की दुकान पर अंगूठा लगाते समय प्रमाणीकरण की समस्या आती है।उनकी फिंगरप्रिंट्स और बायोमैट्रिक वेरिफिकेशन नहीं होने की दशा में उन्हें राशन नहीं मिलेगा ऐसी स्थिति में उनके हिस्से का राशन उन्हें मिलना मुश्किल हो जाता है।

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कुछ राज्यों पर पड़ेगा अतिरिक्त आर्थिक दबाव-
कई राज्य ऐसे भी हैं जिन्होंने साल तक वितरण प्रणाली को बहुत अच्छे ढंग से लागू किया है। यही नहीं राशन कार्ड धारक लाभार्थियों को उनके वांछित हिस्से से अधिक राशन प्रदान किया है। कई राज्य अपने बजट से खूब सारा धन सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए खर्च करते हैं। अब यह राज्य केंद्र सरकार से यह मांग कर सकते हैं कि हम तो अपने नागरिकों को पहले से ही बहुत अच्छी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। अब दूसरे प्रदेश से आए मजदूरों को सेवा प्रदान करने पर हम पर अधिक आर्थिक बोझ पड़ सकता है। महाराष्ट्र पंजाब कर्नाटक केरल दूसरे प्रदेशों से और प्रवासन के लिए आए मजदूरों की अच्छी खासी संख्या होती है। अपने यहां काम करने वाले मजदूरों को इस योजना से लाभान्वित करने पर इन राज्यों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ेगा, यह भी एक बहुत बड़ी चुनौती होगी।

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उत्तम गुणवत्ता की तकनीक से संपन्न होना अपेक्षित-
एक राष्ट्र-एक राशन कार्ड योजना को लागू करने के लिए उत्तम गुणवत्ता की तकनीक से संपन्न होना भी बहुत अपेक्षित है। इसका कारण यह है कि इस योजना को लागू करने के लिए बहुत सारा डाटा एक ही प्लेटफार्म पर लाना होगा क्योंकि देश में लगभग 750 बिलियन लाभार्थी, 5,33,000 उचित मूल्य की दुकान, 54 मिलीयन टन खाद्य सामग्री को लाभार्थियों के बीच वितरण करना है। इसलिए एक ही सिंगलप्लेटफॉर्म की सहायता से इसे करने के लिए अच्छी तकनीक से संपन्न होना भी आवश्यक है। एक पोर्टल में इन सब चीजों को सम्मिलित करते हुए तकनीक संपन्न डाटा होंगे तभी  इस योजना का लाभ उठाया जा सकता है। 

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योजना को लागू कैसे किया जाए?
अब बात आती है कि इसे लागू कैसे किया जाए? तो केंद्र और राज्य सरकारों को आपस के सहयोग और समन्वय के बिना तो यह योजना लागू होना संभव ही नहीं। इसे लागू करने के लिए जिस तरह से जीएसटी को लागू करने के लिए जीएसटी काउंसिल की स्थापना की थी, ठीक उसी (ओएन-ओआरसी) काउंसिल। एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड  काउंसिल का गठन करना पड़ेगा। यह काउंसिल समय-समय पर बैठकर करती रहे और योजना के लागू होने वाली बाधाओं और समस्याओं का निवारण करती रहे। तकनीक संबंधी किस प्रकार जीएसटीएन सेवाएं प्रदान करता है, ठीक उसी प्रकार ओएन-ओआरसी को लागू करने के लिए पीडीएस नेटवर्क की स्थापना की जा सकती है। 

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इस पीडीएस नेटवर्क पोर्टल पर सभी लाभार्थियों को अपने पंजीकरण, राशन कार्ड जारी करने के साथ, शिकायत और निवारण के लिए तथा डाटा विश्लेषण आदि का ब्यौरा भी रखा जा सके। ऐसा करना होगा। इस पोर्टल द्वारा निजता, सुरक्षा, पारदर्शिता, जवाबदारी व सहभागिता का खास ध्यान रखा जाना चाहिए। पर यह आवश्यक है कि सभी लाभार्थियों को अनाज वितरण में बाधा होने और देर होने से बहुत बड़ी समस्या पैदा हो सकती है। क्योंकि यहां अनाज नहीं मिलने पर खाना नहीं मिलेगा जिससे भूख और कुपोषण की समस्या पैदा हो सकती है। 

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इसलिए इसे लागू करने से पहले हर पहलू पर विस्तृत चर्चा और मूल्यांकन से गुजरने के बाद ही लागू करना चाहिए। आजकल कई राज्यों में हर कार्य और सेवाओं के लिए एक समयावधि नियत होती है। यदि उस समय अवधि में कोई सेवा उपलब्ध नहीं होती तो संबंधित अधिकारी पर जुर्माना लगना शुरू होता है। ऐसे ही चाहे तो ओएन-ओआरसी को लागू करते समय एक निश्चित समयावधि रखी जा सकती है। ऐसा भी नहीं हो चाहिए कि उचित मूल्य की दुकानों के मालिकों को कानूनी दाव- पेच में उलझा दिया जाए। 

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इसके बजाय उनको सरलीकरण मार्ग प्रशस्त कर देना  होगा। जिससे वे भी समयावधि में सेवाएं उपलब्ध करवा सकें। लाभार्थियों को भी कुछ आजादी दी जानी चाहिए, क्योंकि उनकी पहचान का यदि एक तरीका काम नहीं कर रहा है, तो उनके प्रमाणीकरण का और कोई दूसरा तरीका भी लागू करना चाहिए। लाभार्थी द्वारा पंजीकृत फोन का ओटीपी आदि ऐसे पक्ष भी रखे जा सकते हैं। क्योंकि लाभार्थी का फिंगरप्रिंट फैल हो गया हो तो दुकानदार उसे वापस न भेज दे। ऐसी अवस्था में पंजीकृत मोबाइल का ओटीपी का विकल्प भी शामिल किया जा सकता है। 

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प्रवासी मजदूरों के जीवन में आएगा आमूलचूल परिवर्तन-
यदि यह योजना सही ढंग से लागू की जाती है तो प्रवासी मजदूरों के जीवन में आमूलचूल परिवर्तन आएगा।  जिससे उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और देश के आर्थिक विकास में मजबूती से मजदूर वापस जुटेगा। देश की सही परिभाषा भारतीय नागरिक होने का गौरव भी प्राप्त होगा। भारत का कोई भी नागरिक किसी भी प्रदेश किसी क्षेत्र में अधिकार पूर्वक गौरव पूर्ण जीवन बिताने का सुंदर सपना देख सकता है। इसीलिए ओएन-ओआरसी को लागू किया जाना ही चाहिए।

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डॉ गोपाल लाल मीणा
केंद्रीय विश्वविद्यालय, पंजाब।

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