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नई किस्म विकसित, आधे किलो के शरीफा में होगा प्राेटीन और कैल्शियम का खजाना

इनपुट- यूनीवार्ता

संजीवनी टुडे 19-01-2020 15:51:55

कृषि वैज्ञानिकों ने शरीफा (कस्टर्ड एपल) की एक ऐसी किस्म विकसित की है जो न केवल आधे किलो से अधिक वजन का है, बल्कि यह प्रोटीन, फाॅस्फोरस और कैल्शियम का खजाना है और पाचनतंत्र को मजबूत बनाने में सहायक हैं।


नई दिल्ली। कृषि वैज्ञानिकों ने शरीफा (कस्टर्ड एपल) की एक ऐसी किस्म विकसित की है जो न केवल आधे किलो से अधिक वजन का है, बल्कि यह प्रोटीन, फाॅस्फोरस और कैल्शियम का खजाना है और पाचनतंत्र को मजबूत बनाने में सहायक हैं।

शरीफा के कम हो रहे महत्व को ध्यान में रखते हुए भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान (आईआईएचआर), बेंगलूरू ने शरीफा के संकर किस्म ‘अर्का सहन’ का विकास किया है, जिसकी व्यावसायिक पैदावार लगभग पूरे देश में की जा सकती है। इसके एक फल का वजन 600 ग्राम तक होता है और इसके 100 ग्राम गूदे (पल्प) में केवल छह बीज होते हैं।

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परम्परागत शरीफा बहुत छोटे होते हैं और उनमें अधिक संख्या में बीज और मामूली मात्रा में गूदे होते हैं, जिसके कारण इसकी व्यावसायिक पैदावार को लेकर किसानों में उत्साह कम हो रहा था। इसके साथ ही इनमें कम संख्या में फल लगते थे, जिसके कारण भी इसके प्रति लोगों में आकर्षण कम हो रहा था।

आईआईएचआर के प्रधान वैज्ञानिक वी नारायण स्वामी ने बताया कि अर्का सहन का फल सूखा प्रतिरोधी तथा मिठास से भरपूर है। अर्का सहन के 100 ग्राम गूदे में 2.49 ग्राम कच्चा प्रोटीन, 42.29 मिली ग्राम फॉस्फोरस और 225 मिली ग्राम कैल्शियम होता है। इसका फल पाचनतंत्र को मजबूत बनाने में सहायक होने के साथ ही त्वचा को चमकीला बनाने में सहायक है।

डॉ. स्वामी के अनुसार अर्का सहन के पौधे लगाने के तीन साल बाद फलने लगते हैं और शुरुआत में प्रति पौधे करीब पचास फल लगते हैं। चार-पांच साल में इसका पेड़ वयस्क होता है और उस समय इसमें प्रति पौधे 60 से 70 किलोग्राम तक फल लगते हैं। इसके पौधे 10 से 15 फीट की दूरी पर लगाये जा सकते हैं। इसके साथ ही इसकी सघन बागवानी भी की जा सकती है। इस विधि से प्रति एकड़ 180 पौधे लगते हैं। भरपूर पैदावार के लिए इसके शाखाओं की हरेक साल कटाई-छंटाई करनी पड़ती है। इसकी बागवानी से किसान प्रति एकड़ दो लाख रुपये तक की आय अर्जित कर सकते हैं।

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उन्होंने बताया कि अर्का सहन के फलों की तुड़ाई सितंबर-अक्तूबर में की जाती है और इसके फल को पूर्ण रूप से पकने में लगभग छह-सात दिन का समय लगता हैं। इसके छिलके पर मोमी चमक होती है, इसके फल का रंग हल्का हरा, छिलका मध्यम पतला (0.5 से. मी.) और लंबा होता है, इसकी सपाट आंखे होती हैं। इसके क्रीम रंग के गूदे में रस होता है। इसमें मध्यम सुगंध और कच्‍चे एवं मुलायम बीज होते हैं जिनका आकार बड़ा होता है।

किसान अर्का सहन का ग्राफ्ट पौधा संस्थान से खरीद सकते हैं। महाराष्ट्र में करीब 15 हजार हेक्टेयर में अर्का सहन के बाग लगाये गये हैं। हरियाणा, राजस्थान, तमिलनाडु और आन्ध्र प्रदेश में भारी मांग है।

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