संजीवनी टुडे

पर्यावरण संरक्षण में आदिवासी समुदाय से सीखने की जरुरत: मुंडा

इनपुट- यूनीवार्ता

संजीवनी टुडे 13-09-2019 20:49:37

केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने शुक्रवार को कहा कि जनजातीय समुदाय कई पीढ़ियों से जंगलों के आस-पास के क्षेत्रों में बहुत ही पर्यावरण अनुकूल तरीके से रहता आया है और उसने कभी भी वन की भूमि की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डाला है।


नई दिल्ली। केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने शुक्रवार को कहा कि जनजातीय समुदाय कई पीढ़ियों से जंगलों के आस-पास के क्षेत्रों में बहुत ही पर्यावरण अनुकूल तरीके से रहता आया है और उसने कभी भी वन की भूमि की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डाला है। इसलिए उनकी विशेषज्ञता और अनुभव पर विचार किया जाना चाहिए।

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श्री मुंडा ने ग्रेटर नोएडा एक्सपो में ‘कॉप-14 यूएनसीसीडीः ट्राइफेड-जीआईजेड’ के ‘बम्बूनॉमिक्स के माध्यम से भारतीय परिदृश्य’ नामक सत्र में भूमि की गुणवत्ता में क्षरण और जलवायु परिवर्तन की समस्या से निपटने के लिए आंदोलन की शुरूआत की। उन्होंने कहा कि देश में ‘बम्बूनॉमिक्स’ के माध्यम से जनजातीय उद्यम को बढ़ावा देने के लिए सबसे बड़े जनजातीय आंदोलन की शुरूआत की है, जो शेष विश्व के लिए पथ प्रदर्शक होगा।

उन्होंने भूमि की गुणवत्ता में क्षरण से निपटने और पर्यावरण के उन्नयन के लिए आदिवासी समुदाय के महत्व के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बॉन चैलेंज के तहत अतिरिक्त 5 एमएचए का लक्ष्य निर्धारित किया है और जनजातीय कार्य मंत्रालय तथा ट्राइफेड इस राष्ट्रीय संकल्प को मजबूत करेंगे। श्री मुंडा ने अनेक देशों के प्रतिनिधियों से मुलाकात भी की।

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