संजीवनी टुडे

देश में खेती की लागत कम करते हुए उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने की जरूरत: तोमर

संजीवनी टुडे 16-07-2020 17:20:00

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि दुनिया में प्रतिस्पर्धा करने के लिए देश में खेती की लागत कम करते हुए उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने की जरूरत है।


नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि दुनिया में प्रतिस्पर्धा करने के लिए देश में खेती की लागत कम करते हुए उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों का अनुसंधान व किसानों का परिश्रम इसी का परिणाम है कि आज भारत खाद्यान्न के क्षेत्र में आत्मनिर्भर ही नहीं, अधिशेष राष्ट्र है।

गुरुवार को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) का 92वां स्‍थापना दिवस एवं पुरस्कार वितरण समारोह को विडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सम्बोधित करते हुए तोमर ने कहा कि आईसीएआर के वैज्ञानिकों के प्रयासों से संस्‍थान 90 साल से अधिक समय से देश को कृषि के क्षेत्र में आगे ले जाने में उल्‍लेखनीय योगदान दे रहा है। वो समय भी हम सबके ध्यान में है, जब कृषि का क्षेत्र बढ़ते हुए समय के साथ एक तरह से अविकसित था। उस समय आईसीएआर ने इस चुनौती को स्वीकार किया, हमारे वैज्ञानिकों ने नए-नए अनुसंधान किए, उन अनुसंधानों को किसानों के पास गांवों में पहुंचाने का सफलतम प्रयत्न किया, किसानों ने भी यह जानते हुए भी घनघोर परिश्रम किया कि यह घाटे का काम है। नई सारी पद्धतियों का क्रियान्वयन खेत में हो, इस मामले में किसानों का योगदान अविस्मरणीय है। वैज्ञानिकों का अनुसंधान व किसानों का परिश्रम, इसी का परिणाम है कि आज भारत खाद्यान्न के क्षेत्र में आत्मनिर्भर ही नहीं, अधिशेष राष्ट्र है।

केंद्रीय मंत्री तोमर ने कहा कि कोरोना वायरस के संकट से सारी दुनिया गुजर रही है, लॉकडाउन की स्थिति में भी असुविधाओं का सामना देश-दुनिया को करना पड़ा है, सारे साधन व टैक्नालाजी से लैस तमाम संस्थान है, जिनकी गतिविधियां बंद हो गई थी, लेकिन भारत में कृषि का क्षेत्र ऐसी अवस्था में भी संचालित रहा है। यह भारत के लिए उपलब्धि है और किसान भी बधाई के पात्र है, जिन्होंने विकल्प खोजें व पैदावार को क्षति नहीं होने दी, वहीं भारत सरकार ने भी ध्यान दिया, जिसके कारण उनके लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध रहें और बंपर पैदावार हुई, समर्थन मूल्य पर खरीद का भी रेकार्ड बना। इसी का परिणाम है कि कोरोना वायरस के इस संकट के दौर में 8 महीने तक देश के लगभग 81 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन उपलब्ध कराने का ऐतिहासिक काम सरकार कर पा रही है। भारत की इस हैसियत का श्रेय निश्चित रूप से किसानों व कृषि वैज्ञानिकों को दिया जाना चाहिए, जिनके कारण खाद्यान्न का देश में भंडार है।

तोमर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार इस पर बल देते रहते हैं कि हमारी बुनियाद मजबूत होनी चाहिए, चाहे वे विषय ग्रामीण विकास से संबंधित हो या कृषि की प्रगति से संबंधित हो। कृषि के क्षेत्र में हम आगे बढ़ सकें, इस दिशा में सरकार की सोच विभिन्न कार्यक्रमों व बजट के दौरान पिछले पांच-छह वर्ष में प्रदर्शित हुई है। ग्रामीण क्षेत्र में भी अधोसंरचनाएं बढ़े और जनजीवन में सुधार आएं तथा जो मौलिक सुविधाएं देश में संपन्न घरों में होती है, वे भी गांवों के गरीब आदमी के घर में पहुंचे, इसके लिए अभियान चलाए गए है, मिशन मोड में भी काम किया गया है, जिसके परिणाम परिलक्षित हो रहे है।

उन्होंने कहा कि लंबे समय से अनुभव किया जा रहा था कि कृषि क्षेत्र में नए रिफार्म होना चाहिए, कांट्रेक्ट फार्मिंग को बल मिलना चाहिए, उसे कानूनी जामा पहनाना चाहिए, तो पिछले दिनों कृषि उत्पादों के संबंध में जो अध्यादेश लाया गया, उसके कारण निश्चित रूप से किसानों को संपूर्ण रूप से आजादी प्राप्त हो गई। तोमर ने कहा कि नया अध्यादेश लाए जाने के बाद कांट्रेक्ट फार्मिंग के माध्यम से ट्रेडर्स का भले ही फायदा हो, लेकिन गांवों में छोटे किसानों तक इनकी पहुंच व क्षेत्रवार क्लस्टरों के माध्यम से इन्हें लाभ पहुंचाया जाना जरूरी है। इस गेप को आईसीएआर केवीके के माध्यम से भर सकती है। 

उन्होंने कहा कि कृषि के क्षेत्र में आईसीएआर की प्रगति की जितनी प्रशंसा की जाएं, कम है लेकिन अभी और भी काम करना शेष है। दुनिया से प्रतिस्पर्धा करना चाहते हैं तो खेती की लागत कम करते हुए उत्पादन व उत्पादकता बढ़ाना होगी। इस अवसर पर नए 8 उत्पादों का लोकार्पण और 10 प्रकाशनों का विमोचन किया गया। आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. त्रिलोचन महापात्र ने परिषद की उपलब्धियां और आगामी योजनाएं बताईं।

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