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नासा ने 'लैंडर विक्रम' की खोज में निकाला Lunarcraft, जल्‍द सामने आ सकती है नई जानकारी!

संजीवनी टुडे 17-09-2019 22:44:00

गौरतलब है कि 18 जून 2009 को एलियांस एलटस-5 रॉकेट को लॉन्‍च किया गया था। इसके माध्‍यम से Lunar Reconnaissance Orbiter समेत लूना क्रेटर ऑब्‍जरवेशन और एक सेंसिंग सेटेलाइट को भी प्रक्षेपित किया गया था।


नई दिल्‍ली। भारत के चंद्रयान- 2 को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। नासा के मुताबिक, लैंडर विक्रम के लिए आज का दिन बेहद खास है, क्‍यों‍कि आज नासा उसकी इमेज खींचने की पहली कोशिश करने वाला है।

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नासा इसके लिए Lunar Reconnaissance Orbiter का इस्‍तेमाल करेगा। नासा का यह ऑर्बिटर वर्ष 2009 से ही चांद के चक्‍कर लगा रहा है। आज यही LRO उस जगह से गुजरेगा जहां पर लैंडर विक्रम चांद की सतह पर पड़ा है। आज जिस मिशन को नासा अंजाम देने वाला है उसको लिए LRO की ऊंचाई को 100 किमी से 90 किमी किया जाएगा। इसकी जानकारी खुद नासा के दो एस्‍ट्रॉनॉट्स ने दी है। 

नासा का ल्‍यूनारक्राफ्ट यदि आज के अपने इस मिशन में कामयाब हो गया तो यह भी काफी बड़ी उपलब्धि होगी। आपको बता दें कि चंद्रयान 2 के तहत छोड़ा गया ऑर्बिटर अब भी चांद के चक्‍कर लगा रहा है। इसने ही 9 सितंबर को सबसे पहले लैंडर विक्रम की थर्मल इमेज खींची थी। इसके जरिए ही उस जगह का पता चल सका था जहां आज लैंडर मौजूद है। 

गौरतलब है कि 18 जून 2009 को एलियांस एलटस-5 रॉकेट को लॉन्‍च किया गया था। इसके माध्‍यम से Lunar Reconnaissance Orbiter समेत लूना क्रेटर ऑब्‍जरवेशन और एक सेंसिंग सेटेलाइट को भी प्रक्षेपित किया गया था। 23 जून 2009 को LRO ने चांद के ऑर्बिटर में प्रवेश किया था और इसके साथ ही स्‍पेसक्राफ्ट ने भी अपना काम करना शुरू किया था। 15 सितंबर 2009 इसके एक्‍सप्‍लोरेशन मिशन की शुरुआत हुई थी। इस मिशन का मकसद मानव को अंतरिक्ष में बसाने से जुड़ा है। ठीक एक साल बाद इस एक्‍सप्‍लोरेशन मिशन खत्‍म हो गया था। LRO एक रोबोटिक स्‍पेसक्राफ्ट है जो भविष्‍य में चांद पर भेजे जाने वाले रोबो और मानव मिशन के लिए बेहद खास है। आपको बता दें कि इसी ने अपोलो 11, 12,14,और 17 की लैंडिंग साइट की बेहद साफ तस्‍वीर खींची थी। इसी ने इजरायल के Beresheet की लैंडिंग साइट की तस्‍वीरें खींची थीं। इसकी तस्‍वीर को खींचने के लिए ल्‍यूनारक्राफ्ट 90 किमी की ऊंचाई से इस साइट पर से गुजरा था। 

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बता दें  कि इसरो लैंडर विक्रम से संपर्क साधने की पूरी कोशिश कर रहा है, लेकिन इसमें अभी तक उसको सफलता हासिल नहीं हो सकी है। जैसे-जैसे दिन गुजरते जा रहे हैं वैसे-वैसे इसकी संभावना भी कम होती जा रही है। गौरतलब है कि लैंडर विक्रम 7 सितंबर को चांद के दो क्रेटर्स मजिनस सी और सिमपेलियस एन के बीच वाले मैदान में लगभग 70 डिग्री दक्षिणी अक्षांश पर उतरना था। इन दोनों के बीच की दूरी करीब लगभग 45 किमी है। लेकिन सतह छूने से दो किमी पहले ही यह अपने मार्ग से भटक गया और इसका संपर्क इसरो के मिशन कंट्रोल से टूट गया। फिलहाल लैंडर विक्रम चांद की सतह पर पूरी तरह से निर्जीव पड़ा है। 

वैज्ञानिक मान रहे हैं कि नासा का आज का मिशन बेहद खास है और वह विक्रम को दोबारा कामयाब करने में मदद कर सकता है। नासा के जिन दो एस्‍ट्रॉनॉ्टस का जिक्र ऊपर किया गया है वह इस पूरे मिशन पर निगाह रखे हुए हैं। 

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