संजीवनी टुडे

नरोदा पाटिया केस: प्रकाश राठौड़ की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित

संजीवनी टुडे 12-03-2019 16:27:03


नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने 2002 में गुजरात के नरोदा पाटिया केस में दोषी करार दिए गए प्रकाश राठौड़ की ज़मानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। जस्टिस एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मामले पर कल यानि 13 मार्च को फैसला सुनाने का आदेश दिया।

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दंगा पीड़ितों की ओर से अपर्णा भट ने राठौड़ की जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि दंगे में राठौर की भूमिका रही है। दंगे के गवाहों के बयानों के आधार पर निचली अदालतों ने राठौड़ की जमानत खारिज कर दी थी। अपर्णा भट ने कहा कि गुजरात सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक जेल के अंदर भी राठौड़ का व्यवहार बुरा रहा। इसलिए प्रकाश राठौड़ को जमानत नहीं दी जानी चाहिए। अपर्णा भट को सुप्रीम कोर्ट ने दंगा पीड़ितों की तरफ से पेश होने को कहा था। सुनवाई के दौरान राठौड़ की तरफ से कहा गया कि वह निर्दोष है और वो लंबे समय तक जेल के अंदर बंद है।

इसके पहले 7 मार्च को इस मामले में उम्रकैद की सज़ा पाने वाले बाबू बजरंगी को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने स्वास्थ्य आधार पर ज़मानत दी थी। मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक कई बीमारियों से जूझ रहे बजरंगी की आंखें खराब हो चुकी हैं। बाईपास सर्जरी भी हुई है।

पिछले 31 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को नोटिस जारी किया था। उसके पहले 23 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने नरोदा पाटिया दंगे के चार दोषियों को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दी थी। कोर्ट ने जिन चार दोषियों को जमानत दी थी वे हैं-उमेशभाई भरवाड़, राजकुमार, पदमेंद्र राजपूत और हर्षद परमार। चारों को गुजरात हाईकोर्ट ने से 10 साल की सज़ा सुनाई थी। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ चारों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

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नरोदा पाटिया इलाके में 28 फरवरी,2002 को उग्र भीड़ ने अल्पसंख्यक समुदाय के करीब 97 लोगों की हत्या कर दी थी। इस मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने बजरंग दल के नेता बाबू बजरंगी को दोषी करार दिया था लेकिन सबूतों के अभाव में पूर्व मंत्री माया कोडनानी को बरी कर दिया था। इन सभी दोषियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 436 के तहत दोषी ठहराया गया था।

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