संजीवनी टुडे

चित्रकूट में नानाजी देशमुख से प्रभावित दिखे नरेंद्र मोदी, पढ़िये पूरी खबर

संजीवनी टुडे 29-02-2020 19:07:56

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की तपोभूमि चित्रकूट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्सप्रेस-वे की आधारशिला रखने के बाद भगवान श्री राम और रामायण के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास को याद किया, लेकिन उनका पूरा भाषण स्वालंबन का मंत्र देने वाले समाज शिल्पी नानाजी देशमुख पर केंद्रित रहा।


बांदा। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की तपोभूमि चित्रकूट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्सप्रेस-वे की आधारशिला रखने के बाद भगवान श्री राम और रामायण के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास को याद किया, लेकिन उनका पूरा भाषण स्वालंबन का मंत्र देने वाले समाज शिल्पी नानाजी देशमुख पर केंद्रित रहा। उन्होंने बुंदेलखंड में विकास की नींव रखने के लिए भी नानाजी देशमुख को आधार बताया। 

उन्होंने कहा कि चित्रकूट की धरती में मर्यादा के तमाम संस्कार गढ़े गए हैं, इसी धरती से भारत को कई नए आदर्श मिले हैं। भगवान श्री राम वनवास के दौरान आदिवासी बनवासी व तपस्वियों से प्रभावित हुए थे, उनकी कथाएं अनंत है। इसी तरह इस धरती से पुरातन परंपरा बदलकर नई इबारत लिखने के लिए भारत रत्न नानाजी से प्रेरणा लेनी चाहिए, जिन्होंने इसी धरती पर रहकर देश को स्वालंबन के रास्ते पर ले जाने का प्रयास किया और पूरा जीवन ग्रामोदय से राष्ट्र उदय के संकल्प के साथ जिया। उन्होंने कहा कि गांधी जी की स्वराज की कल्पना साकार करने वाले नानाजी देशमुख को ही बुंदेलखंड को विकास की ऊंचाइयों पर ले जाने वाला एक्सप्रेस-वे पर समर्पित है।

बताते चलें कि भारत रत्न नानाजी देशमुख महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के खंडोली गांव में जन्मे थे। वे जीवन भर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे। वे उत्तर प्रदेश के बलरामपुर से सांसद चुने गए थे। जनता पार्टी की सरकार में मोराजी देसाई मंत्रिमंडल में 60 वर्ष की अधिक उम्र होने की बात कह कर उन्होंने मंत्री पद ठुकरा दिया था। इसके बाद राजनीति से संन्यास लेने के उपरांत नाना जी ने चित्रकूट में दीनदयाल शोध संस्थान के माध्यम से ग्रामीण विकास का ऐसा मॉडल प्रस्तुत किया जिससे ग्रामीण भारत स्वालंबन की ओर अग्रसर हुआ।

नानाजी ने अपने अदम्य साहस से सैकड़ों गांव की तस्वीर बदल दी। उन्होंने गरीबी दूर करने के लिए कृषि ग्रामीण स्वास्थ्य ग्रामीण शिक्षा के साथ कुटीर उद्योग की दिशा में भी अनेक कार्य किए। इतना ही नहीं उन्होंने ग्रामोदय विश्वविद्यालय की स्थापना करके ग्रामीण समस्याओं पर शोध के साथ स्वालंबन के विभिन्न कार्यों को शुरू किया था। कुल मिलाकर प्रधानमंत्री ने चित्रकूट में अपने भाषण के दौरान जिस तरह से नानाजी देशमुख के स्वालंबन पर फोकस किया, उससे स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री नाना जी की राह पर निकल पड़े हैं।

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