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Muharram 2019: जानिए क्यों और कैसे मनाया जाता है मुहर्रम ?

संजीवनी टुडे 10-09-2019 09:06:18

इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार मुहर्रम हिजरी संवत का प्रथम मास है। मुहर्रम इस्लाम धर्म में विश्वास करने वाले लोगों का एक प्रमुख त्योहार है। इस्लामिक नए साल के पहले महीने में मुस्लिम समुदाय मुहर्रम मनाता है।


डेस्क। आज (10 सितंबर)  मुहर्रम मनाया जाएगा। मुहर्रम इस्‍लामी महीना है। इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार मुहर्रम हिजरी संवत का प्रथम मास है। मुहर्रम इस्लाम धर्म में विश्वास करने वाले लोगों का एक प्रमुख त्योहार है।  इस्लामिक नए साल के पहले महीने में मुस्लिम समुदाय मुहर्रम मनाता है। हालांकि, ये त्योहार नहीं होता इसलिए इस दिन खुशी की जगह ग़म मनाया जाता है इसलिए इसे ग़म का महीना भी कहा जाता है।मान्‍यता है कि इस महीने की 10 तारीख को इमाम हुसैन की शहादत हुई थी, जिसके चलते इस दिन को रोज-ए-आशुरा कहते हैं। मोहर्रम को इमाम हुसैन और उनके अनुयायियों की शहादत की याद में मातम की तरह मनाया जाता है। पूरी दुनिया के मुस्लिम समुदाय के लोग मुहर्रम के 9वें और 10वें दिन रोज़ा रखते हैं और ताज़िए भी निकाले जाते हैं।   

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मोहर्रम क्या है : 'मोहर्रम' इस्लामिक कैलेंडर के पहले महीने का नाम है। इसी महीने से इस्लाम का नया साल शुरू होता है। इस महिने की 10 तारीख को रोज-ए-आशुरा  कहा जाता है, इसी दिन को अंग्रेजी कैलेंडर में मोहर्रम कहा गया है।

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कब है मुहर्रम: मुहर्रम यह इस्लामिक नए साल का पहला पर्व भी होता है। मोहर्रम की 10वीं तारीख को ताज़िया जुलूस निकाला जाता है। ताज़िया लकड़ी और कपड़ों से गुंबदनुमा बनाया जाता है। इस साल मुहर्रम 10 सितंबर को मनाया जाएगा। ताज़िए में हज़रत इमाम हुसैन की मकबरे की नकल भी बनाई जाती है। इसे एक झांकी की तरह सजाते हैं और एक शहीद की अर्थी की तरह इसका सम्मान करते हुए कर्बला तक ले जाते हैं। 


इसलिए मनाया जाता है मोहर्रम: इस्‍लामी मान्‍यताओं के अनुसार इराक में यजीद नाम का जालिम बादशाह इंसानियत का दुश्मन था. यजीद खुद को खलीफा मानता था। लेकिन अल्‍लाह पर उसका कोई विश्‍वास नहीं था. वह चाहता था कि हजरत इमाम हुसैन उसके खेमे में शामिल हो जाएं। लेकिन हुसैन को यह मंजूर नहीं था। मोहर्रम के महीने में इस्लाम धर्म के संस्थापक हजरत मुहम्मद साहब के छोटे नवासे इमाम हुसैन और उनके 72 अनुयाइयों का कत्ल कर दिया गया था। हजरत हुसैन इराक के शहर करबला में यजीद की फौज से लड़ते हुए शहीद हुए थे।

कैसे मनाया जाता है मोहर्रम

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मोहर्रम खुशियों का त्योहार नहीं बल्कि मातम और शोक मनाने का महीना है। इसलिए शिया समुदाय 10 मोहर्रम के दिन काले कपड़े पहनकर हुसैन, उनके परिवार और दोस्तों की शहादत को याद करते हैं। उनकी शहादत को याद करते हुए सड़कों पर जुलूस भी निकाला जाता है और लोग मातम मनाते हैं। मान्‍यताओं के अनुसार बादशाह यजीद ने अपनी सत्ता कायम करने के लिए हुसैन और उनके परिवार वालों पर जुल्‍म किया और 10 मुहर्रम को उन्‍हें बेदर्दी से मौत के घाट उतार दिया। हुसैन का मकसद खुद को मिटाकर भी इस्‍लाम और इंसानियत को जिंदा रखना था।  यह धर्म युद्ध इतिहास के पन्‍नों पर हमेशा-हमेशा के लिए दर्ज हो गया. मुहर्रम कोई त्‍योहार नहीं बल्‍कि यह वह दिन है जो अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक है। 

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