संजीवनी टुडे

मोदी के गुजरातियों को भाया पांगणा का सौंदर्य

संजीवनी टुडे 26-06-2019 18:16:12

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृहराज्य गुजरात के वासियों को पांगणा का प्राकृतिक सौंदर्य खूब भाया।


मंडी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृहराज्य गुजरात के वासियों को पांगणा का प्राकृतिक सौंदर्य खूब भाया। शिकारी देवी के आंचल में स्थित सुकेत रियासत की ऐतिहासिक नगरी पांगणा के सुरम्य स्थल में गांव के मध्य बने कृत्रिम ऊंचे टीले/किले पर गुजरात व अमृतसर के पर्यावरण प्रेमी पर्यटकों के दल ने दस्तक दी। इस दल ने सबसे पहले सुकेत अधिष्ठात्री राज-राजेश्वरी महामाया के छह मंजिले स्मारक को निहार कर मां भूवनेश्वरी के चरणों में अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए। 835 फुट की परिधि में फैले तीन चरणों में बनें किले को बारिकी से निहारा तथा स्थानीय युवा डिंपल चौहान से ऐतिहासिक जानकारी प्राप्त की। इस दल ने भीम और हिडिंबा की शादी के गवाह बनें अंबरनाथ शिवद्वाले की कलात्मक प्रस्तर प्रतिमाओं को निहार कर मंदिर के बाहर गर्भगृह की ओर मुंह किए स्थानक नंदी के दर्शन कर शिवतत्व की ज्ञान गंगा को पुनर्जीवित किया। 

पर्यटक दल ने महामाया मंदिर के दाएं भाग में राजा श्याम सेन द्वारा मुगल शासकों की कारागार से माहुंनाग की कृपा से मुक्त होने के बाद बनाए दो मंजिलें मंदिर में प्रार्थना की और हत्यादेवी की जनश्रुतियां साझा की। इस दल के गुजरात निवासी निखिल राव, रोहित राव, राहुल राव, अंकिता राव, हीना राव तथा अमृतसर निवासी शैलेश बरोत, साक्षी बरोत, गायत्री भारद्वाज, शमिका भारद्वाज आदि का कहना है कि महामाया पांगणा के परिसर में प्रवेश करते ही धार्मिक ऊर्जा की विलक्षणता की अनुभूति होने लगती है। 

व्यापार मंडल पांगणा के अध्यक्ष सुमीत गुप्ता और संस्कृति मर्मज्ञ डॉक्टर जगदीश शर्मा और डिंपल चौहान का कहना है कि ऐतिहासिक नगरी पांगणा की अपनी पुरानी,समृद्ध परंपराएं हैं,उन्नत संस्कृति है। पांगणा का अपना एक इतिहास है जिसने सदैव बुद्धिजीवियों,आर्किटेक्चर, शोधार्थियों, यायावरों, पुरातत्वविदों को अपनी ओर आकर्षित किया है। लेकिन आजादी के बाद सरकार ने 70- 71वर्षों बाद भी इस किले और ऐतिहासिक स्मारक के संरक्षण की कोई सुध नहीं ली। प्रकृति और स्थापत्य की दृष्टि से बेजोड़ इस ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण का मुद्दा जल्द ही सरकार के समक्ष उठाया जाएगा ताकि पुरातत्व व पर्यटन की दृष्टि से लगभग 1254 वर्ष पुरानी इस अमूल्य धरोहर का विकास हो सके।

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