संजीवनी टुडे

अमरनाथ यात्रा स्थगित तथा पर्यटकों को वापस जाने के माहौल पर संसद में बयान दें मोदी : कांग्रेस

संजीवनी टुडे 03-08-2019 21:15:08

अमरनाथ यात्रा स्थगित करने तथा पर्यटकों को वापस जाने की हिदायत देने के सरकार के कदमों से वहां दहशत का माहौल बन गया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संसद में बयान देना चाहिए


नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर में अमरनाथ यात्रा स्थगित करने तथा पर्यटकों को वापस जाने की हिदायत देने के सरकार के कदमों से वहां दहशत का माहौल बन गया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संसद में बयान देना चाहिए कि इस तरह के कदम क्यों उठाये गये हैं। पार्टी ने सरकार को आगाह किया कि वह संविधान के अनुच्छेद 370 तथा 35-ए के माध्यम से जम्मू-कश्मीर के लोगों को मिले संवैधानिक अधिकारों को खत्म करने का प्रयास नहीं करे। इस तरह का कोई भी कदम घातक साबित होगा और इससे वहां संकट गहरा जाएगा।

राज्य सभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद, जम्मू-कश्मीर के पूर्व सदरे रियासत डॉ कर्ण सिंह, पूर्व गृहमंत्री पी चिदम्बरम, पार्टी की प्रदेश प्रभारी अम्बिका सोनी तथा राज्यसभा में पार्टी के उपनेता आनंद शर्मा ने शनिवार को यहां कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सरकार ने शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर में पर्यटकों और अमरनाथ यात्रियों को वापस लौटने के लिए जो परामर्श दिया है वह अभूतपूर्व है। भारतीय जनता पार्टी वहां अनुच्छेद 35 ए को खत्म करने का माहौल बना रही है ताकि उसे पूरे देश में राजनीतिक लाभ मिल सके।

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि 1989 से 2014 तक जम्मू-कश्मीर में सामान्य स्थिति को बहाल करने के लिए जो कदम उठाए गए थे भाजपा सरकार ने अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिए उन्हें बर्बाद कर दिया है। भाजपा सरकार का यह कदम राजनीति से प्रेरित है और उसके इस कदम से स्पष्ट हो गया है कि सरकार वहां 1989 की स्थिति पैदा करना चाहती है। 

उन्होंने कहा कि एक साथ 35 हजार से ज्यादा अर्द्धसैनिक बलों को वहां भेजने का इरादा क्या है देश इस बारे में जानना चाहता है। उन्होंने कहा कि संसद का सत्र चल रहा है इसलिए प्रधानमंत्री को इस बारे में संसद में आकर बयान देना चाहिए। 

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श्रीमती सोनी ने कहा कि पार्टी की जम्मू-कश्मीर नीति नियोजन समूह की शुक्रवार को यहां बैठक हुई जिसमें अनुच्छेद 35-ए तथा धारा 370 को समाप्त करने की सरकार की मंशा पर चिंता व्यक्त की गयी। उन्होंने आगाह किया कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को दिए गए संवैधानिक अधिकारों के साथ छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए। नीति नियोजन समूह ने सरकारी परामर्श और अर्द्धसैनिक बलों को बड़ी संख्या में वहां भेजे जाने पर चिंता जाहिर की और कहा कि सरकार को ऐसे कदम उठाने से बचना चाहिए जिनसे लोगों में असुरक्षा का भाव पैदा हो और वहां स्थिति खराब हो। 

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