संजीवनी टुडे

मेघालयः खदान से पानी निकालने में जर्मनी की कंपनी केएसबी भी जुटी

संजीवनी टुडे 14-01-2019 17:23:23


शिलांग। मेघालय के ईस्ट जयंतिया हिल्स जिले में स्थित अवैध कोयला खदान में फंसे 15 मजदूरों के बारे में सोमवार को 33वें दिन भी कोई सटीक जानकारी नहीं मिल पायी है। खदान से पानी निकालने के लिए नौसेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, ओडिशा अग्निशमन विभाग, कोल इंडिया और किर्लोस्कर कंपनी के विशेष दस्ते लगातार अभियान चला रहे हैं।लेकिन अवैध खदान में पंप से लगभग 22,68,000 लीटर पानी निकालने के बावजूद जल स्तर में कोई कमी नहीं आई है।

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राहत व बचाव अभियान से जुड़े मेघालय सरकार के अधिकृत अधिकारी ने सोमवार को बताया है कि पुराने खदान में कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने अपना एक और पंप स्थापित किया है। इस पंप को परीक्षण के दौरान सफलता मिली है। वर्तमान में उस खदान के सामने पाइप बिछाने और पाइप की फिटिंग का काम चल रहा है। आगामी मंगलवार से पंप काम करना शुरू कर देगा।

उल्लेखनीय है कि जिस इलाके में यह हादसा हुआ है, वहां पर छोटी-बड़ी 100 से अधिक अवैध कोयले की गहरी खदानें हैं। इनमें भारी मात्रा में पानी भरा हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार सभी खदानों का पानी संभवतः एक-दूसरे से मिला हुआ है, जिसके चलते पानी निकालने के बावजूद उसके स्तर में कमी नहीं आ ही है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि जिस खदान में हादसा हुआ है, उससे 500 मीटर की दूरी पर लाइटेन नहीं बहती है। संभवतः नदी का पानी भी खदान में किसी स्रोत के जरिए पहुंच रहा है, जिस कारण पानी के स्तर में कमी नहीं आ रही है।

इस बीच मेघालय सरकार ने राहत व बचाव कार्य को रोकने का मन बनाया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने किसी भी सूरत में श्रमिकों को बाहर निकालने का आदेश जारी कर दिया। इसके बाद बचाव अभियान बदस्तूर जारी है। सीआईएल की सर्वेक्षण टीम ने जल स्तर का माप भी लिया है। उसने बताया है कि जल स्तर में कमी नहीं आ रही है। सीआईएल रविवार की शाम 06 से सोमवार की सुबह 01 बजे तक अपना पंप चलाया। लगभग 20 घंटे तक चलाए गए पंप से लगभग 22,68,000 लीटर पानी निकाला गया है। बावजूद जल स्तर में कोई कमी नहीं आई है।

ओडिशा अग्निशमन विभाग ने सोमवार को दोपहर 11 बजे से अपने पंपों को चालू किया है। इस हादसे की जानकारी मिलते ही जर्मनी की वैश्विक कंपनी केएसबी के विशेषज्ञ भी मौके पर पहुंचकर अवैध कोयले की खदान से पानी निकालने के लिए अपने पंप को स्थापित करने में जुट गए हैं। पंप लगाने और पाइप बिछाने का काम केएसबी की ओर से किया जा रहा है। केएसबी को उम्मीद है कि उनका पंप मंगलवार से काम करना आरंभ कर देगा।

इस बीच हैदराबाद स्थित सीएसआईआर-एनजीआरआई के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ देवाशीष कुमार सोमवार को इलेक्ट्रिक टोमोग्राफी सर्वे के जरिए यह पता लगाने में जुटे हुए हैं कि पहाड़ की संरचना किस प्रकार की है। प्लेनीज़-चेन्नई के तकनीक विशेषज्ञ विनीत कुमार और उनकी टीम वर्तमान में जिस कोयले की खदान में श्रमिक फंसे हुए हैं उसमें रिमोट आपरेटेड वेहिकल (आरओवी) के जरिए सर्वेक्षण करने में जुटे हुए हैं। वर्तमान में भारतीय नौसेना के गोताखोर आरओवी की तलाश में जुटे हुए हैं जो बीती रात से ही खराब हो कर फंस गई है।

उल्लेखनीय है कि मेघालय के ईस्ट जयंतिया हिल्स जिला के साइपुंग थानांतर्गत कसान गांव में स्थित एक कोयले की अवैध खान में अचानक पानी भर जाने से खदान में अंदर कोयला खोद रहे 15 श्रमिक गत 13 दिसम्बर, 2018 से फंसे हुए हैं। खदान की कुल गहराई 370 फीट से अधिक बताई गई है। जिसमें 80 से अधिक पानी भरा हुआ है।

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ज्ञात हो कि जिस स्थान पर श्रमिक फंसे हैं, वहां पर लगभग 100 से अधिक खदान हैं। जबकि खदान के पास लगभग 500 मीटर की दूरी हो कर बहने वाली लाइटेन नदी का पानी भी खदान में आने की संभावना जताई गई है। जिसकी वजह से हादसे वाले खदान के पानी का स्तर कम नहीं हो रहा है।

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