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मन की बात: बापू के विचार और आदर्श आज पहले से कहीं ज्यादा प्रासंगिक- पीएम मोदी

संजीवनी टुडे 27-09-2020 15:28:12

मन की बात में रविवार को प्रधानमंत्री मोदी ने शहीद भगत सिंह को याद करते हुए कहा कि उनके जीवन का एक खूबसूरत पहलू यह है कि वे टीमवर्क के महत्व को बखूबी समझते थे।


नई दिल्ली। मन की बात में रविवार को प्रधानमंत्री मोदी ने शहीद भगत सिंह को याद करते हुए कहा कि उनके जीवन का एक खूबसूरत पहलू यह है कि वे टीमवर्क के महत्व को बखूबी समझते थे। लाला लाजपतराय के प्रति उनका समर्पण हो या फिर चंद्रशेखर आजाद, सुखदेव, राजगुरू क्रांतिकारियों के साथ उनका जुड़ाव उनके लिए कभी व्यक्तिगत गौरव महत्वपूर्ण नहीं रहा। 28 सितम्बर को शहीद भगत सिंह की जयंती के मौके पर उन्होंने उनकी वीरता को नमन किया। उन्होंने कहा कि वे जब तक जिए, सिर्फ एक मिशन के लिए जिए, वो था भारत को अन्याय और अंग्रेजी शासन से मुक्ति दिलाना। उन्होंने कहा कि भगत सिंह के जैसा देश प्रेम, देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा, जरुर हम सबके दिलों में होना चाहिए। शहीद भगत सिंह को यही हमारी सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी। 

पीएम मोदी ने कहा कि आने वाले दिनों में हम कई महान लोगों को याद करेंगे जिनका भारत के निर्माण में अमिट योगदान है। 2 अक्टूबर को मां भारती के दो सपूतों, महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री को याद करने का दिन है। बापू के विचार और आदर्श आज पहले से कहीं ज्यादा प्रासंगिक हैं, महात्मा गांधी का जो आर्थिक जो आर्थिक चिंतन था, अगर उस स्पीरिट को पकड़ा गया होता, उस रास्ते पर चला गया होता, तो आज आत्मनिर्भर भारत अभियान की जरूरत ही नहीं पड़ती। गांधी जी के आर्थिक चिंतन में भारत की नस नस की समझ थी। बापू का जीवन में हमें गरीब से गरीब व्यक्ति का भला करने और शास्त्री जी की जीवन विनम्रता और सादगी का संदेश देता है। 11 अक्टूबर के दिन लोक नायक जयप्रकाश नारायण और नाना जी देशमुख की जयंती है। 

पीएम मोदी ने कहा कि जेपी ने हमारे लोकतांत्रित मूल्यों की रक्षा में अग्रणी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि नाना जी देशमुख ने जेपी के ऊपर हुए वार को अपने ऊपर ले लिया और उनका जीवन बचाने में कामयाब रहे। 12 अक्टूबर को राजमाता विजयाराजे सिंधिया की जयंती पर पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन लोगों की सेवा में समर्पित कर दिया। वे राज परिवार से थीं, उनके पास संपत्ति, शक्ति और दूसरे संसाधनों की कोई कमी नहीं थी। फिर भी उन्होंने अपना जीवन, एक मां की तरह, वात्सल्य भाव से जन सेवा में अपना जीवन खपा दिया। पीएम मोदी ने साल 1990 में राजमाता के साथ अपने अनुभव साझा किया। आखिरी में कोरोना काल में सावधानी बरतने के संदेश के साथ लोगों से मास्क लगाने और दो गज की दूरी बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि जब तक दवाई नहीं, तब तक ढिलाई नहीं।

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