संजीवनी टुडे

ममता सरकार ने नहीं मानीं डॉक्टरों की प्रमुख मांगें, और गहरा सकता है संकट

संजीवनी टुडे 15-06-2019 20:39:08

राज्य में पांच दिनों से जारी डॉक्टरों की हड़ताल के मद्देनजर सरकार ने उनकी मांगों को लेकर शनिवार शाम को अधिसूचना जारी की है, लेकिन प्रमुख मांगें नहीं मानी हैं।


कोलकाता। राज्य में पांच दिनों से जारी डॉक्टरों की हड़ताल के मद्देनजर सरकार ने उनकी मांगों को लेकर शनिवार शाम को अधिसूचना जारी की है, लेकिन प्रमुख मांगें नहीं मानी हैं। इससे माना जा रहा है कि समस्या और अधिक जटिल हो सकती है। दस सूत्रीय अधिसूचना में राज्य सरकार ने अस्पतालों में सुरक्षा बढ़ाने का जिक्र तो किया है, लेकिन सशस्त्र पुलिसकर्मियों की तैनाती संबंधी आंदोलनरत चिकित्सकों की मुख्य मांग को दरकिनार कर दिया है। अधिसूचना में राज्यभर में काम करने वाले डॉक्टरों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने की बात कही गयी है। अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव सिन्हा ने इस अधिसूचना में कहा है कि डॉक्टरों और मरीजों के बीच होने वाले विवादाें में पुलिस मध्यस्थता करेगी और डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए हमेशा सतर्क रहेगी। इसके अलावा सभी अस्पताल परिसर में महत्वपूर्ण स्थानों पर क्लोज सर्किट कैमरे लगेंगे। इसमें सरकार ने यह भी आश्वस्त किया है कि चिकित्सकों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए अस्पतालों में हॉटलाइन और अलार्म सिस्टम भी लगाया जाएगा ताकि किसी आपातकालीन परिस्थिति में तुरंत सतर्कता बरती जा सके। 

इसके लिए नियमित तौर पर मॉकड्रिल करने की बात भी सरकार ने की है। सरकार ने कहा है कि प्रत्येक सप्ताह राज्य के सभी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में अस्पताल प्रबंधन और पुलिसकर्मियों को साथ लेकर सुरक्षा समीक्षा की जाएगी और जो भी समस्याएं आएंगी उसका तत्काल निदान होगा। रोगियों के परिजनों के प्रवेश और निकासी को लेकर भी नियम बनाए जाएंगे। कम से कम संख्या में रोगी के परिजन अथवा मुलाकात करने के लिए आने वाले लोग अस्पतालों में आ सकें, इसकी व्यवस्था की जाएगी। चिकित्सकों पर हमले जैसी अगर कोई घटना होती है तो वहां सुरक्षा में तैनात रहने वाली पुलिस तत्काल कार्रवाई करेगी। प्रत्येक मेडिकल कॉलेज में सुरक्षा को लेकर सिंगल प्वाइंट संपर्क प्रणाली विकसित की जाएगी ताकि तत्काल सूचना साझा की जा सके। राज्य स्वास्थ्य व परिवार कल्याण विभाग अस्पतालों की सुरक्षा में तैनात होने वाले सुरक्षाकर्मियों की संख्या बढ़ाने पर भी आकलन करेगा। इसके अलावा अस्पतालों में सुरक्षा और अन्य कार्यों के लिए नियुक्त होने वाली अन्य एजेंसियों की भी समीक्षा की जाएगी। अधिसूचना के अंत में राज्य सरकार ने आश्वस्त किया है कि इन सभी सुरक्षा उपायों को 15 दिनों के अंदर लागू किया जाएगा।

संतुष्ट नहीं हैं आंदोलनरत चिकित्सक 
हालांकि आंदोलनरत चिकित्सकों के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार ने जो 10 सूत्रीय अधिसूचना जारी की है उसमें उनकी मांगों को शामिल नहीं किया गया है। अस्पतालों में सशस्त्र पुलिसकर्मियों की तैनाती उनकी मुख्य मांग थी लेकिन इस पर सरकार ने किसी तरह से कोई ध्यान नहीं दिया है। इससे स्पष्ट है कि सरकार चिकित्सकों की सुरक्षा को लेकर ना तो गंभीर है और ना ही समस्या का निदान चाहती है। 

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