संजीवनी टुडे

महागठबंधन तो क्या गठबंधन भी नहीं हुआ: जेटली

संजीवनी टुडे 29-03-2019 19:20:44


नई दिल्ली। केन्द्रीय वित्तमंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने कहा कि नरेन्द्र मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री नहीं बनने देने की कवायद में लगे विपक्षी दल महागठबंधन तो क्या गठबंधन भी नहीं बना पाए। अब विपक्षी दलों का जमावड़ा ‘बंधनहीन’ हो गया है।

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लोकसभा चुनाव के दो चरणों की नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव के परिदृश्य का लेखा-जोखा देते हुए जेटली ने शुक्रवार को कहा कि अधिकतर राज्यों में विपक्षी दल एक दूसरे के खिलाफ उम्मीदवार उतार रहे हैं। इन दलों के नेताओं की अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा है और वे नकारात्मक एजेंडे पर चल रहे हैं। भाजपा नेता ने कहा कि गठबंधन सरकारें तभी सफल और कारगर होती हैं जब कोई राष्ट्रीय दल बड़ी सदस्य के तौर पर केन्द्रीय भूमिका में रहता है। 

देश के संघीय ढांचे के लिए यह तकाजा है कि केंद्र सरकार में राज्यों की आशाओं, अपेक्षाओं का प्रतिनिधित्व हो। यह वही दल पूरा कर सकता है जो गठबंधन सरकार में संख्या बल के आधार पर केंद्रीय भूमिका में हो। अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में सरकार इसी कारण सफलतापूर्वक चल सकी क्योंकि भाजपा की लोकसभा में सदस्य संख्या 183 थी। इसी तरह नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में भी ऐसा ही हुआ जब भाजपा ने अपने बलबूते बहुमत हासिल करने के बावजूद गठबंधन सरकार चलाने का फैसला किया। 

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जेटली के अनुसार मोदी के विरोध की राजनीति करने वाले विपक्षी दल त्रिशंकु संसद चाहते हैं ताकि उनकी राजनीति चल सके। ऐसे हालात में बनी सरकार ज्यादा दिन तक नहीं चल सकती और न ही जनहित में प्रभावी फैसले ले सकती है। विभिन्न राज्यों का विश्लेषण करते हुए जेटली ने विपक्षी दलों के बीच गठबंधन को लेकर संशय की स्थिति का जिक्र किया। उनके अनुसार, दिल्ली में आम आदमी पार्टी(आप) और कांग्रेस के बीच प्रस्तावित चुनावी गठबंधन किसी द्वंद्व का शिकार है। समझौते के तहत यदि आम आदमी पार्टी कांग्रेस के लिए तीन सीटें छोड़ती है तो आठ महीने बाद होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव में उसे 70 में से तीस सीटों पर कांग्रेस की दावेदारी स्वीकार करनी पड़ेगी। 'आप' के लिए यह राजनीतिक बलिदान करना मुश्किल साबित होगा।

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