संजीवनी टुडे

प्यार करना मानवीय प्रवृत्ति, अनुशासन तोड़ने का नाम नहीं दिया जा सकता: केरल HC

संजीवनी टुडे 22-07-2018 16:02:34


नई दिल्ली। राज्य की एक कॉलेज में दो छात्रों को प्यार करने पर कॉलेज से बहार करने के मामले पर केरल हाईकोर्ट ने सवाल उठाते हुए कहा कि कॉलेज ऐसा नहीं कर सकता। अदालत ने कॉलेज को निर्देश दिया है कि वह लड़की की पढ़ाई आगे जारी रखने दे और लड़के के सर्टिफिकेट लौटाए ।

इस मामले में जस्टिस ए मुहम्मद मुस्ताक ने फैसला सुनाते हुए कहा, 'प्यार अंधा होता है और यह सहज मानवीय प्रवृत्ति है। अकादमिक अनुशासन के संदर्भ में इस याचिका में यह सवाल किया गया है कि 'प्यार स्वतंत्रता है या बेड़ी, उन्होंने कहा, 'प्यार और भागने को नैतिकता के आधार पर अनुशासन तोड़ने का नाम नहीं दिया जा सकता। 

यह कुछ लोगों के लिए अपराध हो सकता है और कुछ के लिए अपराध नहीं होगा। अदालत ने कहा, 'किसी का किसी के साथ संबंध रखना उसका निजी फैसला है और यह उसको संविधान के तहत दी गई मूल स्वतंत्रता है। जीवनसाथी या जिंदगी जीने का रास्ता चुनना व्यक्तिगत स्वतंत्रता का विषय है। 

गौरतलब है की राज्य के तिरवनंतपुरम स्थित CHMM कॉलेज फॉर एडवांस स्टडीज में BBA की पढ़ाई कर रहे दो छात्र एक दूसरे से प्यार कर रहे थे। इस कारण वे दोनों घर छोड़कर भाग गए थे। हालांकि उनके परिजनों को इस रिश्ते पर आपत्ति थी। 

दरअसल, लड़की के घर वालों ने पहले उसके गायब होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, लेकिन बाद में उनकी शादी के लिए तैयार हो गए। लेकिन समस्या तब शुरू हुई जब कॉलेज प्रशासन ने दोनों को 'अनुशासन तोड़ने' के आरोप में कॉलेज से निकाल दिया। 

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इसके बाद लड़की ने अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया, वहीं उसके पति ने कोर्ट में याचिका दायर करते हुए अपने एकेडमिक रिकॉर्डस दिलवाने की मांग की, जिसे संस्थान ने अपने पास रख लिया था। 

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