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लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, बिना चर्चा बिल पारित होना चिंताजनक, कमेटी की रिपोर्ट पर उठाएंगे कदम

संजीवनी टुडे 27-11-2020 21:26:55

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा है कि बिना चर्चा के कोई भी बिल पास होना चिंताजनक है।


जयपुर। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा है कि बिना चर्चा के कोई भी बिल पास होना चिंताजनक है। हम प्रयास कर रहे हैं कि इस तरह के कानून-नियम बने, ताकि कम से कम व्यवधान के चलते किसी भी बिल पर चर्चा हो सके। गुजरात के केवडिय़ा में आयोजित पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन में इसे लेकर एक कमेटी बनाई गई है। इस कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर आगे कदम उठाए जाएंगे।

लोकसभा अध्यक्ष बिरला शुक्रवार को जयपुर में संविधान दिवस के मौके पर केवडिय़ा में आयोजित पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन में पारित संकल्पों व निर्णयों के संबंध में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के माध्यम से संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने के प्रति सभी पीठासीन अधिकारी प्रतिबद्ध हैं। यह ऐतिहासिक सम्मेलन था, जिसमें संवैधानिक मूल्यों पर चर्चा हुई। व्यवस्थापिका की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसके अलावा कार्यपालिका और न्यायपालिका की भूमिका पर भी चर्चा हुई।

दल बदल कानून के मामले में बिरला ने कहा कि देहरादून में पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन में इस मसले पर चर्चा हुई थी। चर्चा में सामने आया था कि आसीन अधिकारी के पास असीमित अधिकार हैं। हम किस तरीके से हमारे अधिकारों को सीमित करते हुए निर्बाध और निष्पक्ष रूप से अपनी भूमिका निभा सके। इसके लिए भी चर्चा हुई है। राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष सीपी जोशी के अध्यक्षता में एक कमेटी बनी है। जोशी ने कई विधान मंडलों के पीठासीन अधिकारियों से चर्चा की है। उसकी रिपोर्ट आने के बाद यदि लगता है कि कानून में आवश्यक परिवर्तन करने की जरूरत है, तो वह करेंगे। पीठासीन अधिकारी भले ही किसी दल से आते हो, लेकिन वे निष्पक्ष होकर निर्णय करने का भरपूर प्रयास करते हैं। 

उन्होंने कहा कि संसद को वर्चुअल तरीके से चलाने के मामले में सभी दलों से बात की जाएगी। सहमति के आधार पर निर्णय करेंगे। उन्होंने कहा कि कृषि विधेयकों पर सदन में 5 घंटे से अधिक समय तक चर्चा हुई है। विधेयक लाने का काम सरकार का होता है। एक देश-एक चुनाव की रूपरेखा देश तय करेगा। लव जिहाद से जुड़े सवाल पर बिरला ने कहा कि अगर राज्य सरकार कानून बना सकती हैं तो यह उसका अधिकार है। हमारे यहां पर केंद्र की सूची होती है, जिसमें केंद्र कानून बनाता है। जो राज्य की सूची होती है उसमें राज्य कानून बनाता है। एक होती है राज्य और केंद्र दोनों की संयुक्त सूची, जो दोनों बना सकते हैं। अब कौनसा कानून राज्य बना सकता है या नहीं, राज्य अपने विधि विशेषज्ञों से राय लेकर यह निर्णय कर सकते हैं। यदि कोई राज्य विधि और कानून के विरुद्ध बिल बनाता है तो उसकी न्यायिक समीक्षा करने का अधिकार न्यायालय को है। इसलिए कानून बनाने का अधिकार है या नहीं, इसे राज्य अपने लॉ डिपार्टमेंट से सुनिश्चित करता है।

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