संजीवनी टुडे

राममंदिर निर्माण और आडवाणी को हाशिये पर रखने से खिन्न है लोहाना क्षत्रिय समाज

संजीवनी टुडे 11-05-2019 22:01:01


नई दिल्ली। अयोध्या में राममंदिर निर्माण का मुद्दा और राजनीति में लाल कृष्ण आडवाणी को हाशिये पर डाल दिये जाने से लोहाना क्षत्रियों में तीखी नाराजगी है। लोहाना क्षत्रिय विभिन्न राज्यों में अच्छी उपस्थिति रखते हैं, इसलिए चुनाव में वो एकजुट हो गए हैं। वे अपना गुस्सा मतदान के समय ईवीएम का बटन दबाकर जाहिर कर रहे हैं। मुंबई में 1992 में अंतरराष्ट्रीय लोहाना सम्मेलन हुआ था। उसमें भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी भी शामिल हुए थे। सम्मेलन को संबोधित करते हुए आडवाणी ने कहा था, “मैं लोहाना क्षत्रिय हूं। राम का वंशज हूं...।” उस सम्मेलन में विश्व भर के सिंधी आये थे। जो  बहुत सम्पन्न और व्यापार व अन्य क्षेत्र में आगे हैं। उस सम्मेलन में शामिल एक बुजुर्ग सिंधी का कहना है कि आडवाणी जी अपने को राम का वंशज मानते हैं। 

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यही वजह है कि उन्होंने रामजन्मभूमि उद्धार और वहां मंदिर बनवाने के लिए मंदिर आंदोलन शुरू किया लेकिन आज रामजी कहां पड़े हैं? और आडवाणी जी कहां पड़े हैं? अपने राम व अपने नेता आडवाणी की इस स्थिति से लोहाना क्षत्रिय समाज अंदर – अंदर उद्वेलित है। इनके प्रतिनिधि राजपूत व भूमिहार समाज के लोगों से भी इस मुद्दे पर साथ देने के लिए बात कर रहे हैं। पंजाबी बंधुओं से भी मिल रहे हैं। इस बारे में भारतीय सिंधु समाज नागपुर के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष घनश्याम कुकरेजा का कहना है कि जनसंघ में लगभग 30 प्रतिशत लोग सिंधी  समाज के थे। अब भी लगभग 80 प्रतिशत सिंधी मतदाता भाजपा को वोट देते हैं। जो भाजपा में आडवाणी की उपेक्षा से इस बार दुखी हैं। राष्ट्रीय सिंधी भाषा व विकास परिषद के उपाध्यक्ष रहे श्रीकांत भाटिया का कहना है कि भारत के इतने बड़े नेता लालकृष्ण आडवाणी की आज जो हालत है, उससे हमारे समाज के अलावा अन्य समाज के लोग भी बहुत आहत हैं।

सिंधी समाज के पदाधिकारियों का कहना है कि म.प्र. में उनके समाज के लगभग 14 लाख मतदाता हैं। भोपाल की बैरागढ़ तथा इंदौर की विधानसभा नं. 4 में सिंधी मतदाताओं की संख्या बहुत है। भोपाल में 1.5 लाख तथा इंदौर में 1.25 लाख मतदाता सिंधी हैं। म.प्र. के 30 जिलों के 50 विधानसभा सीटों पर सिंधी समाज का अच्छा वोट है। राजस्थान व गुजरात में भी प्रभावी संख्या में हैं। लखनऊ में 1.5 लाख के लगभग हैं। पटना में कम हैं, लेकिन है। अन्य राज्यों में भी हैं। भारत की अर्थव्यस्था में इनका योगदान लगभग 8 प्रतिशत है। सूत्रों का कहना है कि  इनके वोट लगभग एकतरफा भाजपा की तरफ जाते रहे हैं लेकिन इस बार कुछ संशय है। भोपाल के मिनू वासवानी का कहना है कि इस बार हमारे समाज का ज्यादातर वोट अन्य पार्टी को जा रहा है। यही हाल इंदौर के मेरे रिश्तेदारों का है।  लखनऊ के विमल भाटिया  तो बिना लाग लपेट बताये कि पहले वह भाजपा को वोट देते थे। इस बार कांग्रेस की प्रत्याशी पूनम सिन्हा को वोट दिये, जो उनकी विरादरी की हैं। 

विमल का कहना है कि हम लोगों ने भोपाल, पटना, इंदौर, मुंबई में भी अपने समाज व परिवार के लोगों से बात की। इस बार ज्यादातर लोग यही कर रहे हैं। अपने तो कर ही रहे हैं, अपने करीबी रहे अन्य जातियों के लोगों से भी कह रहे हैं। इनमें क्षत्रिय प्रमुख हैं। इसकी वजह यह है कि हमारे ज्यादातर लोग अपने को राम का वंशज मानते हैं। एक कारण यह भी रहा जिसके चलते लालकृष्ण आडवाणी ने रामजन्मभूमि मंदिर मुद्दे को लेकर रथयात्रा निकाली। उसे इतना बड़ा मुद्दा बनाया, जिसके कारण भाजपा आज सत्ता में है। इसके विपरीत सत्ता पर बैठे हुक्मरान बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में आडवाणी जी को ही सीबीआई से फंसाने का उपक्रम कर रहे हैं। श्री रामजी टेंट में हैं, उनको देखने तक नहीं जा रहे हैं। 

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जिनके हम वंशज हैं, उस श्री राम के जन्म स्थान की  स्थिति, उनके जन्म स्थान पर मंदिर बनवाने की मुहिम चलाने वाले लालकृष्ण आडवाणी की स्थिति देखकर राम का हर वंशज आहत है। इसमें सर्वाधिक आहत क्षत्रिय समाज ही है। वह चाहे लोहाना क्षत्रिय है या सिसोदिया या गोहिल या रघुवंशी या चौहान या चन्द्रवंशी या अन्य क्षत्रिय । हमारे समाज के कुछ जिम्मेदार लोग बिना शोर शराबे के अन्दर – अन्दर इन सबसे मिलकर विचार-विमर्श कर रहे हैं, आगे की रणनीति बना रहे हैं।

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