संजीवनी टुडे

लालू की कलाबाजी नहीं सीख सके तेजस्वी, जीरो पर हुआ आउट

संजीवनी टुडे 23-05-2019 22:16:14


राजदपटना। राजद मुखिया लालू यादव के सियासी उत्तराधिकारी तेजस्वी यादव बुरी तरह से फ्लॉप साबित हुये हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में राजद को 4 सीटें मिली थी, जबकि 2019 में तेजस्वी के नेतृत्व में उसका खाता भी नहीं खुला। महागठबंधन में उनके खाते में आयी 19 में से सभी 19 सीटें राजद को गंवानी पड़ी। पढ़ाई-लिखकर छोड़कर क्रिकेट में भाग्य आजमाने के बाद सियासत की दुनिया में कदम रखने वाले तेजस्वी यादव अपनी पूरी टीम के साथ 2019 के लोकसभा चुनाव के सियासी पिच पर जीरो रन पर ऑउट हो गये। एक क्रिकेट कप्तान के लिए यह जरूरी होता है कि वह मौसम और पिच को देखते ही भांप ले कि अपनी टीम के साथ उसे इस पर कैसे खेलना है। उन्होंने ओपनिंग ही गलत तरीके से की। 

अपने पिता लालू यादव की तरह उन्होंने आरक्षण के मुद्दे को पकड़ और फिर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की तर्ज पर चिल्लाते रहे कि देश का संविधान खतरे में है। अगर नरेंद्र मोदी फिर से प्रधानमंत्री बन गये तो गरीबों, दलितों, पिछड़ों और अकलियतों का वोट देने का अधिकार समाप्त हो जाएगा। यह बात लालू यादव के परंपरागत समर्थकों की नई नस्ल को हजम नहीं हो रही थी। इसके अलावा आरक्षण के मुद्दे का हाल, बुझी हुई आग की तरह था। तेजस्वी यादव फूंकते रहे लेकिन उसमें से चिंगारी नहीं निकली।लालू परिवार के अंदर दोनों भाइयों के बीच सियासी विरासत को लेकर मचा घमासान भी राजद के लिए घातक साबित हुआ। तेजस्वी यादव इस मामले को भी तरीके से हैंडिल नहीं कर सके। दोनों के बीच लड़ाई की खबरों ने लालू यादव के पुराने साथियों को कुछ ज्यादा ही दुखी कर दिया। 

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लालू यादव की गैरमौजूदगी में वे तेजप्रताप और तेजस्वी यादव की लड़ाई में लगातार अपमानित होते रहे। वे लोग दुखी होकर दोनों तेजस्वी  यादव और तेजप्रताप का पतन देखना चाह रहे थे। इसके अलावा टिकट बंटवारे में जिस तरह से उनकी उपेक्षा करके  वीआईपी के नेता मुकेश सहनी और उपेंद्र कुशवाहा को तरजीह दी गई, उससे भी वे लोग खासे नाराज थे। मौका मिलते ही अपना करामात दिखा दिया। राजद के सभी स्टालवार्ट बेगुसराय से तनवीर हसन, अररिया से सरफराज आलम,   बांका से जयप्रकाश यादव,  भागलपुर से बुलो मंडल,  बक्सर से जगदानंद सिंह, दरभंगा अब्दुल बारी सिद्दिकी, गोपालगंज से सुरेंद्र राम उर्फ महंत, हाजीपुर से शिवचंद्र राम, झंझारपुर से गुलाब यादव, जहानाबाद से सुरेंद्र यादव, मधेपुरा से शरद यादव, पाटलिपुत्रा से मीसा भारती, सारण से चंद्रिका राय, सीवान से हिना शहाब, वैशाली से रघुवंश प्रसाद सिंह, नवादा से विभा देवी, सीतामढ़ी अर्जुन राय, महाराज गंज से रणधीर सिंह और शिवहर सय्यैद फैसल अली को ध्वस्त कर दिया।

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