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किसान आंदोलन: अब छोटे बॉर्डरों पर पुलिस की नजरें, जल्द हो सकती है भारी तैनाती

संजीवनी टुडे 03-12-2020 22:35:05

किसान आंदोलन को लेकर पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जिस तरह से किसान अभी तीन से चार बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे हैं।


नई दिल्ली। किसान आंदोलन को लेकर पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जिस तरह से किसान अभी तीन से चार बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे हैं। अगर किसान और सरकार के बीच सहमति नहीं बनी तो किसान दिल्ली से सटे करीब दस छोटे बॉर्डर पर आंदोलन करके उनको बंद कर सकते हैं। ऐसे में सुरक्षा-व्यवस्था पूरी तरह से चरमराने का डर है। इस बाबत केंद्रीय गृह मंत्रालय को जानकारी दी गई है। ऐसे बोर्डरों पर पुलिस पहले से ही तैनात करने की तैयारी कर रही है। वैसे इन बॉर्डरों पर पुलिस की तैनाती हमेशा ही रहती है। बस वहां पर पुलिस बल की संख्या को और बढ़ा दिया जाएगा।

आंदोलन किसी एक धर्म का आंदोलन नहीं: किसान
कुछ किसानों ने बताया कि उनके सामने ऐसी बातें सामने आ रही है,जिसमें बताया जा रहा है कि आंदोलन एक दो धर्मों के लोगों का ही है। वह बताना चाहते हैं कि किसान अन्नदाता होता है वह किसी  की धर्म जाति देखकर फसल नहीं देता है। आंदोलन में सभी धर्म जाति के किसान बढ़ चढकर हिस्सा ले रहे हैं। यह सिर्फ अफवाह ही फैलाई जा रही है।

कोई किराया नहीं मांग रहा है तो कोई बिना पैसे लिये ही सामान दे रहा है
किसानों ने बताया कि वह जहां भी जा रहे हैं। उनसे ऑटो वाले पैसे नहीं ले रहे हैं। उनको जबर्दस्ती पैसे दिये जा रहे हैं। इसी तरह से वह दुकान से कुछ सामान खरीद रहे हैं तो दुकानदार उनसे सामान के पैसे नहीं ले रहा है। जिसको देखकर लगता है कि इस किसान आंदोलन में किसान ही नहीं बल्कि आम नागरिक भी उनके साथ है। इससे हमकों और ज्यादा हौंसला मिल रहा है और विश्वास है कि सरकार बिल को वापिस ले लेगी।

कूड़ा बिनने वाले बच्चे अपना और परिवार के लिए भोजन ले जा रहे हैं सिंधू बार्डर पर चल रहा किसान आंदोलन हजारों गरीब मजदूर परिवारों के लिए भी वरदान साबित हो रहा है। इस इलाके के आस-पास रहने वाले गरीब परिवारों को आजकल भरपेट खाना तो मिल ही रहा है, इसके अलावा फल फू्रट और दूध लस्सी भी उन्हें आराम से मिल रही है। आंदोलनकारियों की उदारता की पराकाष्ठा यह है कि यहां आने वाले हर व्यक्ति को बिना कोई सवाल पूछे भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। आंदोलन में शामिल लोग गरीब लोगों महिलाओं और बच्चों को बुला-बुलाकर खाने का सामान दे रहे हैं। यहीं नहीं बच्चे अपने परिवार के लिए भोजन यहां से इक्ट्ठा करके घर पर ले जा रहे है।

हरियाणा से सटे सभी शराब के ठेकों पर लगा हुआ है ताला
किसान आंदोलन जब से शुरू हुआ है। तब से हरियाणा से सटी दुकानें तो खुली हुई है। लेकिन करीब आधा दर्जन से ज्यादा शराब के ठेकों पर तला लगा हुआ है। बताया गया है कि सुरक्षा के लिहाज से इनको बंद किया गया था। साथ ही किसानों को भी आंदोलन में ऐसा नशा करने के लिए कहा भी जा रहा है। आंदोलनकारियों का कहना है कि केन्द्र सरकार का कृषि बिल किसी गंदे नशे से कम नहीं हैं। दोनों नशे परिवार को खत्म करने से कम नहीं हैं। अच्छा है कि सरकार ने इनको बंद कर रखा है।

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