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केजरीवाल ने PM को लिखा पत्र, कहा- दिल्ली सरकार ने स्टेट यूनिवर्सिटी के लिए जो फैसला लिया है उसे देशभर में लागू करें

संजीवनी टुडे 11-07-2020 16:08:25

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री को लेटर लिखा है और कहा है कि जो फैसला दिल्ली सरकार ने स्टेट यूनिवर्सिटी के लिए लिया है, वहीं फैसला केंद्र सरकार देशभर की यूनिवर्सिटी के लिए लागू करें।


नई दिल्ली। कोरोना के चलते दिल्ली सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। दिल्ली की सभी स्टेट यूनिवर्सिटी में सभी आगामी परीक्षाएं स्थगित कर दी गई हैं। सभी स्टेट यूनिवर्सिटी से कहा गया कि परीक्षा के बिना मूल्यांकन के अन्य तरीकों के जरिये विद्यार्थियों को प्रमोट किया जाए या डिग्री दी जाए। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने शनिवार को यह जानकारी दी। वही, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री को लेटर लिखा है और कहा है कि जो फैसला दिल्ली सरकार ने स्टेट यूनिवर्सिटी के लिए लिया है, वहीं फैसला केंद्र सरकार देशभर की यूनिवर्सिटी के लिए लागू करें। 

दरअसल, दिल्ली के उपमुख्यमंत्री ने राज्य के सभी विश्वविद्यालयों की परीक्षाएं रद्द करने की घोषणा की है, छात्र-छात्राओं के इंटर्नल एग्जाम के आधार पर इवैल्युएशन कराकर उन्हें उत्तीर्ण किया जाएगा। उन्होंने सुझाव दिया कि केंद्र सरकार के अंतर्गत आने वाली सभी यूनिवर्सिटी के लिए भी यही रास्ता अपनाया जाए। उन्होंने कहा कि यह सुझाव मानना या न मानना केंद्र पर निर्भर करता है। कोरोना की वजह से एग्ज़ाम लेना और डिग्री न देना अन्याय होगा। ये निर्णय स्टेट यूनिवर्सिटीज़ के लिए लिया गया है।  

Coronavirus All Delhi government universities examinations canceled students will be passed on the basis of evaluation

सिसोदिया ने कहा, "दिल्ली सरकार की जितनी यूनिवर्सिटी है, उनमें आगामी परीक्षाएं कैंसल कर दी गई हैं, सेमेस्टर एग्जाम कैंसल होंगे। दिल्ली सरकार की यूनिवर्सिटी के फाइनल ईयर के स्टूडेंट्स के एग्जाम नहीं होंगे और मूल्यांकन का कोई फॉर्मूला तय करके डिग्रियां दी जाएंगी।" सिसोदिया ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। पत्र में कहा गया है कि इससे छात्र-छात्राओं पर मानसिक दबाव भी नहीं पड़ेगा और कोरोना संक्रमण से लड़ाई भी चलती रहेगी।
 
सिसोदिया ने कहा कि कोरोना वायरस संक्रमण के चलते स्कूल और कॉलेज अभी बंद हैं, जब स्कूल बंद किए गए थे तब उनकी परीक्षा चल रही थी। ऐसे में हमने 9वीं और 11वीं के बच्चों के बारे में फैसला लिया था कि उनकी परीक्षा की जगह बिना एग्जाम के अगली क्लास में भेजेंगे। इस बाबत हमने केंद्र सरकार से दसवीं और बारहवीं के बारे में भी यही व्यवस्था करने को कहा था। केंद्र सरकार ने इसको मान लिया था। स्कूल का मामला अलग था, लेकिन यूनिवर्सिटी का मामला थोड़ा पेचीदा है। जिस सेमेस्टर को पढ़ाया ही नहीं गया उसके बारे में एग्जाम लेना मुश्किल है यह दिल्ली सरकार का मानना है।

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