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कर्नाटक के बागी विधायकों ने की विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात, मध्यरात्रि तक आएगा फैसला

संजीवनी टुडे 11-07-2019 22:38:44

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार कर्नाटक के 11 बागी विधायकों ने गुरुवार को विधानसभा अध्यक्ष केआर रमेश कुमार से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की तथा विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र के बारे में अपने पक्ष से उन्हें अवगत कराया।


नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार कर्नाटक के 11 बागी विधायकों ने गुरुवार को विधानसभा अध्यक्ष केआर रमेश कुमार से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की तथा विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र के बारे में अपने पक्ष से उन्हें अवगत कराया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार विधानसभा अध्यक्ष को आज मध्य रात्रि तक त्यागपत्रों के बारे में फैसला करना है।विधानसभा अध्यक्ष केआर रमेश कुमार ने विधायकों से मुलाकात के बाद एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि त्यागपत्रों का मामला बहुत गंभीर है तथा इस पर समुचित रूप से विचार करना जरूरी है। इसके लिए उनके पास रात भर का समय है। विधायकों और अध्यक्ष के बीच मुलाकात की वीडियोग्राफी की गई है। 

अध्यक्ष ने कहा कि  वह वीडियो और संबंधित कागजात  सुप्रीम कोर्ट भेजेंगे, जहां इस मामले पर शुक्रवार को  सुनवाई होनी है।विधानसभा अध्यक्ष ने इस बात का खंडन किया कि सत्तारूढ़ कांग्रेस और जनता दल-एस सरकार पर संकट का कारण बने विधायकों के त्यागपत्र के बारे में फैसला करने में उन्होंने देरी की थी। उनका कहना था कि कुछ त्यागपत्र उचित प्रारूप में नही थे। इन विधायकों ने उनसे संपर्क नहीं किया जबकि वह विधानसभा भवन में मौजूद थे।रमेश कुमार ने कहा कि विधायकों से मुलाकात के बाद अब वह विधानसभा के नियमों के तहत फैसला करेंगे कि त्यागपत्र स्वेच्छा से दिए गए या किसी दबाव में। उन्होंने कहा कि वह इस बात का खुलासा नही करेंगे कि इस्तीफे स्वेच्छा से दिए गए या दबाव में। उन्होंने कहा कि मुलाकात के दौरान विधायकों ने जानकारी दी कि उन्हें कुछ लोगों की ओर से धमकियां दी जा रही थीं, इसीलिए उन्होंने कर्नाटक से बाहर मुंबई में शरण ली थी।

उल्लेखनीय है कि इस्तीफा देने वाले 10 विधायकों ने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली थी। कोर्ट ने संक्षिप्त सुनवाई के बाद निर्देश दिया था कि ये 10 विधायक आज शाम 6 बजे विधानसभा अध्यक्ष से मिलें और त्यागपत्र के संबंध में अपना पक्ष रखें। कोर्ट ने अध्यक्ष को फैसले के लिए मध्य रात्रि तक का समय दिया था।इस निर्देश के खिलाफ विधानसभा अध्यक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया था कि वह फैसला लेने के लिए उन्हें कुछ और समय दें। कोर्ट ने इस अनुरोध पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया था।मुंबई के पांच सितारा एक होटल में ठहरे कांग्रेस व जनता दल-एस के 10 विधायक दो चार्टर विमानों से बेंगलुरु के एचएल हवाई अड्डे पर उतरे और कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच विधान सभा भवन तक पहुंचे। इन 10 विधायकों में बृजपति बसवराज, रमेश जारकीहोली, एस टी सोमशेखर, बी सी पाटिल, के गोपालैया, शिवराम हेब्बार, नारायण गौड़ा, ए एच विश्वनाथ, प्रताप गौड़ा पाटिल और महेश कुमाथली शामिल थे। एक अन्य बागी विधायक मुनीरत्ना सीधे विधानसभा पहुंचे।

लोकसभा चुनाव में कर्नाटक में भाजपा की भारी विजय के बाद राज्य के सत्तारूढ़ गठबंधन में  अफरातफरी मच गई। सत्तारुढ़ गठबंधन को सदन में मामूली बहुमत हासिल है। गठबंधन के कुल 16 विधायकों ने विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र देने की घोषणा की है, जिसमें 13 विधायक कांग्रेस के और शेष जनता दल-एस के हैं। सरकार को समर्थन दे रहे दो निर्दलीय विधायकों ने भी समर्थन वापस ले लिया है।एक अन्य घटनाक्रम में गोवा में कांग्रेस के 15 में से 10 विधायक अपनी पार्टी से नाता तोड़ने के बाद आज दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया । भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इन विधायकों को पार्टी की सदस्यता ग्रहण कराई।इससे पूर्व, गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत के साथ इन 10 विधायकों ने गुरुवार को संसद भवन में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की । 

शाह से मुलाकात के बाद सावंत सभी विधायकों के साथ शाम को भाजपा मुख्यालय गए  और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की। नड्डा ने सभी विधायकों को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता की पर्ची और अंगवस्त्र देकर उनको औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल कराया। इसके बाद सभी विधायक मुख्यमंत्री सावंत के साथ पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की समाधि पर गए और पुष्पांजलि अर्पित की। उधर, नागपुर में गुरुवार को मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कर्नाटक और गोवा के राजनीतिक घटनाक्रम पर पर मीडिया द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा कि भाजपा तोड़-फोड़ की राजनीति में विश्वास नहीं रखती। यदि ऐसा होता तो हम बहुत पहले यह सब कर चुके होते। कांग्रेस के साथ यह दिक्कत है कि इनका कोई नेता नहीं है। विधायक और सांसदों की आवाज नहीं सुनी जाती। नतीजतन कांग्रेस के लोग खुद को असुरक्षित और असहज महसूस करते हैं। इसके चलते वह सुरक्षित माहौल खोजते हुए भाजपा का रुख कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सच्चाई तो यह है कि कांग्रेस डूबता हुआ एक ऐसा सियासी जहाज है, जिसका कैप्टन सबसे पहले भाग गया।

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