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कर्नाटक संकट: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी, बुधवार को आएगा फैसला

संजीवनी टुडे 16-07-2019 18:07:21

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी, बुधवार को आएगा फैसला


नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक के मामले पर सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट 17 जुलाई (बुधवार) को फैसला सुनाएगा। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि पिछले 20-30 सालों में हमने स्पीकर का कद ऊंचा किया है लेकिन उसका हुआ क्या? हमें इस पर विचार करना चाहिए। चीफ जस्टिस ने विधायकों के वकील मुकुल रोहतगी और स्पीकर के वकील अभिषेक मनु सिंघवी से कहा कि आप दोनों की दलीलों में दम है और हम उसमें संतुलन कायम करेंगे। 

विधायकों की ओर से मुकल रोहतगी ने कहा कि स्पीकर के सामने विधायकों को अयोग्य करार दिये जाने की मांग का लंबित होना, उन्हें इस्तीफे पर फैसला लेने से नहीं रोकता है। ये दोनों अलग-अलग मामले हैं। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के पूछने पर रोहतगी ने सिलसिलेवार तरीके से पहले दिन से बदलते घटनाक्रम की जानकरी कोर्ट को दी। उन्होंने कहा कि विधायक ये नहीं कह रहे हैं कि अयोग्य करार दिए जाने की कार्यवाही खारिज की जाए, वो चलती रहे लेकिन अब वो विधायक नहीं रहना चाहते हैं। वो जनता के बीच जाना चाहते हैं। ये उनका अधिकार है, स्पीकर इसमें बेवजह बाधा डाल रहे हैं। 

उन्होंने कहा कि अगर कोर्ट पहुँचे विधायकों की संख्या हटा दी जाए, तो ये सरकार अल्पमत में है। रोहतगी ने कहा कि विधायक स्पीकर के सामने, मीडिया के सामने कई बार अपनी राय जाहिर कर चुके हैं कि वो अपनी मर्जी से इस्तीफा दे रहे हैं । फिर स्पीकर अब किस बात की जांच चाहते हैं। अगर विधायक विधानसभा में नहीं आना चाहते हैं, तो उन्हें इसके लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है । 

इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि हम स्पीकर को ये नहीं कह सकते कि वो इस्तीफे या अयोग्य करार दिये जाने के अपने फैसले कैसे लेंगे? हमारे सामने सवाल महज इतना है कि क्या ऐसी संवैधानिक बाध्यता है कि स्पीकर अयोग्य करार दिए जाने की मांग से पहले इस्तीफे पर फैसला लेंगे या दोनों पर एक साथ फैसला लेंगे । तब रोहतगी ने कहा, धारा190 कहती है कि इस्तीफा मिलने का बाद स्पीकर को जल्द से जल्द उस पर फैसला लेना होता है, स्पीकर फैसले को टाल नहीं सकते। 

इस पर चीफ जस्टिस ने पूछा, आप किस तरह का आदेश चाहते हैं? रोहतगी ने कहा कि जिस तरह का आपने पहले दिन आदेश पास किया था, स्पीकर फैसला समय पर लें। रोहतगी ने कहा कि कांग्रेस की याचिका पर इसी कोर्ट ने रात में सुनवाई की थी और 24 घंटे के अंदर फ्लोर टेस्ट कराने का आदेश दिया था। अगर वो आदेश सही था तो अब स्पीकर को इस्तीफा स्वीकार करने के लिए भी कहा जा सकता है। 

रोहतगी के बाद वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने विधानसभा स्पीकर की तरफ से कोर्ट से कहा कि वे तथ्यात्मक रुप से गलत हैं। अयोग्यता से जुड़ी सभी कार्यवाही इस्तीफे के पहले के हैं। अयोग्यता का मामला व्हिप के उल्लंघन का मामला है। सिंघवी ने कहा कि जो इस्तीफा दिया गया है वो वैध नहीं है। इस्तीफे 11 जुलाई को स्पीकर के समक्ष दिए गए, उसके पहले नहीं। उसमें भी चार विधायक अभी भी स्पीकर के समक्ष पेश नहीं हुए हैं। इसका मतलब कि अयोग्यता से जुड़ा मामला इस्तीफे से पहले का है। तब चीफ जस्टिस ने सिंघवी से पूछा कि जब विधायकों ने इस्तीफे खुद जाकर सौंपे तो उनके सुप्रीम कोर्ट आने तक उन पर फैसला क्यों नहीं किया गया। चीफ जस्टिस ने सिंघवी से पूछा कि आखिर क्यों विधायको के मिलने के लिए समय मांगने के बावजूद स्पीकर उनसे नहीं मिले और आखिरकार विधायकों को कोर्ट आना पड़ा। 

इस पर सिंघवी ने कहा कि ये ग़लत तथ्य है। स्पीकर ने हलफनामे में साफ किया कि विधायको ने कोई मिलने के लिए समय नहीं मांगा था । कोर्ट ने कहा कि स्पीकर हमें हमारे संवैधानिक दायित्वों की याद दिलाते हैं लेकिन खुद फैसला नहीं करते हैं। वे कहते हैं कि हम अपने हिसाब से फैसला करेंगे। 

जस्टिस अनिरुद्ध बोस ने पूछा कि क्या दसवीं अनुसूची और धारा 190 एक दूसरे से स्वतंत्र हैं? तब सिंघवी ने कहा कि हां। इस्तीफा अयोग्यता से भागने का रास्ता नहीं हो सकता है। सिंघवी ने कहा कि ये अयोग्यता का मामला है, इस्तीफे का नहीं। सिंघवी ने कहा कि आप अपने पुराने आदेश वापस ले लीजिए। हम विधायकों के अयोग्यता और इस्तीफे पर कल फैसला लेंगे। सिंघवी ने कहा कि कर्नाटक पर पिछले साल के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का बागी विधायक गलत तरीके से उद्धृत कर रहे हैं। उस समय कोई सरकार नहीं थी, कोई स्पीकर नहीं था, इसलिए प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति के लिए कोर्ट को दिशानिर्देश जारी करना पड़ा। कोर्ट अयोग्यता और इस्तीफे पर फैसला करने के लिए समय सीमा तय कर सकती है। उन्होंने कहा कि दलबदल का इलाज जरूरी है। 

कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी की ओर से वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने कहा कि इस्तीफों की एक ही वजह है, मंत्री बनना। स्पीकर जो कुछ भी हो रहा है उस पर हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठ सकता है। ये विधायक एक समूह में काम कर रहे हैं, ये व्यक्तिगत रूप से काम नहीं कर रहे हैं। धवन ने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश पर सवाल उठाया, जिसमें स्पीकर को पहले इस्तीफों पर फैसला करने और बाद में यथास्थिति बहाल करने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि इस कोर्ट को इस पर फैसला करने का क्षेत्राधिकार नहीं है।

यह स्पीकर बनाम कोर्ट का मामला नहीं है बल्कि मुख्यमंत्री बनाम अन्य है जो मुख्यमंत्री बनना चाहता है। वह व्यक्ति सरकार गिराना चाहता है। धवन ने कहा कि सवाल यह नहीं है कि पहले मुर्गा आया कि अंडा। पहले अयोग्यता का मामला आया या इस्तीफों का ये महत्वपूर्ण नहीं है। संविधान ये नहीं कहता है कि पहले किस पर फैसला हो। इस्तीफा लोकतंत्र की जड़ों तक जाता है। धारा 190 और दसवीं अनुसूची को इसके साथ देखना चाहिए। 

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