संजीवनी टुडे

कर्नाटक संकट : बागी 10 विधायक मुंबई के लिए रवाना, इस्तीफों को लेकर इस दिन होगा फैसला

संजीवनी टुडे 07-07-2019 05:45:00

कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस के 11 विधायकों के इस्तीफा देने के बाद राज्य सरकार संकट में आ गई है।


बेंगलुरु। कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस के 11 विधायकों के इस्तीफा देने के बाद राज्य सरकार संकट में आ गई है। दिन में बागी विधायक राजभवन जाकर राज्यपाल वजूभाई वाला से मिले और बाद में कांग्रेस एवं जेडीएस के 10 विधायक एचएएल एयरपोर्ट से चार्टेर्ड प्लेन से मुंबई के लिए रवाना हो गए। कांग्रेस के तीन विधायक रामलि‍ंगा रेड्डी, एसटी सोमशेखर और मुनिरत्‍ना बेंगलुरु में ही हैं। नई दिल्ली से बेंगलुरु पहुंचे कांग्रेस के कर्नाटक मामलों के प्रभारी केसी वेणुगोपाल ने कांग्रेस और जेडीएस नेताओं के साथ करीब डेढ़ घंटे बैठक की जिसमें सिद्धारमैया, जी परमेश्वर, ईश्वर खंडरे, डीके शिवकुमार, डीके सुरेश, जमीर अहमद तथा जेडीएस के एचडी रेवन्ना के अलावा अन्य नेता मौजूद थे।

बैठक में इस पर मंत्रणा की गई कि कैसे बागी विधायकों को मनाया जाए। बताया जाता है कि बैठक में इस फार्मूले पर भी चर्चा हुई कि बागियों को मनाने के लिए कांग्रेस के सभी 23 मंत्रियों से इस्तीफे लिये जाएंगे और बागियों को मंत्री पद दिए जाएंगे। बैठक के बाद वेणुगोपाल नई दिल्ली अथवा कोच्चि के लिए चले गए हैं। वह रविवार को फिर बेंगलुरु वापस आएंगे क्योंकि मुख्यमंत्री कुमारस्वामी रविवार को अमेरिका से लौट रहे हैं।  हालांकि, स्पीकर रमेश कुमार इन विधायकों के इस्तीफों पर मंगलवार को फैसला लेंगे। यदि इन बागी विधायकों का इस्तीफा मंजूर कर लिया जाता है तो कुमारस्वामी सरकार अल्पमत में आ जाएगी। 13 महीने पुरानी सरकार पर संकट को देखते हुए मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने अपना अमेरिकी का निजी दौरा रद्द कर दिया है और वह रविवार शाम तक शहर लौट आएंगे। 

दूसरी ओर, केपीसीसी अध्यक्ष दिनेश गुंडुराव भी विदेश यात्रा से वापस आ रहे हैं। शनिवार को इस्तीफा सौंपने वाले 11 विधायकों में से तीन विधायकों सोमशेखर, बसवराज और शिवराम ने मांग की कि यदि सिद्धारमैया को कर्नाटक का मुख्यमंत्री बनाया जाता है, तो वे अपना इस्तीफा वापस ले लेंगे। हालांकि, वरिष्ठ कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खरगे को भी मुख्यमंत्री बनाने की मांग उठी है। विधानसभा में सत्तारूढ़ गठबंधन का संख्याबल स्पीकर के अलावा 118 है, जिसमें कांग्रेस के 78, जेडीएस के 37, बसपा का एक और निर्दलीय दो विधायक हैं। बसपा विधायक और दोनों निर्दलीय सरकार के साथ हैं। जिन विधायकों को स्पीकर के कार्यालय में देखा गया है उनमें कांग्रेस के रमेश जारकीहोली, प्रताप गौड़ा पाटिल, शिवराम हेब्बार, महेश कुमटल्ली, बीसी पाटिल, ब्यारट्टी बसवराज, एसटी सोमशेखर और रामलिंग रेड्डी शामिल हैं। जेडीएस के विधायकों में एएच विश्वनाथ, नारायण गौड़ा और गोपालैया हैं। दो अन्य विधायक आनंद सिंह और रमेश जारकीहोली पहले ही स्पीकर को इस्तीफा सौंप चुके हैं। 225 सदस्यीय राज्य विधानसभा में भाजपा के 104 सदस्य हैं।

दिन भर चले घटनाक्रम के दौरान जेडीएस सुप्रीमो और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा ने गठबंधन सरकार पर आये संकट पर कहा कि अब गेंद स्पीकर के पाले में है। विधानसभा स्पीकर का कार्यालय 11 विधायकों के इस्तीफ़ों को देखेगा। मुझे इस बारे में कुछ भी जानकारी नहीं है।कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष ईश्वर खंडरे ने गठबंधन सरकार आये संकट के बाद उत्पन्न राजनीतिक संकट की स्थिति में विधानसभा भंग करने की संभावना से इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि हमारे सामने कई विकल्पों में से एक यह भी है।कांग्रेस विधायक दल के नेता सिद्धारमैया ने कहा कि पार्टी इस्तीफा देने वाले असंतुष्ट विधायकों से संपर्क स्थापित करने का प्रयास कर रही है। 

भाजपा का आरोप- सिद्धारमैया हैं मौजूदा उठापटक के लिए जिम्मेदार केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस विधायक दल के नेता सिद्धारमैया राज्य की गठबंधन सरकार की अस्थिरता के पीछे हैं। उन्होंने कहा कि सिद्धारमैया नहीं चाहते हैं कि एचडी देवेगौड़ा परिवार सत्ता में रहे और कांग्रेस में एक वैकल्पिक नेतृत्व उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर के रूप में हो। इसलिए वह सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं।प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा ने कहा कि कांग्रेस और जेडीएस के विधायकों के इस्तीफे के पीछे भाजपा का हाथ नहीं है। हालांकि, उन्होंने कहा कि पार्टी स्थिति पर नजर रखे हुए है और सही समय पर उचित कदम उठाएगी।भाजपा सांसद शोभा करंदलाजे ने पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को गठबंधन सरकार में चल रहे घमासान के लिए जिम्मेदार ठहराया। शोभा ने आरोप लगाया कि सिद्धारमैया ने कांग्रेस विधायकों के बीच विद्रोह को उकसाया है। कांग्रेस के भीतर राजनीतिक संकट सिद्धारमैया और जी परमेश्वर के बीच मतभेद के कारण है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि जो भी विधायक भाजपा की विचारधारा को स्वीकार करता है, उसका पार्टी में स्वागत है। 

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