संजीवनी टुडे

कमलनाथ के बारे में की गई टिप्पणी पर विधानसभा में हंगामा, कार्यवाही दो बार स्थगित

संजीवनी टुडे 19-07-2019 17:18:07

भारतीय जनता पार्टी के पूर्व विधायक सुरेंद्रनाथ सिंह के मुख्यमंत्री कमलनाथ के बारे में की गई टिप्पणी पर आज विधानसभा में सत्तारूढ़ दल कांग्रेस के जमकर हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी।


भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व विधायक सुरेंद्रनाथ सिंह के मुख्यमंत्री कमलनाथ के बारे में की गई टिप्पणी पर आज विधानसभा में सत्तारूढ़ दल कांग्रेस के जमकर हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। हंगामे के चलते आज लगातार तीसरे दिन भी प्रश्नकाल बाधित हुआ।प्रश्नकाल शुरू होते ही सत्तारूढ़ दल कांग्रेस के विधायकों ने भाजपा नेता सुरेंद्रनाथ सिंह के कल यहां प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों के खिलाफ दिए गए आपत्तिजनक बयान का मामला उठाया। कांग्रेस विधायक नारेबाजी करते हुए आसंदी के पास आ गए और सुरेंद्रनाथ सिंह की गिरफ्तारी और भाजपा की ओर से माफी मांगे जाने की मांग करने लगे। विधायकों ने कहा कि सुरेंद्रनाथ सिंह मुख्यमंत्री पर हमले की बात कर राज्य में भय का वातावरण उत्पन्न कर रहे हैं।

सरकार के मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, विजयलक्ष्मी साधौ, प्रद्युम्न सिंह तोमर, हर्ष यादव और तुलसी सिलावट ने भी कांग्रेस विधायकों के शोर-शराबे में सुर में सुर मिलाया। कांग्रेस विधायकों के एकसाथ लगातार बोलने के कारण शोरगुल के बीच अध्यक्ष एन पी प्रजापति ने सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी।सदन के समवेत होने पर कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद और अन्य विधायक दोबारा आसंदी के पास पहुंच गए और नारेबाजी शुरू कर दी। इसी दौरान नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव और भाजपा विधायक नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि इस विषय पर चर्चा करा ली जाए। अध्यक्ष श्री प्रजापति ने कहा कि प्रश्नकाल चलने दिया जाए, लेकिन हंगामा लगातार जारी रहा। इसी बीच अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित कर दी।

दोबारा सदन समवेत होने पर कांग्रेस विधायक महेश परमार ने कहा कि ये राज्य के इतिहास में पहली बार हुआ है, जब कोई मुख्यमंत्री को मारने की धमकी जैसी बात कर रहा है। मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी के क्रियाकलापों के चलते सत्तारूढ़ दल के सदस्यों को काम छोड़ कर आसंदी के पास इकट्ठा होना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सुरेंद्रनाथ सिंह के इस बयान की घटना में पुलिस पर भी सवालिया निशान लग रहे हैं। पुलिस को इस मामले में संज्ञान लेना चाहिए था।इसी बीच अध्यक्ष श्री प्रजापति ने कहा कि कोई भी चाहे किसी भी दल का हो, सार्वजनिक रूप से किसी को ऐसा नहीं करना चाहिए। किसी भी दल के वरिष्ठ नेता पर कोई टिप्पणी होने पर दल उद्वेलित होते हैं। उन्होंने कहा कि अगर ऐसी घटना हुई है तो ये दु:खद है। ऐसे मामलों मेंं एकरूपता निर्धारण होना चाहिए, दल विशेष की कोई बात नहीं है।

वहीं इस मुद्दे पर करीब पौन घंटे के हंगामे के बाद नेता प्रतिपक्ष श्री भार्गव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसदीय बोर्ड की बैठक में सभी जनप्रतिनिधियों को एक श्रेष्ठ और उत्तम संसदीय जीवन जीने को कहा है। मध्यप्रदेश में भी एक-दो ऐसी घटनाएं हुई हैं और भारतीय जनता पार्टी ऐसे विचारों से सहमत नहीं होती। जिस मुद्दे को लेकर सदन में हंगामा हुआ, वह सदन के बाहर की घटना है। इस बारे में संगठन जो भी फैसला करेगा, उसके मुताबिक कार्रवाई होगी।आखिरकार अध्यक्ष की व्यवस्था और समझाइश के बाद इस मामले का पटाक्षेप हो गया और फिर सदन की कार्यवाही आगे बढ़ सकी। अध्यक्ष ने इसके बाद प्रश्नकाल के लिए शेष समय लगभग दस मिनट तक कार्यवाही सुचारू ढंग से चलायी और फिर प्रश्नकाल समाप्ति की घोषणा की। इस तरह प्रश्नकाल के लिए निर्धारित समय एक घंटे में से लगभग 50 मिनट हंगामें की भेंट चढ़ गए। इसके पहले गुरुवार को पूर्ववर्ती सरकार की स्मार्टफोन वितरण योजना को लेकर हुए हंगामे के कारण भी प्रश्नकाल के दौरान दो बार सदन की कार्यवाही स्थगित हुई थी। बुधवार को कानून व्यवस्था पर चर्चा की विपक्ष की मांग के बीच हुए हंगामे के कारण भी सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित होने से प्रश्नकाल बाधित हुआ था।

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