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कैलाश चौधरी ने कृषि बिल पर राजनीति को लेकर कांग्रेस सहित विपक्षी को लिया आड़े हाथों, बोले- घड़ियाली आंसू...

संजीवनी टुडे 30-09-2020 20:18:05

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने कृषि बिल पर राजनीति को लेकर बुधवार को कांग्रेस सहित विपक्षी को आड़े हाथों लिया है।


जयपुर। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने कृषि बिल पर राजनीति को लेकर बुधवार को कांग्रेस सहित विपक्षी को आड़े हाथों लिया है। केंद्र सरकार द्वारा कृषि सुधार की दिशा में पारित किए गए विधेयकों के समर्थन में जनजागरण अभियान के लिए उत्तर प्रदेश के सांसदों एवं विधायकों से वर्चुअल संवाद में केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी ने कहा कि वोटबैंक की राजनीति के लिए विपक्ष किसानों को गुमराह कर रहा है। 

कृषि राज्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2013 में खुद राहुल गांधी ने कहा था कि अपने शासन वाले राज्यों में फल और सब्जियों को एपीएमसी एक्ट से बाहर करेंगे। 2019 में भी कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में एपीएमसी एक्ट समाप्त करने की बात कही थी। अब जब मोदी सरकार किसानों के हित में कदम उठा रही है तो उन्हें गुमराह किया जा रहा है। कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि अब वह भ्रम और झूठ क्यों फैला रही है। 

चौधरी ने कहा कि मोदी ने किसानों के लिए पूरा मार्केट खोल दिया है। इसके बावजूद मंडी व्यवस्था एवं एमएसपी सिस्टम को पहले से भी मजबूत किया है। नए कानून के तहत किसान को केवल अपनी उपज को किसी को भी अपनी बेहतर कीमत पर बेचने की आजादी दी है। इसके लिए उसे कोई टैक्स नहीं देना पड़ेगा। कोविड के संकट ने देश के हर क्षेत्र पर प्रभाव डाला है। लेकिन, किसानों ने इस दौरान रिकार्ड पैदावार किया है। नए कृषि कानून का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि किसानों की आय बढ़ेगी और खेती का दायरा बढ़ेगा। 

कृषि राज्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोग कह रहे हैं कि मंडी और एमएसपी खत्म हो जाएगा। जबकि प्रधानमंत्री मोदी ने एमएसपी को और बढ़ा दिया है। नए कानून में जमीन पर भी किसानों का अपना हक ही होगा। चौधरी ने कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों के आर्थिक उन्नयन के लिए जितने कल्याणकारी कार्य किये उसकी लम्बी फेहरिस्त है। कांग्रेस अब विरोध के नाम पर घड़ियाली आंसू बहा रही है। 

इससे पहले वरिष्ठ नेताओं एवं कृषि वैज्ञानिकों के साथ एक अन्य वर्चुअल संवाद में कृषि राज्यमंत्री ने जैविक और प्राकृतिक खेती के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि ये न केवल मनुष्यों और जानवरों के स्वास्थ्य के लिए, बल्कि उपजाऊ मिट्टी और स्वच्छ पर्यावरण के लिए और निर्यात बढ़ाने तथा कृषि को लाभदायक बनाने के लिए भी आवश्यक हैं। चौधरी ने कहा कि वैज्ञानिकों के सामने मिट्टी की ऊर्वरा शक्ति को बनाए रखना और जलवायु परिवर्तन से निपटना महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं। उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों को इस कृषि पद्धति में सुधार करने में किसानों की मदद करने का आह्वान किया ताकि जैविक खेती को और बढ़ावा मिले और पशु पालन को लाभदायक बनाया जा सके।

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