संजीवनी टुडे

सूर्य की पूजा करने मात्र से उस पर किसी का हक तो नहीं हो जाता: सुन्नी

संजीवनी टुडे 13-09-2019 21:15:28

आज 23वें दिन की सुनवाई के दौरान पूजा करने के आधार पर विवादित स्थल पर हिन्दू पक्ष के मालिकाना हक के दावे का विरोध करते हुए


नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय में अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद की आज 23वें दिन की सुनवाई के दौरान पूजा करने के आधार पर विवादित स्थल पर हिन्दू पक्ष के मालिकाना हक के दावे का विरोध करते हुए कहा कि यदि कोई सूर्य की पूजा करता है तो इससे उसका अधिकार सूर्य पर नहीं हो जाता।

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एक छोटे ब्रेक के बाद सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील राजीव धवन ने जिरह को आगे बढ़ाते हुए मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की संविधान पीठ के समक्ष कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि निर्मोही अखाड़ा वहां प्राचीनकाल से मौजूद है।

धवन ने कहा कि लोगों का विश्वास है कि 11 हज़ार साल पहले उस जगह पर भगवान राम का जन्म हुआ था, लेकिन विवादित जमीन को श्रीराम जन्मभूमि पहली बार 1989 में कहा गया। उसी साल पहली बार कहा गया कि जन्म स्थान न्यायिक व्यक्ति है। इससे पहले कभी ऐसा दावा नहीं किया गया।

उन्होंने आगे कहा कि रामलला विराजमान की ओर से दलील दी गयी थी कि हिंदू नदियों, पहाड़ों को पूजते आये हैं, इसी तर्ज पर रामजन्म स्थान भी वंदनीय है। उन्होंने कहा, “मेरा कहना है कि यह एक वैदिक अभ्यास है। हिन्दू सूरज की पूजा करते हैं, पर इससे उस पर उनका मालिकाना हक़ तो नहीं हो जाता।”

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