संजीवनी टुडे

यूथ आईकन नेशनल अवार्ड से सम्मानित होंगे पत्रकार प्रदीप रावत "रवांल्टा"

संजीवनी टुडे 08-11-2018 21:30:00


कोटद्वार। कोटद्वार से पत्रकारिता कि शुरुआत करने वाले पत्रकार को इस बार यूथ आइकन नेशनल अवार्ड से नवाजा जा रहा है। इस बार का यूथ आइकन नेशनल अवार्ड एक ऐसे पत्रकार को दिया जा रहा है, जो अपनी लेखनी के चलते चर्चाओ में रहते है। बिन्दाश एवं निष्पक्ष व जनपक्षीय लेखनी के चलते इन्हें यूथ आइकन के नेशनल अवार्ड से सम्मानित किया जा रहा है। ऐसे ही पत्रकार हैं रवाईं घाटी की शान प्रदीप रावत "रवांल्टा"। 

प्रदीप रावत (रवांल्टा) ने मुख्यधारा की पत्रकारिता की शुरुआत गढ़वाल के द्वार कहे जाने वाले कोटद्वार में अमर उजाला से की। करीब तीन साल अमर उजाला में काम करने के बाद कोटद्वार दैनिक जागरण में भी करीब ढाई साल प्रदीप रावत "रवांल्टा" ने काम किया। इसके बाद दैनिक जागरण हल्द्वानी ज्वाइन किया। यहां भी करीब ढाई-तीन साल काम किया। प्रदीप रावत "रवांल्टा" ने देवभूमि उत्तराखण्ड के पहाड़ की विभिन्न समस्याओं को समाचार पत्रों में प्रमुखकता से प्रकाशित कराया। 2015 में कोटद्वार दैनिक जागरण से हल्द्वानी दैनिक जागरण चले गए। हल्द्वानी में हर सामाजिक पहलू को स्पर्श करती हुई कई खबरें लिखी।

प्रदीप रावत (रवांल्टा) की हल्द्वानी और कोटद्वार की पत्रकारिता को आज भी अधिकारी और जनसामान्य याद करता है। एक पत्रकार के लिए इससे बड़ा धन कुछ नहीं हो सकता कि लोग सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनैतिक मुद्दों पर की गई पत्रकारिता के लिए उनको हमेशा याद करते हैं। प्रदीप रावत (रवांल्टा) व्यवहार कुशल होने के साथ-साथ बहुत खुश मिजाज व्यक्ति भी है। रवांल्टा से एक बार मिले तो बार-बार मिलने का दिल करता है। हमेशा पत्रकारिता के सिद्धांतों और पत्रकारिता के मूल्यों पर चिंतन करना ये दर्शाता है कि किसी को दिखावे के लिए नहीं, बल्कि जनहित के लिए चुना है। वैसे बात यदि हम प्रदीप की लेखनी की करे तो प्रदीप की लेखनी जनपक्षीय, समसामयिक, राजनैतिक, पर्वतीय क्षेत्रो के विकास के लिए कार्य करती रही है । प्रदीप रावत ने अपनी लेखनी से हमेशा लोहा मनवाया है। अभी कुछ दिन तक प्रदीप के जन मुद्दों पर प्रकाशित लेखो को लोगो के द्वारा बहुत सराहा गया है।

रवांल्टी भाषाओं के लिए प्रदीप की दीवानगी
प्रदीप रावत "रवांल्टा ने हल्द्वानी से आने के बाद दूरदर्शन के लिए बतौर असिस्टेंट न्यूज एडिटर काम करना शुरू किया। यहां करीब डेढ़ वर्ष काम करते हुए हो गया है। यहीं से उन्होंने अपने गुरु साहित्यकार महावीर रवांल्टा जी के साथ मिलकर रवांल्टी को पहचान दिलाने के उनके सपने को पूरा करने में जुट गए। आंचलिक बोली-भाषा रवांल्टी में कविताओं और गद्य को लिखना शुरू किया। रवांल्टी में विधिवत्त गद्य लेखन की शुरुआत भी प्रदीप ने ही की। प्रदीप अपनी भाषा के लिए तेजी से कार्य कर रहे हैं। इसके लिए दूरदर्शन पर प्रख्यात साहित्यकार महावीर रवांल्टा के सानिध्य में रवांल्टी कवि सम्मेलन कार्यक्रम में बतौर कवि अपनी कविताओं से लोगों को रू-ब-रू करा चुके हैं। इसके अलावा महावीर रवांल्टा पर आधारित साहित्यीकी कार्यक्रम में भी रवांई और रवांल्टी के बारे में बता चुके हैं। प्रदीप रावत का मुख्य उद्देश्य है कि रवांई की संस्कृति को लोग अच्छे से समझ सकें। प्रदीप का मानना कि अभी तक रवांई घाटी को लोग नकारात्मक दृष्टिकोण से ही देखते आए हैं, जबकि रवांई घाटी में बहुत कुछ ऐसा है, जो लोगों के सामने लाया जाना चाहिए। इन दिनों प्रदीप रावत रवांई की लोक कथाओं पर रवांल्टी में लेखने का कार्य कर रहे हैं। 
रवांल्टी भाषा लेखन के बारे में प्रदीप रावत की जुबानी 

प्रदीप रावत बताते है कि रवांल्टी भाषा में लेखन को असर नजर आने लगा है। प्रदीप रावत (रवांल्टा) का कहना है कि अब लोग उनसे फोन पर अपनी भाषा में बात करने लगे हैं। आओ रंवाई को जानें अभियान में लिखने के लिए अब लोगों की डिमांड होने लगी है। इससे बड़ी बात यह है कि महावीर रवांल्टा जी के सानिध्य में रवांल्टी कवि सम्मेलन के लिए अब रवांई घाटी में आयोजन की मांग उठने लगी है। पुरोला से ऐसा ही एक निमंत्रण मिला है। 23 से 25 नवंबर तक नौगांव में होने वाले रवांई महोत्सव में भी रवांल्टी कवि सम्मेलन को दूसरी बार आयोजन किया जाएगा। 
जनसरोकारो की पत्रकारिता के लिए जाने जाते है प्रदीप 

जहाँ आजकल पत्रकारिता में कई तरह के लोग घुसपैठ कर आए हैं। प्रदीप उनके खिलाफ भी निडर होकर अपने पहाड़ समाचार न्यूज पोर्टल में सीधी बात, टेढ़ी बात कॉलम में लगातार लिख चुके हैं। निर्भीक लेखन के लिए कई बार प्रदीप को धमकियां भी मिली, लेकिन प्रदीप अपनी लिखने की शैली से डिगे नहीं और लेखन लगातार जारी रखा। आपको बताते चले कि प्रदीप को अपने समाचारों के लिए न्यूज रूम में झगड़ा करने के लिए भी जाना जाता है। उनके साथ काम करने वाले बताते हैं कि प्रदीप रावत अपनी खबरों के लिए लड़ पड़ते थे। हल्द्वानी में इंदिरा हृदयेश के वित्त मंत्री कार्यकाल के दौरान की घटना हर किसी की जुबां पर आज भी है। वित्त मंत्री इंदिरा हृदयेश ने उनके खिलाफ खबर लिखने के बाद बाकायदा दैनिक जागरण प्रबंधन को पत्र लिखा था कि प्रदीप रावत को मेरी किसी कार्यक्रम ना भेजा जाए। हालांकि दैनिक जागरण संपादकीय विभाग और प्रबंधन ने प्रदीप रावत (रवांल्टा) को पूरा सहयोग किया। ऐसा कम ही होता है जन कोई संस्थान किसी पत्रकार के साथ खड़ा हो यही बात है जो प्रदीप रावत को सबसे अलग बनाती है । यूथ आईकन नेशनल अवार्ड की टीम भी एक ऐसे ही पत्रकार की तलाश कर रही थी जो जनसरोकारो की बात करे और अपनी लेखनी के चलते जाना जाता हो । इन्ही प्रतिभाओ के चलते प्रदीप को नेशनल यूथ आईकन अवार्ड दिया जा रहा है 

 

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