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जामिया हिंसा/ 10 छात्रों से हुई पूछताछ; छात्रों ने दी सफाई- उनका जामिया में हुई हिंसा से कोई लेना-देना नहीं

संजीवनी टुडे 20-02-2020 22:33:47

जामिया हिंसा मामले की जांच कर रही क्राइम ब्रांच के एसआईटी ने गुरुवार को जामिया के 10 छात्रों से करीब 3 घंटे तक पूछताछ की। पुलिस ने इन्हें नोटिस देकर गुरुवार को जांच में शामिल होने के लिए कहा था। छात्रों


नई दिल्ली। जामिया हिंसा मामले की जांच कर रही क्राइम ब्रांच के एसआईटी ने गुरुवार को जामिया के 10 छात्रों से करीब 3 घंटे तक पूछताछ की। पुलिस ने इन्हें नोटिस देकर गुरुवार को जांच में शामिल होने के लिए कहा था। छात्रों ने पूछताछ के दौरान सफाई देते हुए कहा कि उनका जामिया में हुई हिंसा से कोई लेना-देना नहीं था। वह तो लाइब्रेरी में बैठ कर पढ़ रहे थे। बिना वजह पुलिस ने उन पर लाठियां भांज दीं। जामिया में जिस दिन हिंसा हुई थी उस दिन रविवार यानी अवकाश दिवस था। ऐसे में जामिया में छात्रों की मौजूदगी पर कई तरह के सवाल खड़े होते हैं। जिन्हें ध्यान में रखते हुए क्राइम ब्रांच की एसआईटी ने दोपहर 12:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक चली पूछताछ में कई तरह के सवाल जवाब किए। 

क्राइम ब्रांच के पुलिस सूत्रों के अनुसार, जिन 10 छात्रों को जांच में शामिल होने के लिए नोटिस दिया गया था। वह सभी हिंसा वाले दिन मौके पर मौजूद थे। इसीलिए पुलिस ने उनसे पूछा कि वह हिंसा वाले दिन वहां क्यों आए थे और क्या कर रहे थे। जब पुलिस टीम पर पथराव किया गया था तो क्या वह उसमें शामिल थे। इसके अलावा पुलिस ने उन्हें कुछ वीडियो क्लिप भी दिखाईं। जिसके बाद पुलिस ने छात्रों से वीडियो क्लिप में नजर आ रहे लोगों के बारे में पूछताछ की।  पुलिस ने उनसे जानना चाहा कि वीडियो में नजर आ रहे लोगों को क्या वे जानते हैं। क्या वे जामिया के रेगुलर छात्र हैं या फिर आउटसाइडर या पूर्व छात्र हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक छात्रों ने कुछ सवालों को छोड़कर अधिकांश सवालों के जवाब दिए हैं।

लंबी पूछताछ के बाद पुलिस ने उन्हें कहा कि उन्हें दोबारा भी पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। पुलिस के पास इन सभी छात्रों के मोबाइल नंबर भी मौजूद हैं। पुलिस सूत्रों की माने तो जामिया में हुए हिंसक प्रदर्शन के दौरान छात्रों के बीच बाहरी लोग भी आकर घुलमिल गए थे। जिन्होंने इस हिंसक प्रदर्शन की आग में घी डालने का काम किया। उन्होंने पुलिस से बचने के लिए जामिया परिसर में भी शरण ली थी। जब पुलिस इन पर काबू करने के लिए आगे बढ़ी तो यह भागकर जामिया परिसर में घुस गए थे। सूत्रों के मुताबिक जामिया के ही कुछ छात्र नेताओं ने इन्हें सलाह दी थी कि अगर पुलिस उन्हें पकड़ने आए तो वह जामिया परिसर में घुस जाएं क्योंकि पुलिस जामिया प्रशासन की अनुमति के बिना अंदर नहीं घुस सकती।

गौरतलब है कि जामिया हिंसा के 2 महीने बाद जामिया की लाइब्रेरी में छात्रों पर लाठीचार्ज का वीडियो वायरल कर इस मामले को फिर से हवा दे दी गई थी। हालांकि जामिया प्रशासन ने इन वीडियो को लीक करने में अपना हाथ होने से साफ इनकार कर दिया। फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है। वहीं छात्रों पर लाठियां बरसाने वाले सुरक्षा कर्मियों की भी पहचान की जा रही है। मामले में जांच के सिलसिले में ही क्राइम ब्रांच की एसआईटी ने बुधवार को जामिया के उन 10 छात्रों को नोटिस देकर जांच में शामिल होने के लिए कहा था जो हिंसक घटना के दौरान मौके पर मौजूद थे।

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