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मेलावलावु जनसंहार के 13 दोषियों की रिहाई पर सरकारी आदेश पेश करने का निर्देश

इनपुट- यूनीवार्ता

संजीवनी टुडे 18-11-2019 21:25:43

उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने सोमवार को तमिलनाडु सरकार को मेलावलावु जनसंहार मामले में 13 दोषियों की रिहाई से संबंधित सरकारी आदेश (जीओ) पेश करने का निर्देश दिया।


मदुरै। मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने सोमवार को तमिलनाडु सरकार को मेलावलावु जनसंहार मामले में 13 दोषियों की रिहाई से संबंधित सरकारी आदेश (जीओ) पेश करने का निर्देश दिया।

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न्यायमूर्ति एस.वैद्यनाथन और न्यायमूर्ति एन.आनंद वेंकटेश की खंडपीठ ने वकील पी. रत्नम की दोषियों की समय पूर्व रिहाई को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को 19 नवंबर को मामले में संबंधित दस्तावेज पेश करने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ता ने दोषियों की रिहाई के संबंध में राज्य को जीओ प्रस्तुत करने का निर्देश देने की भी अपील की थी।

अदालत ने दोषियों की रिहाई पर नाराजगी व्यक्त की और राज्य से सवाल किया कि जघन्य अपराध के लिए दोषी ठहराये गये 13 लोगों को कैसे रिहा किया गया। न्यायाधीशों ने संबंधित अधिकारी को मामले से संबंधित सभी दस्तावेजों के साथ अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया।

न्यायालय ने सवाल किया कि जिन दोषियों ने छह दलितों को मौत के घाट उतारा था और उन्हें उच्चतम न्यायालय समेत दो अदालतों ने दोषी करार दिया हो और उनकी सजा की पुष्टि की थी, उन्हें रिहा करने की क्या जल्दी थी? यदि उन्हें रिहा किया गया, तो गांव में अनुसूचित जाति और जनजाति समुदाय के लोगों के लिए सुरक्षा कहां है।

अदालत ने सवाल किया कि क्या वे (दोषी) समाज के लिए इतने महत्वपूर्ण हैं कि उन्हें रिहा करने की आवश्यकता है। उसने कहा, “एक सीमा है जिसके लिए आप एक सरकारी आदेश जारी कर कर सकते हैं। यहां तक कि धर्मपुरी बस जलाने के मामले में भी दोषियों को रिहा कर दिया गया था। मनुष्यों का जीवन किसी भी किस्म के ताल्लुकात से अधिक महत्वपूर्ण है।”

गौरतलब है कि इस मामले के सभी 13 दोषियों को हाल ही में एमजीआर शताब्दी समारोह से संबंधित एक कार्यक्रम में अच्छे आचरण का हवाला देते हुए रिहा किया गया था। उन्होंने स्थानीय निकाय के चुनाव में लड़ने के लिए 30 जून, 1997 को मेलावलावु पंचायत अध्यक्ष मुरुगेसन सहित छह दलितों की हत्या कर दी। उच्चतम न्यायालय ने 10 अक्टूबर 2009 को इन आरोपियों की सजा और उम्रकैद की पुष्टि की थी।

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