संजीवनी टुडे

भारत का पहला कछुओ का उपचार केंद्र पालघर में 2011 में किया था शुरू

संजीवनी टुडे 03-08-2020 00:37:00

पालघर जिले के तटीय क्षेत्रों में बड़ी संख्या में कछुए जख्मी अवस्था मे पाए जाते हैं। जिनके उपचार के लिए 2011 में डहाणू में वनविभाग की देखरेख में एक कछुओं के उपचार केंद्र की स्थापना की गई थी।


मुंबई। पालघर जिले के तटीय क्षेत्रों में बड़ी संख्या में कछुए जख्मी अवस्था मे पाए जाते हैं। जिनके उपचार के लिए 2011 में डहाणू में वनविभाग की देखरेख में एक कछुओं के उपचार केंद्र की स्थापना की गई थी। विनविभाग के अधिकारियों के अनुसार यह भारत का कछुओं का पहला उपचार केंद्र है। इस उपचार केंद्र में करीब 37 जख्मी हुए कछुओं का उपचार जारी है। और अब तक करीब 800 कछुओं का उपचार करने के बाद उन्हें सुरक्षित समुंदर मे छोड़ दिया गया है। समुंदर के कारण यह क्षेत्र कछुओं के लिये आदर्श प्रजनन क्षेत्र है। यहां के तटीय क्षेत्रों में पाए जाने वाले कछुए आकार में काफी बड़े होते हैं। और लगभग 15 किलोग्राम तक के यहां कछुए पाए जाते हैं। लेकिन कई कारणों से कछुए अक्सर जख्मी हो जाते है। जिन्हें डहाणू के वनविभाग के इस उपचार केंद्र में लाया जाता है। और उन्हें अनुभवी डॉक्टरों की देखरेख में एक नई जिंदगी दी जाती है। कछुओं के इस उपचार केंद्र में कई पानी की टंकियां बनाई गई हैं। प्रत्येक टंकी समुचित रूप से चौड़ी और गहरी है। इसमें हर समय खारे पानी की व्यवस्था रहती है। जख्मी हुए कछुओं को उपचार केंद्र पहुँचाने वाले या उनका जीवन बचाने वाले लोगो को प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है।

कछुओं के जीवन पर बढ़ा खतरा
लोगों में सदा जवान रहने की चाहत का फायदा उठाते हुए तस्करों ने कछुआ की तस्करी करना शुरू कर दिया है। बांग्लादेश, म्यांमार सहित भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में हजारों लोग यह मानते हैं कि कछुआ के मांस से बनी शक्तिवर्धक दवाएं बहुत असरकारी होती है। ट्रैफिक इंडिया द्वारा किये गए एक अध्ययन के अनुसार, भारत में हर वर्ष लगभग 11,000 कछुओं की तस्करी की जा रही है। ध्यातव्य है कि पिछले 10 वर्षों में 110,000 कछुओं का कारोबार किया गया है। भारतीय वन्यजीव संस्थान की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, बांधों और बैराज, प्रदूषण, अवैध शिकार, मछली पकड़ने के जाल में फँसने, उनके घोंसले नष्ट होने के खतरों तथा आवास के विखंडन और नुकसान के कारण कछुओं के जीवन पर खतरा बना रहता है। कछुओं का जलीय पारिस्थितिक तंत्र में योगदान कछुए नदी से मृत कार्बनिक पदार्थों एवं रोगग्रस्त मछलियों की सफाई करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कछुए जलीय पारितंत्र में शिकारी मछलियों तथा जलीय पादपों एवं खरपतवारों की मात्रा को नियंत्रित करने में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन्हें स्वस्थ जलीय पारिस्थितिकी प्रणालियों के संकेतक के रूप में भी वर्णित किया जाता है। 

जख्मी हुए या बीमार कछुओं को स्वस्थ होने तक उपचार केंद्र में रखा जाता है। डॉक्टर इन कछुओं की देखभाल करते है। स्वस्थ होने के बाद कछुओं को उनके अधिवास में छोड़ दिया जाता है।

यह खबर भी पढ़े: OBC आरक्षण पर तेज हुई सियासत, CM शिवराज ने कमलनाथ के पत्र का दिया करारा जवाब

यह खबर भी पढ़े: राजस्थान में सियासी गर्मी के बीच जैसलमेर की तपिश विधायकों में बढ़ा रही घबराहट

ऐसी ही ताजा खबरों व अपडेट के लिए डाउनलोड करे संजीवनी टुडे एप

More From national

Trending Now
Recommended