संजीवनी टुडे

भारत-नीदरलैंड कृषि, जल प्रबंधन, स्वास्थ्य में बढ़ायेंगे प्रौद्योगिकी सहयोग

संजीवनी टुडे 15-10-2019 14:55:31

भारत और नीदरलैंड के बीच विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में सहयोग बढ़ाने के लिए दो दिवसीय प्रौद्योगिकी सम्मेलन मंगलवार से राष्ट्रीय राजधानी में शुरू हुआ जिसमें कृषि, जल प्रबंधन एवं स्वास्थ्य मुख्य बिंदु हैं।


नई दिल्ली। भारत और नीदरलैंड के बीच विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में सहयोग बढ़ाने के लिए दो दिवसीय प्रौद्योगिकी सम्मेलन मंगलवार से राष्ट्रीय राजधानी में शुरू हुआ जिसमें कृषि, जल प्रबंधन एवं स्वास्थ्य मुख्य बिंदु हैं।

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नीदरलैंड के राजा विलेम-एलेक्जेंडर ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा भारतीय उद्योग परिसंघ द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित सम्मेलन के उद्घाटन के मौके पर विज्ञान के क्षेत्र में तेजी से विकास के लिए भारत की तारीफ करते हुये कहा कि वह ऊर्जा से भरपूर है तथा सूचना प्रौद्योगिकी और अनुसंधान के क्षेत्र में वह दुनिया का नेतृत्व करने वाले अग्रणी देशों में शामिल हो चुका है। 

उन्होंने कहा कि नवाचार साथ मिलकर सृजन का नाम है, नवाचार सामाजिक मसलों के समाधान के लिए अंतर्राष्ट्रीय ज्ञान और विशेषज्ञता को साथ लाने का नाम है तथा नीदरलैंड भारत के साथ दीर्घकालीन सहयोग में निवेश करना चाहता है।

नीदरलैंड की रानी क्वीन मैक्सिमा और केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्षवर्द्धन की उपस्थिति में श्री एलेक्जेंडर ने कहा कि नीदरलैंड में कई भारतीय वैज्ञानिक, आईटी पेशेवर और नवोद्यमी काम करते हैं तथा कई छात्र वहाँ अध्ययन कर रहे हैं। भारत ने दिखाया है कि नवाचार किफायती भी हो सकता है। उन्होंने स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत द्वारा विकसित किफायती नवाचारों की तारीफ की।

नीदरलैंड के राजा ने कहा कि कृषि, जल प्रबंधन एवं जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में यूरोपीय देश के पास काफी ज्ञान है। उसके पास पंजाब से भी कम जमीन है इसके बावजूद वह दुनिया का दूसरा बड़ा कृषि उत्पाद निर्यातक है। उन्होंने कहा कि पानी नीदरलैंड के डीएनए में है और जल प्रबंधन के बिना उसका अस्तित्व ही संभव नहीं है। एलेक्जेंडर ने कहा कि भारत और नीदरलैंड एक-दूसरे के पूरक हैं तथा दोनों में एक-दूसरे को और मजबूत बनाने की क्षमता है।

डॉ. हर्षवर्द्धन ने कहा कि भारत और नीदरलैंड के बीच राजनयिक संबंध भले 72 साल पुराना हो, हमारी दोस्ती चार सौ साल पुरानी है। गरीबी उन्मूलन, भूखमरी समाप्त करने, रोजगार सृजन, आतंकवाद के खात्मे और मानवाधिकार के संरक्षण के लिए हमें आपसी सहयोग बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जल प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा तथा किफायती स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावना है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि खेतीबाड़ी के बारे में भारतीय ज्ञान तथा जल प्रबंधन के बारे में नीदरलैंड का ज्ञान मिलकर खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और किसानों की आमदनी दुगुनी करने में मददगार हो सकते हैं। उन्होंने सम्मेलन में शामिल हो रही दोनों देशों की कंपनियों से स्टार्टअप को समर्थन देने की अपील की।

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