संजीवनी टुडे

अमेरिकी चुनाव में भारतीय और पाकिस्तानी भी खास

अरविंद कुमार शर्मा

संजीवनी टुडे 26-10-2020 17:26:51

अमेरिकी राष्ट्रपति का चुनाव यूं तो पूरी दुनिया में खास चर्चा का कारण होता है किंतु भारत और पाकिस्तान में इस चुनाव पर कुछ अधिक ही नजरें रहती हैं।


अमेरिकी राष्ट्रपति का चुनाव यूं तो पूरी दुनिया में खास चर्चा का कारण होता है किंतु भारत और पाकिस्तान में इस चुनाव पर कुछ अधिक ही नजरें रहती हैं। इसबार तो राष्ट्रपति पद के डेमोक्रेट प्रत्याशी जो बाइडन के साथ उप राष्ट्रपति की उम्मीदवार कमला हैरिस के चलते भी यह आकर्षण ज्यादा है।

भारतीय मां और जमैकाई पिता की संतान कमला हैरिस लॉ स्कूल से ग्रैजुएट हैं। उन्होंने सैन फ्रांसिस्को की सिटी अटॉर्नी (अधिवक्ता) के तौर पर काम किया है। बड़ी उपलब्धि यह है कि वह कैलिफोर्निया की अटॉर्नी जनरल भी रहीं। अमेरिकी कांग्रेस की सिनेट में एक मुखर अश्वेत नेता के रूप में उनकी पहचान है। कंजर्वेटिव पार्टी कमला की इस ताकत को पहचानती है, तभी उनके 'ब्लैक' पर सवाल करती है। इस पार्टी का कहना है कि कमला न तो काली हैं और न ही अफ्रीकी मूल की हैं।

वास्तव में अमेरिका में अफ्रीकी मूल के लोगों की संख्या बहुत अधिक है। कमला हैरिस अपने राष्ट्रपति उम्मीदवार जो बाइन के साथ उप राष्ट्रपति चुन ली गईं तो 2024 के चुनाव में राष्ट्र प्रमुख के पद पर दावेदारी कर सकती हैं। अमेरिका में अश्वेत मतदाताओं की संख्या करीब 13 प्रतिशत बताई जाती है। बहरहाल, कमला की उपलब्धियां और भी हैं, हम बात कर रहे हैं अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में भारतीय और पाकिस्तानी लोगों की रुचि की।

भारत के साथ रिश्तों पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप की मिलीजुली प्रतिक्रिया रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अमेरिकी दौरा और राष्ट्रपति ट्रंप का भारत आना इस नजरिए से भी देखे गए कि दोनों देशों में चुनाव की दृष्टि से ही ऐसे रणनीतिक कार्यक्रम किये गए। फिर भी यह तो हुआ कि इन आयोजनों से अमेरिका में बसे भारतीयों की उम्मीदें बढ़ीं। ट्रंप ने भी इसी तरह के संकेत दिए। फिर जल्द ही अन्य विदेशियों के साथ भारतीय नागरिकों के भी अमेरिका में निवास और नौकरियों को नियंत्रित करने के उपायों से इसपर नैराश्य के भाव तैरने लगे थे। भारतीयों को लेकर कंजरवेटिव, खासकर कमला हैरिस का रुख भी कम चिंता का कारण नहीं रहा।

पिछले साल के सितंबर में ह्यूस्टन में एक आयोजन के दौरान कमला ने यहां तक कह दिया था कि हम कश्मीर के लोगों को यह बताना चाहते हैं कि वो अकेले नहीं हैं। हम हालात पर नजर बनाए हुए हैं। तब कश्मीर के कुछ हिस्सों में इंटरनेट पर प्रतिबंध लगाए गये थे। भारत में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) पर भी उन्होंने सभी के लिए समान मानवाधिकार की बात कही थी। कमला की पार्टी को जल्द इस तरह के बयानों पर सावधान होना पड़ा। अभी इस साल अगस्त में राष्ट्रपति उम्मीदवार जो बाइडन ने भारतीय और पाकिस्तानी नागरिकों के लिए वर्चुअल प्रोग्राम किए।

ट्रंप खेमा भी भारतीयों के मामले में अति सावधानी से काम कर रहा है। ट्रंप विक्ट्री इंडियन अमरीकन फाइनेंस कमेटी का दावा है कि बाइडन के मुकाबले आधे से अधिक भारतीय ट्रंप की ओर जा सकते हैं। ट्रंप के भारतीय समर्थक समझते हैं कि चीन पर दबाव बनाने के लिए अमेरिका को भारत की जरूरत हमेशा रहेगी। कोरोना के दौरान बाहरी लोगों के बारे में ट्रंप प्रशासन की नीति से नाराज भारतीय अब समय की नजाकत को समझने लगे हैं। एक बात और है कि दुनिया के मुस्लिम देशों के प्रति राष्ट्रपति ट्रंप की सख्त नीति से अमेरिका में हिंदू भारतीय राष्ट्रपति ट्रंप की ओर झुके नजर आते हैं।

मुस्लिम देशों की चर्चा में पाकिस्तान का जिक्र होना स्वाभाविक है। अमेरिका में पाकिस्तानी नागरिकों के बीच कमला हैरिस का भारतीय मूल से जुड़ा होना चर्चा का विषय है। इस आधार पर तो पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी कंजरवेटिव जो बाइडन के भी खिलाफ हो सकते हैं। हालांकि इस मामले में भ्रम की ही स्थिति है। कुछ लोग राष्ट्रपति ट्रंप की मुस्लिम विरोधी छवि से भी नाराज हैं। वे ट्रंप को कश्मीर के मसले पर भी देखना चाहते हैं। अमेरिका में करीब 10 लाख पाकिस्तानी अमेरिकी नागरिक हैं। आम धारणा यही रही तो अधिकतर पाकिस्तानी अमेरिकी डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बाइडेन और कमला हैरिस को वोट दे सकते हैं।

कुछ अमेरिकी पाकिस्तानी राष्ट्रपति चुनाव को भारत-पाकिस्तान के बीच कश्मीर मसला और फिलिस्तीन के आधार पर नहीं देखना चाहते। वे ट्रंप को अमेरिकी अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय सम्बंधों के मामले में ट्रंप को बेहतर राष्ट्रपति मानते हैं। जो भी हो, एक बात तय है कि अमेरिका में कुल मतदाताओं के करीब 13 प्रतिशत अश्वेत निर्णायक भूमिका अदा कर सकते हैं। इनमें लगभग 13 लाख भारतीय और 10 लाख पाकिस्तानी मूल के वोटर्स भी हैं।


(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)

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