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LAC पर सेना की ताकत बढ़ाने में जुटा भारत, अमेरिका से खरीदेंगे मिसाइल और लेजर गाइडेड बम से लैस ड्रोन!

संजीवनी टुडे 06-07-2020 08:11:32

भारत ने कम ऊंचाई पर अधिक देर तक उड़ान भरने वाले अमेरिकी सशस्त्र प्रीडेटर-बी ड्रोन खरीदने में रुचि दिखाई है।


नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच हाल ही में हुए सीमा पर तनाव ने भारतीय सेना को चेतावनी दी है। यूं तो हमारी सेना कमजोर नहीं लेकिन चीन की ताकत भारत से कहीं ज्यादा है यह बात भी किसी से छिपी नहीं हैं। चीन से मुकाबला करने के लिए हमें अपनी सेना को ज्यादा मजबूत और आधुनिक बनाने की जरूरत है। इसके लिए भारत ने कई कदम उठाए हैं जिसमें अमेरिका से मिसाइल और लेजर गाइडेड बम से लैस ड्रोन खरीदने की तैयारी चर्चा में है। 

भारत ने कम ऊंचाई पर अधिक देर तक उड़ान भरने वाले अमेरिकी सशस्त्र प्रीडेटर-बी ड्रोन खरीदने में रुचि दिखाई है। यह ड्रोन ना सिर्फ खुफिया जानकारी इक्ट्ठा करता है, बल्कि लक्ष्य का पता लगाकर उसे मिसाइल और लेजर गाइडेड बम से नष्ट कर देता है। फिलहाल भारत पूर्वी लद्दाख में इज़राइली हेरोन ड्रोन का इस्तेमामल करता है, जो कि निहत्था है। 

laser guided bomb

हाल ही में अमेरिका ने चार अरब डॉलर से अधिक के 30 सी गार्डियन बेचने की पेशकश की है। वहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा योजनाकारों को लगता है कि सर्विलांस और टारगेट पर हमला के लिए एक ही ड्रोन हो न कि अलग-अलग। भले ही भारतीय नौसेना अमेरिका के साथ बातचीत में मुख्य भूमिका निभा रही है, लेकिन भारतीय सेना प्रिडेटर-बी के पक्ष में है।

हालांकि अमेरिका भारत की उच्च तकनीकी हथियारों की आपूर्ति के लिए तैयार है, लेकिन साथ ही साथ भारत के द्वारा एस-400 मिसाइल सिस्टम रूस से खरीदने से नाखुश भी है। उसे डर है कि सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली भारत मास्को तक पहुंचा सकता है। चीन ने पहले ही रूस से एस-400 प्रणाली का अधिग्रहण कर लिया है और वर्तमान में इसे अरुणाचल प्रदेश में तैनात किया है।

laser guided bomb

इसके अलावा भारत द्वारा इजरायल से स्पाइस 2000 (SPICE 2000) बम की खरीद भी चर्चा में है। यह वही बम है जिसका उपयोग बालाकोट स्ट्राइक में भारतीय वायुसेना ने भारत और पाकिस्तान के बीच लाइन ऑफ कंट्रोल के 60 किलोमीटर आगे की दूरी के लिए इस्तेमाल किया था। वायुसेना को ये स्पाइस 2000 बम बड़ी ताकत देने वाले माने जा रहे हैं। ये हवा से जमीन पर काफी दूरी से मार कर सकते हैं और ये बंकर और इमारतें उड़ाने में सक्षम हैं। 

laser guided bomb

लेजर गाइडेड बम से क्यों है बेहतर
स्पाइस 2000 की तुलना अक्सर लेजर गाइडेड बम से होती है जो स्पाइस से सस्ते होते हैं और सटीक भी होते हैं। लेकिन इनके साथ सबसे बड़ी समस्या ये होती है कि ये खराब मौसम में सही तरीके से काम नहीं कर पाते हैं। इसके अलावा लेजर बम की मारक दूरी केवल 15 किमी ही होती है। वहीं स्पाइस परिवार के स्मार्ट बम  सुरक्षित हवाई इलाकों में भी मार कर सकते हैं। चीन का हवाई डिफेंस सिस्टम बहुत ही तगड़ा माना जाता है। उसके पास रूस के एस300 और एस 400 श्रेणी के सिस्टम हैं। 

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