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भारत ने ड्रोन को मार गिराने के लिए विकसित की नई तकनीक, अब पाकिस्तान की चाल होगी नाकाम

संजीवनी टुडे 29-11-2020 22:30:39

पाकिस्तान इन दिनों अपने आतंकवादियों को हथियार और गोला-बारूद भेजने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है।


नई दिल्ली। पाकिस्तान इन दिनों अपने आतंकवादियों को हथियार और गोला-बारूद भेजने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है। सीमा पार से आने वाले इन ड्रोन को जम्मू-कश्मीर से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सेना और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवान गोलियों से निशाना बनाकर मार गिरा रहे हैं लेकिन अब भारत ने ड्रोन को मार गिराने के लिए नई तकनीक विकसित कर ली है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने सशस्त्र बलों के लिए ड्रोन प्रणाली के विकास और उत्पादन के लिए भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) को अग्रणी एजेंसी के रूप में नामित किया है।

​​सीमा पार से हथियार ही नहीं मादक पदार्थों की तस्करी के लिए भी 'मेड इन चाइना' ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। पाकिस्तान के आतंकी समूहों ने सीमावर्ती राज्य पंजाब में उग्रवाद को पुनर्जीवित करने के लिए हथियारों और ड्रग्स पहुंचाने के लिए ड्रोन सॉर्ट लॉन्च किए हैं। व्यावसायिक रूप से उपलब्ध चीनी ड्रोन 10 किलोग्राम तक के हथियार और ड्रग पेलोड ले जा सकते हैं।  जम्मू जिले की अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) से सटे अरनिया क्षेत्र में बीती रात करीब नौ बजे भी बीएसएफ के जवानों ने पाकिस्तानी ड्रोन को देखा। बीएसएफ के जवानों ने ड्रोन पर गोलियां चलाईं जिसके बाद ड्रोन वापस पाकिस्तानी सीमा की ओर लौट गया। जवानों ने भारतीय क्षेत्र में हथियार व गोला बारूद गिराए जाने की आशंका के चलते रविवार सुबह भी क्षेत्र में तलाशी अभियान चलाया। 

दरअसल 2020 की शुरुआत से ही ड्रोन का खतरा बना हुआ है। पाकिस्तान से भेजे जा रहे ड्रोन भारतीय क्षेत्र में हथियार व गोला बारूद गिरा रहे हैं। सीमांत क्षेत्रों में इससे पहले भी कई बार पाकिस्तानी ड्रोन देखे गए हैं। 20 नवम्बर को भी सांबा सेक्टर में बीएसएफ के जवानों ने पाकिस्तानी ड्रोन को सीमा के नजदीक उड़ते देखा था। गत 20 जून को बीएसएफ के जवानों ने हीरानगर सेक्टर में पाकिस्तान से हथियार लेकर आ रहे एक पाकिस्तानी ड्रोन को मार गिराया था। सीमा पर तैनात सेना और बीएसएफ के जवान अब ड्रोन को मार गिराने के लिए गोलियां चला रहे हैं लेकिन अब डीआरडीओ ने हथियारों और ड्रग्स से लैस सीमा पार से आने वाले चीन निर्मित ड्रोनों को निष्क्रिय करने या मार गिराने के लिए एंटी-ड्रोन तकनीक सफलतापूर्वक विकसित कर ली है। 

समझा जाता है कि डीआरडीओ प्रमुख सतीश रेड्डी जल्द ही भारतीय सशस्त्र बलों को पत्र लिखकर स्वदेशी ड्रोन प्रणाली के उत्पादन के बारे में बताएंगे। ड्रोन को अपने नियंत्रण में लेने के लिए रडार की रेंज दो से तीन किलोमीटर तक है और फिर ड्रोन या मानव रहित हवाई वाहन को जाम करने के लिए आवृत्तियों का उपयोग किया जाता है। विकसित तकनीक के जरिये ड्रोन को रडार के माध्यम से स्पॉट करने के बाद लेजर बीम से लक्षित करके निष्क्रिय या मार गिराया जा सकता है। डीआरडीओ की विकसित प्रणाली भारतीय निजी क्षेत्र सुरक्षा एजेंसियों के साथ-साथ समवर्ती ड्रोन प्रणाली विकसित करने में सक्षम है। इस प्रणाली का नियंत्रण रेखा पर परीक्षण किया गया है और किसी भी हवाई खतरे को सफलतापूर्वक नष्ट करने में सक्षम है। डीआरडीओ ने सशस्त्र बलों के लिए ड्रोन प्रणाली के विकास और उत्पादन के लिए भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड को अग्रणी एजेंसी के रूप में नामित किया है।

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