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पूर्व डिप्टी CM परमेश्वर के ठिकाने पर आयकर छापेमारी, निजी सहायक ने की खुदकुशी

इनपुट- यूनीवार्ता

संजीवनी टुडे 12-10-2019 20:51:47

आयकर विभाग की छापेमारी ने शनिवार को तब एक नया मोड़ ले लिया जब इस ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं कर्नाटक के पूर्व उप मुख्यमंत्री जी परमेश्वर के निजी सहायक रमेश ने सुबह यहां आत्महत्या कर ली।


बेंगलुरु। सिद्धार्थ शिक्षा ट्रस्ट के अधीन शैक्षणिक संस्थानों पर पिछले तीन दिनों से जारी आयकर विभाग की छापेमारी ने शनिवार को तब एक नया मोड़ ले लिया जब इस ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं कर्नाटक के पूर्व उप मुख्यमंत्री जी परमेश्वर के निजी सहायक रमेश ने सुबह यहां आत्महत्या कर ली।

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पुलिस ने बताया कि आयकर विभाग की ओर से परमेश्वर के विभिन्न ठिकानों तथा उनके घर पर छापेमारी के बाद रमेश जनभारती परिसर के एक पेड़ पर फंदा लगाकर झूल गया जिससे उसकी मौत हो गयी। पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

कांग्रेस नेता परमेश्वर ने अपने निवास पर यहां संवाददाताओं से कहा कि वह मंगलवार को आयकर विभाग के अधिकारियों के समक्ष पेश होंगे तथा ट्रस्ट के अधीन संचालित शैक्षणिक संस्थानों पर हुई छापेमारी के संबंध में आवश्यक दस्तावेज पेश करेंगे। उन्होंने कहा, “आयकर विभाग ने छापेमारियां की हैं और मुझे मंगलवार को बुलाया है। मैं सभी दस्तावेज उन्हें दूंगा अौर उनके सारे सवालों का जवाब दूंगा।”

आयकर छापेमारी के दौरान 400 करोड़ रुपये की नगदी बरामद होने संबंधी खबरों पर परमेश्वर ने कहा कि ये सब आधारहीन रिपोर्ट हैं और वह मीडिया से अपील करते हैं कि ऐसे मसलों पर रिपोर्ट प्रकाशित करने से पहले उसकी पुष्टि कर लिया करें।”

उन्होंने कहा कि आईटी अधिकारियों ने उनके घर सहित विभिन्न ठिकानों पर छापे के दौरान मिले दस्तावेजों की पड़ताल की है और उनका अध्ययन किया है। बाद में उन्होंने कुछ सवाल पूछे जिनका जवाब दिया गया।

परमेश्वर ने स्पष्ट किया कि मेडिकल सीट का आवंटन नीट परीक्षा के माध्यम से किया गया था। उन्होंने कहा,“ चूंकि मैं पूरी तरह से राजनीति में शामिल हूं, इसलिए मैं कॉलेज के कामकाज में खुद को शामिल नहीं कर सका। मैं हालांकि पिछले 30 वर्षों से ट्रस्ट का सदस्य हूं। मेरे भाई की मृत्यु के बाद मुझ पर अधिक जिम्मेदारी है। चूंकि मेरे भाई का बेटा आनंद नामांकन और अन्य मामलों की देखरेख कर रहा है इसलिए मुझे इसके बारे में जानकारी नहीं है। आवश्यक सभी दस्तावेज जमा किए गए हैं और मंगलवार को और अधिक स्पष्टीकरण दिया जाएगा।”

एक सवाल के जवाब में  परमेश्वर ने कहा, “मैं छापे को राजनीतिक रंग नहीं देना चाहता। अधिकारियों ने कहा है कि वे कुछ छात्रों से प्राप्त शिकायतों के आधार पर छापेमारी कर रहे हैं। चूंकि मैं पूरी तरह से राजनीति में शामिल था, इसलिए मैं कॉलेज बोर्ड की कार्यप्रणाली पर ध्यान नहीं दे सका। हालांकि, मंगलवार को मैं करूंगा।”

इस बीच, आयकर अधिकारियों ने सिद्धार्थ मेडिकल कॉलेज, अस्पताल सहित ट्रस्ट द्वारा संचालित संस्थानों पर तीसरे दिन भी अपनी छापेमारी जारी रखी। अधिकारियों ने शनिवार को अस्पताल परिसर स्थित परमेश्वर के कार्यालय की तलाशी ली।

प्रत्यक्ष कर विभाग की ओर से शुक्रवार को दिल्ली में जारी विज्ञप्ति के अनुसार अघोषित संपत्ति से संबंधित 100 करोड़ रुपये से अधिक के दस्तावेज जब्त किए गए हैं।

इस बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दिनेश गुंडुराव ने परमेश्वर के निवास पर जाकर उनसे मुलाकात की। श्री परमेश्वर के कार्यालय और अस्पताल में छापेमारी के दौरान यहां मौजूद नहीं थे। बाद में उन्होंने संवाददाताओं से कहा,“हम आयकर अधिकारियों के छापेमारी से नहीं घबराते। हम इसका सामना करेंगे।”

इससे पहले परमेश्वर और कांग्रेस के पूर्व सांसद आर. एल. जलप्पा के पुत्र जे राजेद्र के दो शैक्षणिक ठिकानों पर आयकर विभाग ने गुरुवार को छापेमारी शुरू की थी। आयकर विभाग ने कर्नाटक के तुमारकुरु तथा डोड्डाबल्लापुर में यह कार्रवाई राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा (नीट) से संबंधित मेडिकल कोर्सेज में दाखिले के दौरान कथित तौर पर करोड़ों रुपये की कर चोरी को लेकर की है।

परमेश्वर के पिता एच. एम. गंगाधरैया ने 58 वर्ष पूर्व सिद्धार्थ ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स की स्थापना की थी। आयकर विभाग के 250 से अधिक अधिकारियों ने डोड्डाबल्लापुर तथा कोलार में परमेश्वर के भाग जी शिवप्रस्दा तथा उनके सहायक एवं आर. एल. जलप्पा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के संचालक रमेश के ठिकानों पर भी छापे मारे।

आयकर विभाग ने 30 ठिकानों पर छापे मारे हैं और कर्नाटक तथा राजस्थान के भी कुछ ठिकानों पर छापेमारी की गयी।

नीट की परीक्षा में कथित तौर पर दूसरे छात्र के स्थान पर परीक्षा देने को लेकर मामला दर्ज किया गया है। उनके विरुद्ध आरोप है कि छात्रों ने इसके लिए कथित तौर पर गैर कानूनी तरीके से राशि का भुगतान किया था। आयकर अधिकारी राजस्थान में उन छात्रों का पता लगाने के लिए की कोशिश कर रहे हैं, जिन्होंने असली छात्र की जगह परीक्षा दी थी।

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