संजीवनी टुडे

जम्मू में कर्फ्यू के दौरान स्थिति नियंत्रण में, मोबाइल इंटरनेट सेवा स्थगित

संजीवनी टुडे 17-02-2019 20:04:31


जम्मू। पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर गुरुवार को हुए आत्मघाती हमले के बाद शुक्रवार से जम्मू में जारी कर्फ्यू में रविवार को भी कोई ढील नहीं दी गई। मौजूदा हालात के मद्देनजर कर्फ्यू सोमवार को जारी रह सकता है। प्रशासन ने रिव्यू मीटिंग के बाद भी कर्फ्यू में कोई ढील नहीं देने का निर्णय किया है। इस बीच राज्य में मोबाइल इंटरनेट सेवा को गुरुवार रात से ही निलंबित रखा गया है। फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में है। कर्फ्यू के बीच आज रविवार होने के चलते जहां एक ओर सभी दुकानें, व्यापारिक प्रतिष्ठान, स्कूल, कालेज व निजी कार्यालय बंद हैं वहीं आम जनता को अपने घरों में ही कैद रहने को मजबूर होना पड़ा। रोजमर्रा की जरूरतों के लिए परेशानी झेलनी पड़ रही है। जगह-जगह पुलिस व सेना को लगाया गया है और मार्गों को कंटीली तारों से सीज किया गया है। केवल कर्फ्यू पास धारकों को ही आने-जाने की इजाजत दी जा रही है। 

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कर्फ्यू के चलते जहां एक ओर लोगों को रोजमर्रा की जरूरी चीजों से वंचित होना पड़ रहा है वहीं शादी, विवाह, बीमार व अन्य जरूरी कामों पर जाने वालों को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। सोमवार को भारत बंद व कर्फ्यू बढ़ जाने से जम्मू के लोगों की मुश्किलें और बढ़ेंगी। उल्लेखनीय है कि जम्मू बंद के बाद लगाए गए कर्फ्यू के दूसरे दिन शनिवार को जानीपुर क्षेत्र में प्रदर्शनकारियों व सरकारी क्वार्टरों में रहने वाले लोगों के बीच हुए पथराव के बाद स्थिति और ज्यादा तनावपूर्ण बनी हुई है। पुलिस ने लगभग 35 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया था। इसके अलावा न्यू प्लाट, गंग्याल व अन्य कई क्षेत्रों में प्रदर्शन को देखते हुए कर्फ्यू में कोई ढील नहीं दी गई है। उमर अब्दुल्ला और महबूबा का ट्वीट उधर, जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने रविवार को कहा कि राज्य के बाहर कश्मीरियों पर हमला करने से वे भारत से अलग-थलग होंगे। 

उमर ने कई ट्वीट करते हुए राज्य के बाहर रहने वाले और पढ़ाई करने वाले कश्मीरियों की सुरक्षा का भी आग्रह किया। पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने एक ट्वीट में राज्य के बाहर कश्मीरी छात्रों को परेशान किये जाने की निंदा की। अलगाववादी 5 नेताओं की सुरक्षा हटाई उधर, राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए रविवार को पांच अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा हटा ली है। इसके साथ इनकी सुरक्षा हटाने की जो मांग देश के विभिन्न हिस्सों से उठ रही थी, वह भी पूरी हो गई। श्री सनातन धर्म सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों ने इसका स्वागत किया है। राज्य सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर यह कठोर कदम उठाया है। जिन हुर्रियत और अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा वापस ली है उनमें हुर्रियत कांफ्रेंस (एम) के चेयरमैन मीरवाइज उमर फारूक, अब्दुल गनी बट्ट, बिलाल लोन, हाशिम कुरैशी और शब्बीर शाह के नाम शामिल हैं।

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अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा पर सरकार हर साल करोड़ों रुपये खर्च करती है और इनकी सुरक्षा वापस लेने की लोगों द्वारा कई मौकों पर मांग की जाती रही है। इसके अलावा राज्य विधानसभा में भी इनकी सुरक्षा पर होने वाले खर्च को लेकर सवाल उठते रहे हैं। 4500 वाहन जम्मू रवाना जवाहर टनल के उस ओर करीब दो सप्ताह से फंसे 4500 से अधिक वाहनों को रविवार सुबह जम्मू के लिए रवाना किया गया। श्रीनगर-जम्मू राजमार्ग पर केवल एकतरफा यातायात ही जारी रहेगा। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि विपरीत दिशा से सुरक्षा बलों के काफिले के साथ किसी भी वाहन को जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। आवश्यक वस्तुओं से लदे ट्रकों, तेल के टैंकरों, यात्री वाहनों के अलावा तीन दिनों तक फंसे हुए हजारों की संख्या में वाहनों को जम्मू से श्रीनगर जाने के लिए अनुमति देने के बाद रविवार को श्रीनगर से जम्मू के लिए वाहनों को जाने की अनुमति दी गई। जवाहर टनल के उस पार काजीगुंड और अन्य स्थानों पर फंसे हुए फलों से लदे ट्रकों सहित 4500 से अधिक वाहनों को लगभग दो सप्ताह के बाद जम्मू की ओर जाने दिया गया। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया और बीकन के अधिकारी जल्द से जल्द राजमार्ग पर यातायात बहाल करने के लिए काम कर रहे हैं। रामबन और रामसू क्षेत्र में भूस्खलन और रुक-रुक कर पत्थर गिरने से यातायात बाधित हो रहा है।

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