संजीवनी टुडे

100 से 2000 तक नोट में अगर दिखें ये निशान, तो हो जाए सावधान

संजीवनी टुडे 20-01-2018 17:07:56

If you see these marks from 100 to 2000 then be careful

नई दिल्ली। रिजेक्ट नोटों के सीरियल नंबर और वाटर मार्क वाली जगह पर बारीक छेद करने के साथ वैक्स इंक से क्रॉस के निशान लगाए जाते थे। अगर ऐसे नोट में लगा दिखे ये निशान तो हो जाएं सावधान, ऐसा करने के पीछे ये है कारण। जाने पूरी खबर।

पहले से बंद रिजेक्ट नोट में छेद करने की व्यवस्था थी। जानकारी अनुसार रिजेक्ट नोटों के सीरियल नंबर और वाटर मार्क वाली जगह पर बारीक छेद करने के साथ वैक्स इंक से क्रॉस के निशान लगाए जाते थे, वहीं जो नोट जब्त किए गए हैं उन पर वैक्स इंक के निशान भी नहीं हैं। बैंक नोट प्रेस के कंपनी बनने के बाद खर्चों में कटौती का हवाला देकर नोटों की जांच से जुड़ी कई प्रक्रियाएं बंद की गई हैं। 

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इसमें सबसे घातक निर्णय रिजेक्ट नोट के सीरियल नंबर और वाटर मार्क में छोटे-छोटे छेद करने की प्रक्रिया बंद करने का रहा। इसके पीछे उद्देश्य यह था कि यह नोट बाजार में नहीं चल सके। इसके अलावा इन रिजेक्ट नोटों के वाटर मार्क के ऊपर लाल या नीले कलर की वैक्स इंक से निशान लगाए जाते हैं। निशान लगाने का नियम अभी भी है। रिजेक्ट शीट और नोट को कंट्रोल ऑफिसर के पास जमा करा दिए जाते हैं और उनसे बिना नंबर वाली नोटों की छपी शीट लेकर उन पर नंबरिंग कर 100 के नोटों की गड्डी पूरी की जाती है।

रिजेक्ट नोट पकड़ने वाला डिडेक्टर भी आउटडेटेड
छपाई में कई बार एक ही नोट पर दो सीरियल नंबर छप जाते हैं, उन्हें पकड़ने के लिए डिटेक्टर भी लगे हैं, लेकिन ये आउटडेटेड हो गए। आरोपी वर्मा ने नोटों के वाटर मार्क पर लगे लाल या नीले कलर के मोम के पेन के क्रॉस निशान मिटा दिए थे। पुलिस ने ये नोट जब्त किए हैं।
रिजेक्ट हुए कटे नोट कंट्रोल ऑफिसर के पास जमा करा दिए जाते हैं, जिन्हें बाद में श्रेडर मशीन में बारीक टुकड़ों में काट दिया जाता है। देवास सीएसपी तरुणेंद्र सिंह के मुताबिक जब्त किए गए सभी नोटों पर वैक्स इंक के ऐसे कोई निशान नहीं पाए गए, जो प्रक्रिया में गंभीर खामी की ओर इशारा कर रहा है।

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देवास की घटना के बाद इसे आसानी से समझा जा सकता है। रिजेक्ट नोटों पर दर्ज सीरीज और सीरियल को दूसरे छपे हुए नोट पर नए सिरे से प्रिंट कर नोट की गड्डी तैयार की जाती है। इसे आरबीआई को भेजा जाता है, जहां से यह बाजार में आ जाते हैं। जब प्रबंधन ने नोटों के नंबर व वाटर मार्क पर छेद की प्रक्रिया बंद कर दी तो मनोहर वर्मा के लिए काम आसान हो गया।

वाटर मार्क पर लगे लाल या नीले कलर कलर के मोम के पेन के क्रॉस निशान मिटाकर आसानी से बाजार में खपा दिया, जबकि रिजेक्टेड नोट पर दर्ज सीरीज और सीरियल नंबर का नोट प्रेस से आरबीआई, वहां से बैंक और फिर बैंक से बाजार में भी पहुंच जाता है। इस तरह बाजार में एक ही सीरीज, सीरियल नंबर के दो नोट हो जाते हैं। बड़ा संयोग होने पर ही यह दोनों नोट कभी एक साथ होते हैं। नोट तो असली ही होता है, इसलिए जांच करने पर भी सही पाया जाता है।

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