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गृहमंत्री अमित शाह ने कश्मीर में राष्ट्रपति शासन बढ़ाने का प्रस्ताव किया पेश, कांग्रेस का विरोध

संजीवनी टुडे 28-06-2019 13:27:11

संसद के बजट सत्र के दौरान आज लोकसभा में गृहमंत्री अमित शाह ने जम्‍मू कश्‍मीर से संबंधित दो प्रस्‍ताव- जम्‍मू कश्‍मीर में राष्‍ट्रपति शासन बढ़ाने व आरक्षण संशोधन प्रस्‍ताव पेश किए। अमित शाह ने कहा कि कश्मीर में हालात इस समय कंट्रोल में हैं। घाटी में आतंक के खिलाफ कड़े कदम उठाए गए। हमारी सरकार ने आतंकवाद की जड़ें उखाड़ फेंकने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है।


नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के दौरान आज लोकसभा में गृहमंत्री अमित शाह ने  जम्‍मू कश्‍मीर से संबंधित दो प्रस्‍ताव- जम्‍मू कश्‍मीर में राष्‍ट्रपति शासन बढ़ाने व आरक्षण संशोधन प्रस्‍ताव पेश किए। अमित शाह ने कहा कि कश्मीर में हालात इस समय कंट्रोल में हैं। घाटी में आतंक के खिलाफ कड़े कदम उठाए गए। हमारी सरकार ने आतंकवाद की जड़ें उखाड़ फेंकने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है।

गृहमंत्री अमित शाह ने जम्मू कश्मीर आरक्षण संशोधन बिल सदन में पेश करते हुए कहा कि सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोग सबसे ज्यादा सीमा पार से होने वाली गोलीबारी से प्रभावित होते हैं और उन्हें आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि नियंत्रण रेखा से लगे लोगों को जो 3 फीसदी आरक्षण है इसके अदंर अतंरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक रहने वालों को भी 3 फीसदी आरक्षण मिलना चाहिए। ये आरक्षण किसी को खुश करने के लिए नहीं लेकिन मानवता के आधार पर उनकी समस्या को देखते हुए आरक्षण दिया जाना चाहिए।    

राष्‍ट्रपति शासन की अवधि को बढ़ाने के प्रस्‍ताव का विरोध करते हुए कांग्रेस ने जम्‍मू कश्‍मीर के हालात का जिम्‍मेवार भाजपा-पीडीपी गठबंधन को बताया। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी लोकसभा में कहा कि आज जो कश्मीर में हालात हैं, उसके लिए इतिहास में पीछे जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि 1990 में वीपी सिंह की सरकार थी, जिसे बीजेपी और लेफ्ट का समर्थन हासिल था, तब से जम्मू-कश्मीर के हालात बिगड़ने शुरू हुए। कांग्रेस की ओर से सरकार को चेताने के बावजूद भी राज्य के हालात नहीं सुधरे और वहां राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ा।

लोकसभा में आरएसपी सांसद एनके प्रेमचंद्रन ने कहा कि जम्मू कश्मीर में सीमावर्ती इलाकों में रह रहे लोग काफी लंबे वक्त से आरक्षण की मांग कर रहे थे लेकिन अब चुनावी फायदा होने के बाद उन्हें यह आरक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि राजनीतिक फायदे के लिए अब यह बिल लाया गया है और इसका विरोध करता हूं।  उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के साथ कश्मीर में विधानसभा चुनाव क्यों नहीं कराए गए, वह चुनाव भी शांतिपूर्ण तरीके से हो जाते। 

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अमित शाह पिछले दो दिनों से जम्‍मू कश्‍मीर के दौर पर थे। यहां उन्‍होंने राज्‍य की सुरक्षा व्‍यवस्‍था का जायजा लिया। सदन में राष्‍ट्रपति शासन की अवधि बढ़ाने का प्रस्‍ताव रखते हुए अमित शाह ने कहा है कि जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव इस साल के आखिर तक होंगे। उन्‍होंने कहा कि चुनाव आयोग इसकी घोषणा अलग से करेगा। 

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