संजीवनी टुडे

हिमालयन कान्क्लेव में हिमालय के संरक्षण पर होगा गहन मंथन

संजीवनी टुडे 12-07-2019 20:36:30

हिमालयी संस्कृति, आर्थिकी एवं पर्यावरण के संरक्षण के लिए सभी हिमालयी राज्य एक मंच पर आ रहे हैं।


देहरादून। हिमालयी संस्कृति, आर्थिकी एवं पर्यावरण के संरक्षण के लिए सभी हिमालयी राज्य एक मंच पर आ रहे हैं। हिमालयन कान्क्लेव में भारत के सभी हिमालयी राज्यों के मुख्यमंत्री, अधिकारी और विशेषज्ञ हिमालय के संरक्षण पर मंथन करेंगे। नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने भी इसमें शामिल होने की सहमति दी है। 28 जुलाई को मसूरी में प्रस्तावित हिमालयन कान्कलेव की तैयारियां शुरू हो गई हैं।मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत का कहना है कि हिमालयन कान्क्लेव में हिमालयी राज्यों की समस्याओं और उनके समाधान के लिए गहनता से मंथन किया जाएगा। यह मंथन भविष्य में हिमालयी राज्यों को वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने में मददगार साबित होगा। इससे नीति आयोग और वित्त आयोग को हिमालयी राज्यों की वास्तविक स्थिति को जानने में आसानी रहेगी। 

उत्तराखण्ड में पहली बार हिमालयन कान्क्लेव
उत्तराखण्ड में पहली बार हिमालयी सरोकार से जुड़े कान्क्लेव का आयोजन हो रहा है। इसमें मुख्यतः उत्तराखण्ड, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, आसाम, अरूणाचल प्रदेश, मेघालय, नागालैंड, त्रिपुरा, मिजोरम एवं मणिपुर राज्यों के मुख्यमंत्री और प्रतिनिधि शामिल होंगे। व्यापक विचार विमर्श के बाद एक हिमालयन ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा जो कि नीति आयोग को प्रेषित किया जाएगा। हिमालय की रक्षा और संसाधनों का विकास होगा मुख्य एजेंडा बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग के कारण भारतीय संस्कृति और सभ्यता के मूल स्त्रोत हिमालय के साथ यहां की जीवनदायिनी नदियों पर संकट मंडरा रहा है। हिमालयी इकोलॉजी की रक्षा के साथ संसाधनों का विकास कान्क्लेव का मुख्य एजेंडा रहेगा। 

यहां की अर्थव्यवस्था को उन्नत करने पर भी जोर रहेगा ताकि युवाओं को रोजगार के लिए पलायन न करना पड़े। इसका सामरिक महत्व भी ज्यादा है। सभी हिमालयी राज्यों की सीमाएं दूसरे देशों से जुड़ी हुई हैं। इस दृष्टि से भी कान्क्लेव में चर्चा की जा सकती है। इसके अलावा जल संरक्षण और जल संवर्धन पर भी फोकस रहेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जलशक्ति मंत्रालय बनाकर जल संरक्षण और जल संवर्धन की बड़ी पहल की है। इसमें हिमालयी राज्यों की सहभागिता बहुत जरूरी है। ग्लेशियरों, नदियों, झीलों, तालाबों और वनों को ग्लोबल वार्मिंग से बचाना भी कान्क्लेव के एजेंडे में होगा।

सस्टेनेबल डेवलपमेंट की बनेगी कार्ययोजना
एक ओर जहां हिमालय का संरक्षण जरूरी है वहीं यहां के दूरदराज के गांवों में आधारभूत सुविधाओं का विकास कर स्थानीय लोगों के लिए आजीविका उपलब्ध करवाना भी आवश्यक है। इसके लिए सस्टेनेबल डेवलपमेंट पर विशेष ध्यान देना होगा। कान्क्लेव में हिमालयी राज्यों में सतत विकास की कार्ययोजना भी तैयार की जाएगी। 

नीति आयोग को सौंपा जाएगा ड्राफ्ट
हिमालयन कान्क्लेव में वैचारिक मंथन के बाद प्राप्त निष्कर्षों को एक ड्राफ्ट का रूप देते हुए नीति आयोग को सौंपा जाएगा। इससे नीति आयोग को हिमालयी राज्यों के लिए नीति निर्धारण करने में मदद मिलेगी। नीति आयोग को हिमालयी राज्यों की आकांक्षाओं, आवश्यकताओं व क्षमताओं के बारे में पता चलेगा। 

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