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भड़काऊ भाषण मामले में FIR दर्ज करने संबंधी याचिका पर सुनवाई टली, केंद्र को चार हफ्ते में देना होगा जवाब

संजीवनी टुडे 27-02-2020 20:19:00

दिल्ली हाई कोर्ट ने भड़काऊ भाषण मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग करने वाली याचिका पर गुरुवार को सुनवाई टाल दी है। साथ ही केंद्र सरकार को पक्षकार बनाने की अनुमति दे दी।


नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने भड़काऊ भाषण मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग करने वाली याचिका पर गुरुवार को सुनवाई टाल दी है। साथ ही केंद्र सरकार को पक्षकार बनाने की अनुमति दे दी।

चीफ जस्टिस डीएन पटेल की अध्यक्षता वाली बेंच ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर चार हफ्ते यानि 13 अप्रैल तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान हर्ष मंदर की ओर से वकील कालिन गोंजाल्वेस ने कहा कि यह मामला नई बेंच के समक्ष लिस्ट हुई है, इसलिए हम घटनाओं के बारे में बताना चाहते हैं।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मैं कल के कोर्ट के आदेश के बारे में बताना चाहता हूं। मेहता ने कहा कि इस याचिका में महीने दिन पहले दिए गए भाषण पर जल्द सुनवाई की मांग की गई है। कोर्ट ने पूछा कि कैसा भाषण। तुषार मेहता ने बताया कि उनके मुताबिक हेट स्पीच। याचिकाकर्ता को केवल कुछ वीडियो दिखाने की सुविधा नहीं है। मामले को देखने के बाद इसमें कोई जल्दबाजी नहीं है। याचिकाकर्ता की तरह हम चुने हुए वीडियो पर विचार नहीं कर सकते हैं। तुषार मेहता ने कल के जस्टिस मुरलीधर के आदेश को पढ़कर सुनाया। उन्होंने केंद्र सरकार को पक्षकार बनाने की मांग की। तुषार मेहता ने कहा कि उन्होंने सारे वीडियो देखें हैं और कोई फैसला करने में समय लगेगा, क्योंकि अभी माहौल ठीक नहीं है और उन्होंने याचिका का जवाब देने के लिए समय देने की मांग की।

दिल्ली सरकार की ओर से वकील राहुल मेहरा ने कहा कि कल के आदेश के मुताबिक पुलिस आयुक्त को तीन वीडियो के बारे में फैसला करना था। वीडियो कोर्ट में दिखाए गए थे। राहुल मेहरा ने तुषार मेहता के टोकने पर कहा कि आप मत टोकिए, ये शाहीन बाग नहीं है। राहुल मेहरा ने कहा कि जांच के लिए पहला कदम एफआईआर दर्ज करना है। अगर गलती होगी तो एफआईआर बाद में निरस्त हो सकता है। आज की सबसे बड़ी जरूरत लोगों की भलाई है।

तुषार मेहता ने कहा कि याचिकाकर्ता हिंसा पर एफआईआर दर्ज नहीं करवाना चाहते हैं बल्कि स्पीच पर एफआईआर दर्ज करवाना चाहते हैं। दिल्ली पुलिस के मुताबिक अब तक 48 एफआईआर दर्ज किए गए हैं। मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने लिखित आदेश में सीधे-सीधे एफआईआर दर्ज करने का आदेश नहीं दिया। दिल्ली हाई कोर्ट ने पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के बारे में उचित फैसला लेने को कहा है। मामले की सुनवाई कल यानि 27 फरवरी को भी होगी।

कालिन गोंजाल्वेस ने कहा कि हमसे यह नहीं पूछा गया कि केंद्र सरकार को पक्षकार बनाया जाए या नहीं। हालांकि हमें केंद्र सरकार को पक्षकार बनाने में कोई आपत्ति नहीं है। गोंजाल्वेस ने कहा कि जस्टिस मुरलीधर ने कल एफआईआर दर्ज करने पर जोर दिया था। उन्होंने कहा कि जाओ और मारो आज एक राजनीतिक दल का नारा हो गया है। हमलावर इस राजनीतिक दल की रैलियों में हिस्सा ले रहे हैं।

गोंजाल्वेस ने कहा कि बड़े-बड़े प्रदर्शनों के बावजूद समाज में शांति रह सकती है, लेकिन ऐसे नारों से स्थिति खराब होती है। लोगों से जाकर मारने को कहा जाता है। घृणा की बातें फैलाई जा रही हैं। भड़काऊ वीडियो पूरे देश में देखा जा रहा है। अगर इन हेट स्पीच की वजह से किसी की हत्या होती है तो हेट स्पीच देने वाले के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। ये लोग सत्ताधारी दल के बड़े नेता हैं। अगर वे ऐसा बोलेंगे तो आम जनता का क्या होगा।

गोंजाल्वेस ने हेट स्पीच देने वाले नेताओं की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। उन्होंने गोली मारो... वाला भाषण सुनाया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में पुलिस को बताया गया, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने हेट स्पीच को लेकर हाई कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया। उन्होंने कहा कि इस मामले में एक दिन का भी इंतजार नहीं किया जा सकता है।

लायर्स वॉयस की ओर से वकील चेतन शर्मा ने कहा कि दिल्ली में शांति लौटना सबसे जरूरी है। उन्होंने कहा कि ये सब कुछ अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप के दौरे के समय ही क्यों हुआ। किसके कहने पर लोग सड़कों पर आए, उन्हें गिरफ्तार करने की जरूरत है। चेतन शर्मा ने कहा कि हमारी याचिका पर विचार किए बिना कोर्ट कोई आदेश पारित नहीं करे।

पिछली 26 फरवरी को सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट के जज जस्टिस मुरलीधर ने भड़काऊ बयान के मामले में एफआईआर दर्ज करने पर विचार करने का निर्देश दिया था। उसी रोज सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट में बीजेपी विधायक अभय वर्मा और सांसद प्रवेश वर्मा के बयान का क्लिप कोर्ट में दिखाया गया था। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर का भी वीडियो दिखाया गया था। तब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि याचिकाकर्ता जान-बूझकर इन्हीं चार वीडियो क्लिप की बात क्यों कर रहे हैं? और भी बहुत क्लिप हैं।

कोर्ट ने पूछा था कि आप एफआईआर कब दर्ज करेंगे। तुषार मेहता ने कहा था कि उचित समय पर दर्ज होगा। जस्टिस मुरलीधर ने कहा था चूंकि दिल्ली जल रही है। अब कब उचित समय आएगा? कोर्ट ने तुषार मेहता से पूछा था कि जब आपके पास इतने क्लिप हैं तो आपको एफआईआर दर्ज करने से किसने रोका है।

कोर्ट में मौजूद पुलिस अधिकारी से जस्टिस मुरलीधर ने पूछा था कि जब आप सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान के लिए एफआईआर दर्ज कर सकते हैं तो भड़काऊ बयान के मामले में क्यों नहीं?

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