संजीवनी टुडे

अरावली में निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट की हरियाणा सरकार को चेतावनी

संजीवनी टुडे 01-03-2019 14:23:01


नई दिल्ली। फरीदाबाद से सटे अरावली पर्वत में अवैध निर्माण के मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार को चेतावनी दी है कि उसके खिलाफ कोर्ट की अवमानना का मामला चल सकता है। 

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कोर्ट ने हरियाणा सरकार द्वारा हाल ही में अरावली पर्वत पर निर्माण कार्य की अनुमति देने के लिए नए कानून को मंजूरी दी है। इस पर कोर्ट नाराज हो गई और इस कानून को लागू नहीं करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि यह कानून पारित कर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन किया गया है। कोर्ट ने कहा कि आप सर्वोच्च नहीं हैं, इस देश का कानून सर्वोच्च है।

कोर्ट ने कहा कि हम जानते हैं कि हरियाणा सरकार ने ऐसा बिल्डरों के पक्ष में किया है। ऐसा करना जंगलों को खत्म करना होगा| इसीलिए हमने पहले चेतावनी दी थी। लेकिन हरियाणा सरकार हमारी बात नहीं सुन रही है और हमारे आदेश का उल्लंघन करते हुए कानून पारित किया है।

11 दिसंबर 2018 को फरीदाबाद में दिल्ली की सीमा से सटे कांत एनक्लेव में अवैध निर्माण के मामले में हरियाणा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में मुआवजे की राशि जमा की थी। सुनवाई के दौरान हरियाणा के चीफ सेक्रेटरी पेश हुए थे। 

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने हरियाणा के मांगर गांव के पास चल रहे निर्माण कार्य पर हैरानी जताते हुए कहा था कि दक्षिण में ऐसे जंगल हैं, जहां लोग अपने जूते उतारकर जंगल में जाते हैं और यहां हम जंगलों के साथ क्या कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के चीफ सेक्रेटरी को मामले को देखने का निर्देश दिया था। 

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार को फटकार लगाई थी। कोर्ट ने कहा था कि कांत एनक्लेव के सभी रहवासियों को 50 लाख रुपये मुआवजा देना होगा। कोर्ट ने कहा कि ये मुआवजा 10 दिसंबर तक देना होगा।

पिछले 11 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने कांत एनक्लेव को गिराने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिया था कि इन अवैध निर्माणों को गिराएं। कोर्ट ने कहा था कि निर्माण जंगल की जमीन पर हुआ है। इसमें सरकार की बड़ी भूमिका है। 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जिन लोगों ने कांत एनक्लेव में मकान बनाए हैं, उन्हें हरियाणा सरकार मुआवजा दे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अधिकतम मुआवजा 50 लाख होगा। 

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हरियाणा सरकार ने अरावली के पास बने 12 अक्टूबर 2014 से पहले निर्मित भवनों को रेगुलर कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट अरावली को जंगल मानते हुए इसके संरक्षण का आदेश दिया था।

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