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अयोध्या में पहली कारसेवा के निर्णय की घोषणा का साक्षी है हरिद्वार

संजीवनी टुडे 02-08-2020 17:40:00

अयोध्या आंदोलन में हरिद्वार की विशेष भूमिका है। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण आंदोलन के अहम पड़ाव का गंगा तट पर स्थित हरिद्वार साक्षी है।


हरिद्वार। अयोध्या आंदोलन में हरिद्वार की विशेष भूमिका है। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण आंदोलन के अहम पड़ाव का गंगा तट पर स्थित हरिद्वार साक्षी है। हरिद्वार में हुईं विश्व हिंदू परिषद (विहिप) केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठकों और धर्म संसदों के  निर्णयों ने न केवल आंदोलन को धार दी, वरन इसे विश्वव्यापी बनाया। परिषद के 1990 में अयोध्या में पहली बार कार सेवा के निर्णय की  घोषणा हरिद्वार में आयोजित केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक में ही हुई थी। इसके बाद  श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन अपने शिखर पर पहुंचा। ...और रामलला के मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ ।

हरिद्वार विश्व हिंदू परिषद की गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। हरिद्वार में ही परिषद ने राम जन्मभूमि आंदोलन की रूपरेखा तैयार की। यहां लिए गए  निर्णय भविष्य में महत्वपूर्ण साबित हुए हैं। परिषद के केंद्रीय मंत्री राजेंद्र पंकज तो हरिद्वार में ही डेरा डाले थे। उनके नेतृत्व में कार्यकर्ताओं क प्रभावी टीम हरिद्वार में थी। यहां के प्रमुख संतों का भी विहिप को समर्थन व आशीर्वाद प्राप्त था। इस वजह से हरिद्वार को  विहिप के बड़े कार्यक्रमों, केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठकों व धर्म संसदों के आयोजन का अवसर मिला। इन बैठकों में ऐतिहासिक फैसले लिए गए। यही फैसले आगे चलकर निर्णायक साबित हुए।

आंदोलन के प्रमुख सूत्रधार और विहिप नेता राजेंद्र पंकज ने इस संबंध में हिन्दुस्थान समाचार से कहा कि विहिप की पहली धर्म संसद दिल्ली के विज्ञान भवन में 5-6 अप्रैल 1984 को हुई थी। इसमें पहली बार अयोध्या, मथुरा व काशी के धर्मस्थानों को हिंदुओं को सौंपने का प्रस्ताव आया था। यहीं से राम जन्मभूमि को मुक्त कराने की नींव पड़ी। बाद में उत्तर प्रदेश की कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे दाऊ दयाल खन्ना ने विश्व हिंदू परिषद के सम्मेलनों में राम जन्मभूमि को मुक्त कराने का प्रस्ताव जनता के बीच रख उस पर हिंदू समाज की मुहर लगवाई। तभी 9 नवंबर 1989 को विश्व हिंदू परिषद ने पूरे देश में रामशिला पूजन कार्यक्रम की घोषणा की। इससे पूर्व राम ज्योति यात्राओं के माध्यम से आंदोलन गतिमान हो चुका था।

वह कहते हैं कि इसी बीच 24 जून 1990 को हरिद्वार के भारत माता मंदिर समन्वय कुटीर में विहिप की केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक हुई। इस बैठक में ही 30 अक्टूबर 1990 को अयोध्या में कार सेवा करने के फैसले की घोषणा की गई । 

यह घोषणा ने उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की नींद उड़ा दी। यादव ने एलान किया कि 30 अक्टूबर को अयोध्या में परिंदा भी पर नहीं मार सकता। मगर यह तारीख इतिहास बनी। अयोध्या में न केवल हजारों कार सेवक वरन विहिप के तत्कालीन महासचिव व आंदोलन के शीर्ष पुरुष अशोक सिंघल भी पहुंच गए। अयोध्या में कार सेवकों पर पुलिस ने गोलियां चलाईं। इसमें कोठारी बंधुओं सहित अनेक कारसेवक मारे गए। इससे सारे देश में हिंदू समाज में आक्रोश की लहर फैल गई । ...और राम जन्मभूमि आंदोलन  राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन  बन गया।

मुलायम सिंह यादव को इसका खामियाजा 1991 के चुनाव में उठाना पड़ा और कल्याण सिंह के नेतृत्व में पहली बार उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी। 13 दिसंबर 2005 तथा 11 जून 2013  सहित  हरिद्वार में आयोजित  धर्म संसदों व अन्य  केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल बैठकों में तत्कालीन सरकारों को चेताते हुए राम मंदिर निर्माण पर  कड़े फैसले लिए गए। उन्हीं का प्रतिफल  राम जन्मभूमि के मंदिर के  भूमि पूजन के रूप में आज  हमारे सामने है।  

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