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हरेन पांड्या हत्याकांड: नए सिरे से जांच संबंधी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

संजीवनी टुडे 12-02-2019 17:21:30


नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के पूर्व गृह मंत्री हरेन पंड्या की हत्या की दोबारा जांच की मांग करने वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा।

पिछले 8 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई करने के लिए जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष भेजा था। जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ही इसी मामले में सीबीआई की अपील पर सुनवाई कर रही है। याचिका सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (सीपीआईएल) ने दायर की है।

याचिका में कहा गया है कि सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में गवाह आजम खान के बयानों से इस केस में नया खुलासा हुआ है। आजम खान ने 03 नवंबर,2018 को ट्रायल कोर्ट में दिए बयान में कहा था कि हरेन पंड्या की हत्या एक कांट्रैक्ट किलिंग का हिस्सा थी। हरेन पंड्या की हत्या की सुपारी डीजी वंजारा ने दी थी। याचिका में कहा गया है कि आजम खान ने ये भी खुलासा किया था कि सोहराबुद्दीन के सहयोगी तुलसीराम प्रजापति ने उसी सुपारी के तहत हरेन पंड्या की हत्या की थी।

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याचिका में पत्रकार राणा अय्यूब लिखित पुस्तक गुजरात फाइल्स में बातचीत के रिकॉर्ड का हवाला दिया गया है। उस बातचीत में हरेन पंड्या केस को देख रहे सीबीआई अधिकारी वाईए शेख ने राणा अय्यूब को बताया था कि सीबीआई ने इस मामले की अपने से जांच नहीं की थी। सीबीआई ने वही किया जो गुजरात पुलिस ने कहा। वाईए शेख ने खुलासा किया था कि हरेन पंड्या की मौत एक राजनीतिक साजिश की वजह से हुई, जिसमें कई राजनेता और आईपीएस अफसर शामिल थे।

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इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने जून 2007 में 12 लोगों को दोषी करार दिया था। हाईकोर्ट ने 2011 में सभी को बरी कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि जांच गलत दिशा में की गई और इसके लिए जांच अधिकारी जिम्मेदार हैं। याचिका में कहा गया है कि नए खुलासे से हाईकोर्ट की आशंका सही साबित होती है। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में की गई अपील अभी लंबित है।

 

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