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गूगल ने कैफी आजमी पर डूडल बनाया

संजीवनी टुडे 14-01-2020 13:03:06

गूगल ने मंगलवार को उर्दू के प्रख्यात कवि एवं संगीतकार कैफी आजमी की 101वीं जयंती पर डूडल बनाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। डूडल में श्री आजमी को सफेद कुर्ते में माइक के सामने दिखाया गया है।


कोलकाता।  गूगल ने मंगलवार को उर्दू के प्रख्यात कवि एवं संगीतकार कैफी आजमी की 101वीं जयंती पर डूडल बनाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। डूडल में श्री आजमी को सफेद कुर्ते में माइक के सामने दिखाया गया है। कैफी आजमी को 20वीं सदी के सबसे प्रसिद्ध कवि के तौर पर जाना जाता है। उन्होंने बॉलीवुड के लिए कई गीत लिखे।

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श्री आजमी का जन्म 14 जनवरी 1919 में उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में हुआ था। उन्होंने महज 11 वर्ष की उम्र में पहली कविता लिखी थी। वह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन सेे प्रभावित होकर बंबई (अब मुंबई) चले गए जहां वह एक उर्दू अखबार के लिए लिखने लगे।

महिला समानता पर लिखी उनकी कविता ‘औरत’ उनकी प्रसिद्ध कविताओं में से एक है। इसके बाद उन्होंने 1970 के दशक में चेतन आंनद की फिल्म ‘हीर रांझा’ के डायलॉग लिखे। यह उनकी जबरदस्त उपलब्धि थी। उन्होंने 1976 में श्याम बेनेगल की फिल्म ‘मंथन’ और 1977 मेंं फिल्म ‘कनेश्वरा रामा’ के डायलॉग भी लिखे।
उन्होंने कोहरा (1964), अनुपमा (1966), उसकी कहानी (1966), सात हिंदुस्तानी (1969), शोला और शबनम, परवाना (1971), बावर्ची (1972), पाकीजा (1972) और अर्थ (1982) जैसी फिल्मों के गीत लिखे।

फिल्म ‘नौनिहल’ फिल्म के लिए उन्होंने ‘मेरी आवाज सुनो प्यार का राज सुनो’ गीत लिखा जिसे मोहम्मद रफी ने अपनी आवाज दी । श्री आजमी को तीन बार फिल्म फेयर अवॉर्ड, साहित्य और शिक्षा के लिए वर्ष 1974 में पद्मश्री और 2002 में भारत का सर्वोच्च साहित्य सम्मान साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया।
कैफी आजमी भारत की जानीमानी फिल्म अभिनेत्रा एवं पूर्व सांसद शबाना आजमी के पिता थे। दस मई 2002 को कैफी आजमी का निधन हो गया।

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