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अयोध्या में पत्थर तराशने का आगे का कार्य धर्माचार्यों के निर्णय के बाद लिया जायेगा: विहिप

संजीवनी टुडे 10-11-2019 17:23:16

अयोध्या में पत्थर तराशने का आगे का कार्य धर्माचार्यों के निर्णय के बाद लिया जायेगा: विहिप


अयोध्या। विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) ने कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिये पत्थर तराशने का आगे का कार्य संत-धर्माचार्यों के निर्णय के बाद लिया जायेगा। विश्व हिन्दू परिषद के प्रवक्ता शरद शर्मा ने आज यहां विश्व हिन्दू परिषद मुख्यालय कारसेवकपुरम् में 'यूनीवार्ता' से कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए प्रस्तावित मॉडल के अनुसार प्रथम तल की निर्माण सामग्री लगभग तैयार कर ली गयी है जबकि दूसरे तल के लिये मंदिर निर्माण पत्थरों को तराशने का कार्य अब संत-धर्माचार्य के निर्णय के बाद ही किया जायेगा। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने मंदिर निर्माण के लिये केन्द्र सरकार को एक ट्रस्ट बनाये जाने के लिये कहा है और उसका समय भी नब्बे दिन का दिया गया है। 

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जिस दिन केन्द्र सरकार ट्रस्ट बना देगी उसके बाद मंदिर निर्माण उच्चाधिकारी समिति एवं श्रीरामजन्मभूमि न्यास की एक बैठक होगी, जिसमें आगे की रणनीति तय की जायेगी। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने राम मंदिर निर्माण के लिये मार्ग प्रशस्त कर दिया है और यह मान लिया है कि भगवान श्रीराम का जन्म उसी स्थान पर हुआ था, लेकिन साथ ही साथ यह भी केन्द्र सरकार से कहा है कि एक ट्रस्ट बनाया जाय जिसकी मियाद 90 दिन है। विहिप प्रवक्ता ने बताया कि राम मंदिर निर्माण के लिये पैंसठ फीसदी कार्य पूरा हो चुका है। 

जैसे ही केन्द्र सरकार नब्बे दिन के अंदर ट्रस्ट बना देगा। वैसे ही संत धर्माचार्यों का एक बैठक करके दूसरे तल के लिए पत्थरों का तराशना शुरू किया जायेगा। उन्होंने बताया कि कार्यशाला की स्थापना 1990 से हुई थी। तभी से मंदिर के लिये पत्थर तराशे जा रहे हैं। सन् 1855 से चल रहे अयोध्या विवाद में नौ नवम्बर 2019 को उच्चतम न्यायालय ने फैसला सुनाया लेकिन अयोध्या में प्रस्तावित राम मंदिर का मॉडल 1959 में प्रयागराज कुम्भ के दौरान ही देवरहा बाबा समेत देश के शीर्ष संतों के अनुमोदन पर तैयार कर लिया गया था। 

इस राम मंदिर मॉडल के चित्र को घर-घर तक पहुंचाने का कार्य किया गया था जिसके बाद शिलापूजन का कार्यक्रम किया गया था। उन्होंने बताया कि चंदन की लकड़ी से बने राम मंदिर के प्रस्तावित मॉडल को अयोध्या की इस कार्यशाला में रखा गया है जिसे आज भी देश-विदेश के काफी श्रद्धालु आकर देखते हैं।

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