संजीवनी टुडे

भगवान जगन्नाथपुरी की रथ यात्रा शुरू, जानिए अनसुनी बातें...

संजीवनी टुडे 14-07-2018 09:40:29


पुरी। ओडिशा में आज 14 जुलाई से सालाना रथ यात्रा शुरू हो गई है यूनेस्‍को द्वारा पुरी के एक हिस्‍सों को वर्ल्‍ड हेरिटेज यानी वैश्विक धरोहर की सूची में शामिल किए जाने के बाद से यह पहली रथ यात्रा है।

इस बार की रथ यात्रा की थीम 'धरोहर' है भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को जगन्नाथपुरी से शुरू होती है इस भव्‍य यात्रा में शामिल होने के लिए यहां दूर-दूर से लोग आते हैं।

जगन्नाथपुरी रथ यात्रा क्‍या है

रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, भगवान बालभद्र और देवी सुभद्रा अपने घर जगन्नाथ मंदिर से रथ में बैठकर गुंडिचा मंदिर जाते हैं। गुंडिचा मंदिर को भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर माना जाता है। भगवान जगन्नाथ के रथ के सामने सोने के हत्‍थे वाले झाड़ू को लगाकर रथ यात्रा को आरंभ किया जाता है। उसके बाद पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप के बीच तीन विशाल रथों को सैंकड़ों लोग खींचते हैं।

इस क्रम में सबसे पहले बालभद्र का रथ प्रस्‍थान करता है उसके बाद बहन सुभद्रा का रथ चलता है फिर आखिर में भगवान जगन्नाथ का रथ खींचा जाता है। रथ खींचने वाले लोगों के सभी दुख दूर हो जाते हैं और उन्‍हें मोक्ष प्राप्‍त होता है। नगर भ्रमण करते हुए शाम को ये तीनों रथ गुंडिचा मंदिर पहुंच जाते हैं अगले दिन भगवान रथ से उतर कर मंदिर में प्रवेश करते हैं और सात दिन वहीं रहते हैं।

रथ यात्रा के दौरान साल में एक बार भगवान जगन्नाथ अपने भाई-बहनों के साथ जगन्नाथ मंदिर से इसी गुंडिचा मंदिर में रहने के लिए आते हैं अपनी मौसी के घर में भगवान एक हफ्ते तक ठहरते हैं, जहां उनका खूब आदर-सत्‍कार होता है।

अच्‍छे पकवान खाकर भगवान बीमार हो जाते हैं फिर उन्‍हें पथ्‍य का भोग लगाया जाता है और वह जल्‍दी ठीक हो जाते हैं  गुंडिचा मंदिर में इन नौ दिनों में भगवान जगन्नाथ के दर्शन को आड़प-दर्शन कहा जाता है। इन दिनों विशेष रूप से नारियल, लाई, गजामूंग और मालपुए का प्रसाद मिलता है।

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फिर दिन पूरे होने के बाद भगवान जगन्नाथ अपने घर यानी कि जगन्नाथ मंदिर वापस चले जाते हैं।

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